MP पुलिस का हेल्पिंग हैंड मॉडल अब पूरे देश में होगा लागू, महिलाओं के लिए बड़ी पहल

Anjali Dwivedi | Mar 14, 2026, 17:58 IST
MP Police Helping Hand Model
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मध्य प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन हेल्पिंग हैंड की सराहना की। भरण-पोषण राशि दिलाने वाले इस मॉडल को देशभर में लागू करने की सिफारिश की गई है।

News In Short

  • राष्ट्रीय महिला आयोग ने मध्य प्रदेश के हेल्पिंग हैंड मॉडल को देशभर में लागू करने का सुझाव दिया।
  • पिछले साल 16 हजार 703 समन और वारंट तामील कराकर महिलाओं को उनका हक दिलाया गया।
  • जुलाई 2025 से इस अभियान को सालभर चलने वाली रेगुलर प्रोसेस बना दिया गया है।
  • 2021 से 2025 के बीच 55 हजार 803 लापता नाबालिग बेटियों को सुरक्षित तलाशा गया।
  • सेफ क्लिक अभियान के जरिए 33 लाख से अधिक लोग साइबर क्राइम के प्रति जागरूक हुए।

News In Detail

MP News. मध्य प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा एक विशेष अभियान अब राष्ट्रीय पहचान बनने जा रहा है। कोर्ट से भरण-पोषण का आदेश मिलने के बावजूद राशि न मिल पाने की समस्या को देखते हुए एमपी पुलिस की एक पहल ने उम्मीद की नई किरण जगाई है।



राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने मध्य प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन हेल्पिंग हैंड की जमकर सराहना की है। उन्होंने इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की सिफारिश की है।



विजया राहटकर का मानना है कि यह मॉडल अदालती आदेशों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कराने में सफल साबित हो रहा है। डीजीपी के साथ हुई बैठक में पुलिस अधिकारियों ने इस अभियान की सफलता के आंकड़े साझा किए, जिसे देखकर आयोग ने इसे देशभर के लिए एक मिसाल माना है।



कनूनी आदेशों का पालन करा रही पुलिस

अक्सर देखा जाता है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी पति या परिवार भरण-पोषण की राशि देने में आनाकानी करते हैं। एडीजी अनिल कुमार ने बताया कि ऐसे मामलों में पुलिस अदालत से जारी समन और वारंट की सख्ती से सामंजस्य करवाती है।



इससे संबंधित व्यक्ति को कोर्ट में पेश होना पड़ता है और वह आदेश का पालन करने के लिए मजबूर होता है। साल 2024 में इसी मुस्तैदी के कारण 16 हजार 703 समन और वारंट तामील करवाए गए।



अब साल के 365 दिन होती है कार्रवाई

एमपी पुलिस ने साल 2021 में इस अभियान की शुरुआत की थी। पहले यह अभियान साल में केवल एक बार चलाया जाता था। लेकिन महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए जुलाई 2025 से इसे एक स्थायी प्रक्रिया बना दिया गया है।



अब हेल्पिंग हैंड सालभर चलता है। महिला सुरक्षा शाखा हर महीने जिलों से रिपोर्ट लेकर इसकी बारीकी से समीक्षा करती है, ताकि कोई भी मामला लंबित न रहे।



कानूनी प्रक्रिया से बढ़कर एक सहारा

यह अभियान सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे महिला की आजीविका से जोड़कर देखा जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत, जब महिला कोर्ट में मामला दर्ज करती है और कोर्ट राशि तय करता है, तो उसे महिला तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस निभाती है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि आदेश केवल पन्नों पर न रहे, बल्कि महिला को उसका हक मिले।



बेटियों की सुरक्षा में भी MP पुलिस आगे

बैठक के दौरान पुलिस ने अन्य सफल अभियानों का ब्यौरा भी पेश किया। साल 2021 से 2025 के बीच ऑपरेशन मुस्कान के जरिए 55 हजार 803 गुमशुदा नाबालिग लड़कियों को खोजकर उनके घर पहुंचाया गया। इसके अलावा सेफ क्लिक अभियान के माध्यम से 33 लाख लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। वर्तमान में प्रदेश में 987 महिला हेल्प डेस्क सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।



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