सोने से पहले MP पुलिस के जवान करेंगे रामायण का पाठ! कांग्रेस ने उठाए धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल
मध्य प्रदेश पुलिस में चयनित नए जवानों के लिए एक खास पहल की गई है। पुलिस मुख्यालय ने सभी नव नियुक्त आरक्षकों को रामायण (Ramayan) के पाठ की सलाह दी है। पुलिस मुख्यालय के एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसकी जानकारी दी, जो कुछ हद तक विवादास्पद भी बन गया है।
रामायण के पाठ से मानसिक शांति मिलेगी
क्या है मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा रामायण पाठ की सलाह का मामला?
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कांग्रेस बोली- यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता फिरोज सिद्दीकी ने कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकता है। उनका कहना है कि संविधान के तहत हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, और किसी को भी धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का काम कानून और व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी खास धर्म को बढ़ावा देना।
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प्रशिक्षण प्रक्रिया में बदलाव
राजाबाबू सिंह ने बताया कि मप्र पुलिस के आठ प्रशिक्षण स्कूलों में 4,000 से अधिक नव आरक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। इसके तहत अब उन्हें नवीनतम तकनीकी और अपराध निरोधक कानूनों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। 1 जुलाई 2024 से लागू न्यू क्रिमिनल लॉ के मद्देनजर, पुलिस कॉन्स्टेबल के बेसिक कोर्स में कुछ आवश्यक संशोधन भी किए गए हैं। प्रशिक्षण में नई तकनीकी, जैसे कि ई-साक्ष्य और सीसीटीएनएस, पर भी ध्यान दिया जाएगा।
रामायण पढ़ने के सुझाव पर मुस्लिम वर्ग के आरक्षक क्या बोले?
कौन हैं राजा बाबू सिंह?
राजा बाबू सिंह 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के साथ दिल्ली में बीएसएफ मुख्यालय, जम्मू-कश्मीर में आईजी बीएसएफ और आईटीबीपी में भी सेवाएं दी हैं। ग्वालियर जोन में एडीजी रहते हुए उन्होंने हजारों भागवत गीता की प्रतियां वितरित की थीं। बीएसएफ के आईजी कश्मीर रहते हुए उन्होंने श्रीनगर में 20 किलोमीटर लंबी साइकिल तिरंगा रैली आयोजित की थी। दिसंबर 1992 में वे अयोध्या गए थे। उन्होंने राम मंदिर के निर्माण के लिए एक ईंट समर्पित की थी। उस समय रामलला के दर्शन कर पूजित ईंट समर्पित की थी।
FAQ
- क्या मप्र पुलिस में ट्रेनिंग के दौरान रामायण पाठ करना अनिवार्य है?
मप्र पुलिस के नव आरक्षकों को रामायण पाठ करने की सलाह दी गई है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं किया गया है। यह एक सुझाव है जो जवानों को मानसिक शांति और प्रेरणा प्रदान करने के लिए दिया गया है। - क्या कांग्रेस ने मप्र पुलिस में ट्रेनिंग के दौरान रामायण पाठ करने का विरोध किया है?
जी हां, कांग्रेस ने मप्र पुलिस के इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के तहत किसी भी धर्म के ग्रंथ को पढ़ने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता।
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