MP में मेडिकल शिक्षा का हाल बेहाल! 3 साल पहले सभी कॉलेजों के लिए घोषणा, अब तक सिर्फ 3 में पढ़ाई
2023 में सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए हुई थी घोषणा
मध्य प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने के लिए सरकार ने जनवरी 2023 में बड़ी घोषणा की थी। तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने 5 जनवरी 2023 को फिजियोथैरेपी कोर्स (MP Physiotherapy Course) शुरू करने का ऐलान किया था।
यह कोर्स गांधी मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शुरू होना था। इससे विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई के नए अवसर मिलने की उम्मीद थी।
लेकिन अक्टूबर 2026 तक यह घोषणा पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी है। बाकी कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने की कोई स्पष्ट समयसीमा भी सामने नहीं आई है।
सिर्फ तीन मेडिकल कॉलेजों में हो रही पढ़ाई
भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ के मुताबिक, प्रदेश के केवल तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों (MP Medical Colleges) में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई हो रही है। इनमें जबलपुर, इंदौर और शहडोल के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
संगठन का कहना है कि बाकी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब तक यह कोर्स शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में विद्यार्थियों के पास सरकारी संस्थानों में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई के सीमित विकल्प मौजूद हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने अब तक कितने नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी है। किन कॉलेजों में कोर्स शुरू करने की तैयारी पूरी हुई है, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है।
हमीदिया अस्पताल में एक फिजियोथैरेपिस्ट होने का दावा
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े हमीदिया अस्पताल में भी फिजियोथैरेपी (Physiotherapy) सेवाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ का दावा है कि इतने बड़े अस्पताल में सिर्फ एक फिजियोथैरेपिस्ट कार्यरत है।
हालांकि, अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट के स्वीकृत और खाली पदों की आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
हमीदिया अस्पताल में गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं से प्रभावित मरीजों का भी इलाज किया जाता है। इनमें कई मरीजों को इलाज के बाद फिजियोथैरेपी की जरूरत पड़ सकती है।
स्ट्रोक, लकवा और हड्डियों के ऑपरेशन के बाद मरीजों को दोबारा सामान्य गतिविधियां शुरू करने में मदद चाहिए। ऐसे मामलों में फिजियोथैरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विशेषज्ञों की संख्या पर्याप्त नहीं होने पर मरीजों के पुनर्वास और नियमित उपचार पर असर पड़ सकता है।
कोर्स शुरू करने के लिए कई इंतजाम जरूरी
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नया कोर्स शुरू करने के लिए सिर्फ घोषणा करना ही पर्याप्त नहीं होता है। इसके लिए शिक्षकों, प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण से जुड़ी दूसरी सुविधाओं का इंतजाम करना पड़ता है।
फिजियोथैरेपी की पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी जरूरी होती है। इसके अलावा संबंधित संस्थानों को मान्यता और जरूरी प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
इन सभी व्यवस्थाओं के लिए बजट और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन 2023 की घोषणा के बाद किन कॉलेजों में ये इंतजाम किए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी सामने नहीं आया कि सरकार ने सभी कॉलेजों के लिए कोई चरणबद्ध योजना बनाई थी या नहीं।
सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ पद बनाने की मांग
भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ ने सरकारी अस्पतालों में फिजियोथैरेपी विशेषज्ञों के अलग-अलग पद बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मरीजों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
संघ ने हड्डी और जोड़, न्यूरोलॉजी तथा हृदय और फेफड़ों से जुड़ी फिजियोथैरेपी के लिए पद मांगे हैं। इसके अलावा बाल चिकित्सा, खेल चोट, कैंसर और महिला स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों की मांग भी की गई है।
इन सभी क्षेत्रों में मरीजों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। इसलिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ उपलब्ध होने से पुनर्वास सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन पदों की स्वीकृति और भर्ती को लेकर सरकार की कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आई है।
फिजियोथैरेपी की नियामक व्यवस्था का मुद्दा भी उठा
भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ ने फिजियोथैरेपी शिक्षा और सेवाओं की नियामक व्यवस्था को लेकर भी मांग उठाई है। संगठन संबंधित कानूनी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बता रहा है।
इस मामले में राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम, 2021 के प्रावधान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश की मौजूदा पैरामेडिकल व्यवस्था की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट करने की जरूरत बताई गई है।
पाठ्यक्रमों की मान्यता, शिक्षा की गुणवत्ता और पेशेवर मानकों से जुड़ी जिम्मेदारियां तय होना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों को नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
बजट और नए कोर्स की मंजूरी पर स्थिति स्पष्ट नहीं
घोषणा के तीन साल से ज्यादा समय बाद भी योजना की प्रगति से जुड़ी कई जानकारियां उपलब्ध नहीं हैं। सरकार ने कितने नए फिजियोथैरेपी पाठ्यक्रम स्वीकृत किए, इसका स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
किन मेडिकल कॉलेजों को कितना बजट मिला और अब तक कितनी राशि खर्च हुई, यह भी स्पष्ट नहीं है।
इसी तरह हमीदिया अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट के कितने पद स्वीकृत हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी जरूरी है। इनमें कितने पद खाली हैं और कितने कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है, यह भी सामने आना चाहिए।
इसके अलावा 2023 की घोषणा के बाद विभागीय स्तर पर कितनी समीक्षा बैठकें हुईं, इसकी जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
इन सभी सवालों के जवाब मिलने से योजना में देरी की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
विद्यार्थियों के साथ मरीजों को भी हो सकता है फायदा
मध्य प्रदेश में फिजियोथैरेपी कोर्स का विस्तार केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ा मामला नहीं है। इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली पुनर्वास सेवाओं का भी सीधा संबंध है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कोर्स बढ़ने से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। ट्रेनी फिजियोथैरेपिस्ट की उपलब्धता बढ़ने से अस्पतालों में मरीजों को भी फायदा हो सकता है।
हालांकि, इसके लिए नए पदों की स्वीकृति और योग्य विशेषज्ञों की नियुक्ति भी जरूरी होगी।
फिलहाल सरकार को कॉलेजवार प्रगति और योजना पर खर्च की गई राशि की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। बाकी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी कोर्स शुरू करने की स्पष्ट समयसीमा भी तय होनी चाहिए।
तीन साल पहले हुई घोषणा का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों और मरीजों तक पहुंचना ही इसकी सफलता होगी।