मप्र को पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से इतनी हुई कमाई, टैक्स कम पर क्या बोले वित्तमंत्री?
Indore. मई में हुए विधानसभा चुनावों के बाद केंद्र ने देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की थी। इससे भले ही आम जनता परेशान हुई हो, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार को इससे हजारों करोड़ की कमाई हुई है। इस कमाई का खुलासा अब मप्र विधानसभा में एक सवाल के जवाब में हुआ है।
विधायक कटारे ने यह लगाया सवाल
विधायक हेमंत कटारे ने इसे लेकर सवाल लगाया था। उन्होंने विधानसभा में वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा से पूछा कि मप्र में पेट्रोल और डीजल पर कितना टैक्स वसूला जाता है। इस टैक्स से एक अप्रैल 2026 से सरकार को कितना राजस्व मिला। बताया जाता है कि पड़ोसी राज्य में टैक्स कम होने से वाहन चालक यहां से पेट्रोल-डीजल नहीं लेते हैं। क्या मप्र सरकार टैक्स कम करने पर विचार कर रही है।
वित्तमंत्री ने बताया 3604 करोड़ कमाए
वित्तमंत्री ने बताया कि पेट्रोल पर मप्र में 29 फीसदी वैट, 2.50 रुपए प्रति लीटर एडीशनल टैक्स व एक फीसदी सरचार्ज है। डीजल पर 19 फीसदी वैट, 1.50 रुपए प्रति लीटर सरचार्ज है और एक फीसदी सरचार्ज है। इस टैक्स से मप्र सरकार को अप्रैल से जून माह तक कुल 3604 करोड़ की कमाई हुई है
पेट्रोल-डीजल पर टैक्स क्या कम करेंगे
विधायक कटारे ने यह भी पूछा कि पड़ोसी राज्यों में टैक्स कम है तो क्या मप्र में भी टैक्स कम करेंगे। इस पर वित्तमंत्री ने कहा कि विविध संगठनों के इस संबंध में पत्र मिले हैं। टैक्स की दर कम करना एक नीतिगत फैसला है। अभी इसे कम करने पर राज्य सरकार कोई विचार नहीं कर रही है। इस संबंध में कोई कार्रवाई प्रचलित नहीं है।
विधानसभा में यूसीसी बिल पास हुआ
इसी बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी बिल पास हो गया। यह बिल भारी हंगामे के बीच मंजूर हुआ। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद MP चौथा राज्य बन गया। बिल में लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह से जुड़े नए नियम हैं। कानून बनने के बाद लिव-इन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
भोपाल में मंगलवार को विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा था। यह सत्र का दूसरा दिन था। सदन में भारी हंगामा और नारेबाजी हुई। इसी बीच समान नागरिक संहिता, यानी यूसीसी (UCC – Uniform Civil Code) बिल पास कर दिया गया।
विपक्ष का जोरदार विरोध
विपक्ष ने इस बिल का जोरदार विरोध किया। कई विधायक वॉकआउट करने की कोशिश करते रहे। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यवाही जारी रखी। अंत में उन्होंने बिल को पास घोषित कर दिया।
सत्र शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी बिल चर्चा के लिए पेश किया। बिल पेश होते ही विपक्ष आक्रामक हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा विरोध जताया। सिंघार ने मांग की कि बिल को प्रवर समिति के पास भेजा जाए। प्रवर समिति यानी सेलेक्ट कमेटी विस्तृत समीक्षा करती है। लेकिन सरकार ने यह मांग खारिज कर दी। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई।
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