प्रमोशन के समय गायब मिलीं 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की ACR, अब डिजिटल होंगे रिकॉर्ड
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश पुलिस में नए पदोन्नति नियम से बड़ा मामला सामने आया है।
- प्रमोशन शुरू होते ही 1000 से ज्यादा सिपाहियों की एसीआर गायब मिली।
- जवानों को पुराने अफसरों को ढूंढकर दोबारा रिपोर्ट लिखवानी पड़ी।
- रिकॉर्ड न मिलने से कई सिपाहियों का प्रमोशन अटक गया।
- अब पुलिस मुख्यालय ने सिपाहियों की एसीआर ऑनलाइन करने का फैसला किया है।
मध्य प्रदेश पुलिस में नए पदोन्नति नियम-2025 के तहत प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई। पता चला कि 1000 से ज्यादा सिपाहियों की पुरानी गोपनीय चरित्रावली यानी एसीआर (Annual Confidential Report) थानों और एसपी दफ्तरों में नहीं मिली।
नए पदोन्नति नियम-2025 के लागू होने के बाद ही विभाग में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई। सालों बाद विभाग में बड़े पैमाने पर पदोन्नति हो रही थी। इसी वजह से पुराने रिकॉर्ड की जांच भी जरूरी हो गई। यहीं से एसीआर गायब होने का मामला सामने आया है।
नियम से पहले क्या था फंडा
एसीआर यानी गोपनीय चरित्रावली किसी भी कर्मचारी के काम का सालाना रिकॉर्ड होती है। इसमें उसके प्रदर्शन, व्यवहार और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। प्रमोशन के समय यही रिकॉर्ड सबसे अहम भूमिका निभाता है। इसी वजह से एसीआर गायब होना सीधे प्रमोशन पर असर डालता है।
कैसे फंसा प्रमोशन का पेच
प्रमोशन के लिए पुराने रिकॉर्ड जरूरी होते हैं। कई सिपाहियों की एसीआर सालों पुरानी फाइलों में गुम हो गई थी। जवानों को उन अफसरों को ढूंढना पड़ा जिनके अधीन उन्होंने पहले काम किया था। कुछ अफसर तो रिटायर भी हो चुके थे। ऐसे में सिपाही उनके घर तक पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने दोबारा एसीआर लिखवाई। जो जवान तय समय में रिकॉर्ड नहीं जुटा पाए, उनका प्रमोशन अटक गया। इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया।
अब पूरी तरह बदलेगा सिस्टम
इस दिक्कत के बाद पुलिस मुख्यालय ने पुरानी व्यवस्था बदलने का फैसला किया है। यह व्यवस्था दशकों से चली आ रही थी। अब सिपाहियों की एसीआर भी ऑनलाइन दर्ज होगी। अभी तक सिर्फ आईपीएस (Indian Police Service) और राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज होती थी। मैदानी बल के सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक अब इसी तरह की व्यवस्था में आएंगे। इससे कागजी रिकॉर्ड गुम होने की समस्या खत्म होगी।
कैलेंडर नहीं, वित्तीय वर्ष लागू होगा
नई व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। अभी तक एसीआर का आकलन कैलेंडर वर्ष के आधार पर होता था। यानी 01 जनवरी से 31 दिसंबर तक की अवधि गिनी जाती थी। अब यह वित्तीय वर्ष के आधार पर होगा। यानी 01 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि मान्य होगी। इससे कई पुरानी दिक्कतें अपने आप दूर हो जाएंगी।
जानिए चार बड़े बदलाव
पहला बदलाव यह है कि अब प्रमोशन के समय रिकॉर्ड तैयार मिलेगा। पहले कैलेंडर वर्ष खत्म होने के बाद एसीआर पूरी करने में समय लगता था। पदोन्नति के समय पुरानी रिपोर्ट जुटाने में भी देरी होती थी। अब वित्तीय वर्ष के हिसाब से रिकॉर्ड पहले से व्यवस्थित रहेगा।
दूसरा बदलाव पूरी फोर्स के लिए एक जैसा असेसमेंट चक्र है। आईपीएस और राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की रिपोर्ट पहले से वित्तीय वर्ष पर आधारित थी। वहीं, सिपाही से इंस्पेक्टर तक कैलेंडर वर्ष की व्यवस्था चलती थी। अब दोनों के लिए समयावधि एक समान होगी।
तीसरा बदलाव तबादलों से जुड़ी समस्या को कम करेगा। पुलिस और प्रशासनिक सेवा में ज्यादातर तबादले मार्च और अप्रैल के आसपास होते हैं। कैलेंडर वर्ष की पुरानी व्यवस्था में जनवरी से मार्च तक अलग से पार्ट असेसमेंट करना पड़ता था। वित्तीय वर्ष लागू होने से यह पूरी अवधि एक ही असेसमेंट चक्र में आ जाएगी।
चौथा बदलाव रिकॉर्ड में बैक-डेटिंग की गुंजाइश को घटाएगा। सर्विस रूल्स के मुताबिक हर अफसर को उन जवानों का रिकॉर्ड लिखना होता है, जिन्होंने उनके अधीन कम से कम 90 दिन काम किया हो। यदि तय समय पर रिपोर्ट नहीं भरी गई, तो सिस्टम अपने आप लॉक हो जाएगा। इसके बाद पुरानी तारीख में कोई बदलाव नहीं हो सकेगा।
डीआईजी ने क्या कहा
इस पूरे मामले पर डीआईजी (Deputy Inspector General) रियाज इकबाल ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि प्रमोशन के दौरान रिकॉर्ड नहीं मिलने और तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
उनके मुताबिक सिपाहियों की एसीआर जल्द ऑनलाइन की जाएगी। साथ ही वित्तीय वर्ष के अनुसार गणना की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी। उन्होंने कहा कि इससे रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। साथ ही एसीआर उपलब्ध न होने की वजह से अब किसी जवान का प्रमोशन नहीं रुकेगा।
सिपाहियों को मिलेगी राहत
इस नए सिस्टम से हजारों सिपाहियों को सीधा फायदा होगा। उन्हें अब पुराने अफसरों को ढूंढने की झंझट नहीं झेलनी पड़ेगी। रिकॉर्ड डिजिटल होने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही प्रमोशन की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी। जिन जवानों का रिकॉर्ड अब तक थानों की पुरानी फाइलों में दबा था, उन्हें भी राहत मिलेगी। आने वाले समय में हर सिपाही का डेटा एक क्लिक में उपलब्ध होगा।
आगे क्या होगा असर
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक इस नई व्यवस्था को जल्द लागू किया जाएगा। इससे न सिर्फ रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, बल्कि प्रमोशन प्रक्रिया भी आसान होगी। आने वाले समय में यह बदलाव पूरे पुलिस महकमे के लिए मिसाल बन सकता है।
विभाग के अफसरों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से समय की भी बचत होगी। कागजी फाइलों में तलाश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी सिपाही का रिकॉर्ड सीधे सिस्टम से निकाला जा सकेगा। इससे प्रमोशन में देरी की शिकायतें भी कम होंगी। पुलिस महकमे में यह पहला मौका है जब मैदानी बल के लिए इतना बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया जा रहा है।
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