मध्य प्रदेश पुलिस को जल्द मिलेंगे 17 नए डीएसपी, इनमें 65% महिलाएं शामिल

Amresh Kushwaha | Sept 07, 2026, 09:04 IST
मध्य प्रदेश पुलिस को जल्द मिलेंगे 17 नए डीएसपी
मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में 46वें डीएसपी बैच की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। 17 प्रशिक्षु अधिकारियों में 11 महिलाएं शामिल हैं, जो राज्य में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में नया डीएसपी बैच शुरू हुआ।
  • इस बैच में कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं।
  • इनमें 11 महिला और 6 पुरुष अधिकारी हैं।
  • यानी नए बैच में 65 फीसदी अफसर महिलाएं हैं।
  • इस बार ट्रेनिंग में नए कानून और तकनीक पर खास जोर है।

नए बैच की शुरुआत

मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में नया डीएसपी बैच आया है। यह उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) का 46वां बैच है। इस बैच की बेसिक ट्रेनिंग शुरू हो गई है। इसमें 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हुए हैं। इनमें से 11 महिला अधिकारी हैं और छह पुरुष अधिकारी हैं। यानी नए बैच में महिलाओं की हिस्सेदारी 65 फीसदी है। यह आंकड़ा राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है। अकादमी के लिए भी यह बैच खास माना जा रहा है।



फील्ड ट्रेनिंग पर जोर

अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर रामजी श्रीवास्तव ने अहम जानकारी दी। उन्होंने इस बैच के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि यह पहला डीएसपी बैच है। इसमें फील्ड ट्रेनिंग को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी। उनके मुताबिक प्रशिक्षुओं को नए आपराधिक कानूनों की पूरी जानकारी दी जाएगी।



साथ ही आधुनिक तकनीक को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। यह बदलाव पुलिसिंग को समय के साथ अपडेट रखने के लिए किया गया है। श्रीवास्तव के अनुसार यह कदम आने वाले चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।



नए कानूनों की पढ़ाई

इस ट्रेनिंग में तीन नए कानूनों को खास जगह दी गई है। इनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) शामिल है। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) भी शामिल है। तीसरा कानून भारतीय साक्ष्य अधिनियम है। इन कानूनों के तहत अपराध अनुसंधान की बारीकियां सिखाई जाएंगी।



प्रशिक्षुओं को डिजिटल साक्ष्य जुटाने का तरीका भी बताया जाएगा। आजकल ज्यादातर मामलों में डिजिटल सबूत अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस हिस्से को गंभीरता से पढ़ाया जाएगा। अफसरों को अदालत में सबूत पेश करने का तरीका भी सिखाया जाएगा।



फॉरेंसिक और साइबर स्किल

पारंपरिक परेड और ड्रिल के अलावा प्रशिक्षुओं को नई स्किल भी सिखाई जाएंगी। इसमें फॉरेंसिक टूल्स का इस्तेमाल शामिल है। साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन का भी व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा। इसके अलावा ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। यानी खुले स्रोतों से जानकारी जुटाने की तकनीक सिखाई जाएगी। साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह ट्रेनिंग बेहद जरूरी मानी जा रही है। प्रशिक्षुओं को असली मामलों के आधार पर अभ्यास कराया जाएगा।



संविधान और मानवाधिकार पाठ

सिर्फ कानून और तकनीक ही नहीं, प्रशिक्षुओं को इंसानियत के पाठ भी पढ़ाए जाएंगे। उन्हें भारतीय संविधान की गहराई से जानकारी दी जाएगी। मानवाधिकार और नीतिशास्त्र पर भी खास कक्षाएं होंगी। व्यक्तित्व विकास और जनसंवाद जैसे विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। अकादमी चाहती है कि अफसर संवेदनशील और जिम्मेदार बनें। यही वजह है कि इन विषयों को प्राथमिकता दी गई है। आम जनता से बेहतर संवाद बनाना भी सिखाया जाएगा।



आरक्षण से आगे निकलीं महिलाएं

मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू है। लेकिन 46वें बैच में तस्वीर कुछ अलग है। यहां 17 में से 11 पद यानी 64.7 फीसदी पद महिलाओं ने हासिल किए हैं। यह आरक्षण से कहीं ज्यादा है। महिलाओं ने मेरिट और ओपन वर्ग में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। यही वजह है कि उनकी संख्या तय कोटे से आगे निकल गई। यह उपलब्धि बताती है कि बेटियां अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। यह आंकड़ा युवा लड़कियों को भी प्रेरित करेगा।



दो साल का प्रशिक्षण

डीएसपी बनने का सफर आसान नहीं होता। पहले साल प्रशिक्षुओं को अकादमी में ही रहना होता है। इस दौरान उन्हें कानून, पुलिस मैनुअल और हथियार संचालन सिखाया जाता है। निहत्थे मुकाबले यानी बिना हथियार के आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी दी जाती है। दूसरे साल प्रशिक्षुओं को फील्ड में भेजा जाता है।



उन्हें थानों में काम सिखाया जाता है। साथ ही सीएसपी में भी ट्रेनिंग होती है। सीएसपी यानी सर्किल पुलिस ऑफिस (Circle Superintendent of Police) होता है। पुलिस लाइन में भी उन्हें भेजा जाता है। इस तरह दो साल की मेहनत लगती है। इसके बाद वे पूरी तरह तैयार अफसर बनकर निकलते हैं।



नए अफसरों से उम्मीदें

नए कानून और तकनीक की ट्रेनिंग अफसरों को मजबूत बनाएगी। महिला अफसरों की बढ़ती संख्या भी सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में ये अफसर जिलों में तैनात होंगे। तब आम जनता को इनकी ट्रेनिंग का सीधा फायदा मिलेगा। पुलिसिंग बेहतर और संवेदनशील बनेगी। अकादमी का यह प्रयोग आगे के बैचों के लिए भी मॉडल बन सकता है।



अफसरों की जिम्मेदारी बढ़ेगी

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अफसरों को जिम्मेदारी मिलेगी। उन्हें अलग अलग जिलों में तैनात किया जाएगा। वहां इन्हें कानून व्यवस्था संभालनी होगी। साथ ही अपराध की जांच में डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल भी करना होगा। नई तकनीक की जानकारी होने से जांच जल्दी और सटीक होगी।



महिला अफसरों की मौजूदगी से थानों में माहौल भी बदलेगा। पीड़ित महिलाएं और बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकेंगे। अकादमी की यह पहल आगे भी असर दिखाएगी। यह पुलिस व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। कुल मिलाकर यह बैच कई मायनों में खास साबित हो सकता है।



    ये खबरें भी पढ़िए...



    जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिथाइल मिला



    मेडिकल मेरिट में बड़ा खेल: मनचाही पोस्टिंग के लिए अंकों में हेरफेर, 26 छात्र फंसे



    बालाघाट में 19 बच्चों की मौत के बाद 7711 गंभीर कुपोषित मिले, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा



    नकली रैपर, फर्जी QR कोड वाली शराब ने ली 11 लोगों की जान, यूपी से मध्य प्रदेश पहुंची थी जहरीली शराब



    Tags:
    • साइबर क्राइम
    • मध्य प्रदेश
    • महिला सशक्तिकरण
    • मध्य प्रदेश पुलिस
    • डीएसपी
    • पुलिस अकादमी