फर्जी NDPS छापा: राजस्थान पुलिस ने दर्ज की MP के दो TI सहित 100 पर FIR
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी पुलिस की 'बड़ी कार्रवाई' निकली फर्जी, अब FIR।
- ड्रग्स फैक्ट्री छापे में झूठ की परत दर परत खुली।
- 80 पुलिसवाले गए, 30 मिनट में सब कुछ कर डाला?
- राजस्थान कोर्ट ने कहा, एमपी पुलिस ने झूठ बोला।
- दो TI समेत 100 पर FIR, ड्रग्स छापे का सच क्या था?।
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले की पुलिस ने जनवरी 2026 में राजस्थान के घाटाखेड़ी गांव में ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ने का दावा किया था। इसमें दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया था। परिवार शुरू से इसे झूठा बताता रहा। राजस्थान की चौमहला कोर्ट ने जांच के बाद 13 जून को FIR के आदेश दिए। अब आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय और बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह समेत करीब 100 लोगों पर केस दर्ज हो गया है।
ऐसे शुरू हुई ड्रग्स छापे की कहानी
21 जनवरी 2026 की बात है। आगर मालवा पुलिस ने फैजान नाम के युवक को गिरफ्तार किया। उसके पास 330 ग्राम एमडी ड्रग्स मिली थी।पूछताछ में फैजान ने बताया कि ड्रग्स राजस्थान के घाटाखेड़ी गांव के शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से आई थी। इसके बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी की।
28 जनवरी को 80 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम घाटाखेड़ी पहुंची। तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ और ड्रग्स बनाने का सामान पकड़ा गया। दो भाई शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा को गिरफ्तार किया गया।
पांच सवाल जिन्होंने छापे पर उठाई उंगली...
सामान नया क्यों था?
एसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो बंदूकें, एक ग्राइंडर मशीन और दो ड्रम पकड़ने का दावा किया था। जांच में सामने आया कि ये सब नया था। कोई सफाई नहीं दी गई।
राजस्थान पुलिस को पता ही नहीं था
दावा किया गया था कि राजस्थान पुलिस भी इस छापे में शामिल थी। लेकिन जांच में सामने आया कि स्थानीय पुलिस को इस कार्रवाई की कोई जानकारी ही नहीं दी गई थी।
वीडियोग्राफी हुई या नहीं?
एसपी ने कहा था कि ई-साक्ष्य ऐप से पूरी कार्रवाई की रिकॉर्डिंग हुई। जांच में पता चला कि कोई वीडियोग्राफी नहीं हुई थी।
टाइमिंग का गणित नहीं मिला
पुलिस रिकॉर्ड कहता है कि शाहिर को सुबह 4:40 बजे, मुनव्वर को 4:45 बजे पकड़ा गया और जब्ती 5:40 बजे हुई। लेकिन सीसीटीवी और वीडियोग्राफी से साफ हो गया कि एमपी पुलिस के वाहन 5:05 बजे तक ही वहां थे।
30 मिनट में इतना सब कैसे?
पुलिस के वाहन घाटाखेड़ी में करीब 30 मिनट रुके। इसी दौरान तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती का दावा किया गया। NDPS अधिनियम (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) की कानूनी प्रक्रिया 30 मिनट में पूरी होना संभव ही नहीं है।
परिवार तभी से कह रहा था, यह सब झूठ है
गिरफ्तार भाइयों के पिता हमीद खान ने शुरू से ही इस कार्रवाई को फर्जी बताया। उनका आरोप था कि एमपी पुलिस ने राजस्थान पुलिस को बताए बिना उनके घर में घुसपैठ की। परिवार के साथ बदसलूकी की। और बेटों को झूठे मामले में फंसा दिया।
हमीद खान ने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में शिकायती आवेदन दायर किया।
जांच में रिकॉर्ड ही नहीं मिले
कोर्ट ने उसी दिन झालावाड़ के एसपी अमित को जांच के आदेश दिए। एसपी ने मामला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद्र मीणा को सौंपा।एएसपी (Additional Superintendent of Police) मीणा आगर आए।
मीणा ने थाना प्रभारी शशि उपाध्याय समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान लिए। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई जरूरी रिकॉर्ड ही नहीं मिले।
कोर्ट के आदेश पर 100 लोगों पर FIR
जांच रिपोर्ट और उपलब्ध सबूतों के आधार पर चौमहला कोर्ट ने 13 जून 2025 को FIR (First Information Report) दर्ज करने के आदेश दिए।
15 जून को राजस्थान के डग थाने में केस दर्ज हुआ। इसमें आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, एसआई (Sub-Inspector) राखी गुर्जर, एएसआई (Assistant Sub-Inspector) अजय जाट, राहुल विश्वकर्मा, पुलिसकर्मी शुभम समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज हुआ।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस सभी आरोपों की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। जांच में और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। धाराएं भी बढ़ सकती हैं। फिलहाल शशि उपाध्याय आगर कोतवाली थाना प्रभारी के पद पर बने हुए हैं।
FAQ
- राजस्थान में एमपी पुलिस के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
जनवरी 2026 में आगर मालवा पुलिस ने राजस्थान के घाटाखेड़ी में ड्रग्स छापे का दावा किया था। जांच में वीडियोग्राफी, रिकॉर्ड और टाइमिंग सब झूठे पाए गए। चौमहला कोर्ट ने जांच रिपोर्ट के आधार पर FIR के आदेश दिए। - इस मामले में किन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई?
आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, SI राखी गुर्जर, ASI अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ। जांच में और नाम सामने आ सकते हैं। - छापे को फर्जी साबित करने वाले सबूत क्या थे?
पांच अहम बिंदु सामने आए: राजस्थान पुलिस को छापे की जानकारी नहीं थी, वीडियोग्राफी नहीं हुई थी, टाइमिंग के रिकॉर्ड सीसीटीवी से मेल नहीं खाते थे, जब्त सामान नया था, और 30 मिनट में NDPS कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था।
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