पीएचक्यू में 4 करोड़ का मेडिकल बिल घोटाला, अकाउंड डिपार्टमेंट के अफसरों ने की बड़ी हेराफेरी

Rohit Sahu | Jun 17, 2025, 08:28 IST
Mp police scam
पीएचक्यू में प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट के नाम पर फर्जी बिलों से 4 करोड़ का घोटाला सामने आया है। 40 कर्मचारियों के 75 से अधिक फर्जी दस्तावेज़ों का खुलासा हुआ है।

पुलिस मुख्यालय भोपाल (पीएचक्यू) में फर्जी प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट के जरिए करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है। विभाग के अकाउंट ब्रांच के अफसरों ने मेडिकल बिलों से 4 करोड़ का घोटाला कर दिया। अभी भी मामले की जांच जारी है, रकम और भी बढ़ सकती है।अब तक की छानबीन में सामने आया है कि करीब 40 कर्मचारियों के 75 से अधिक सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं।



PHQ के इन अफसरों ने किया घोटाला

कैसे हुआ घोटाला

जांच में पता चला कि आरोपी हर्ष और हरिहर ने स्वास्थ्य विभाग के नाम से 20 से 35 लाख रुपए तक के फर्जी प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट तैयार किए। इन सर्टिफिकेट्स पर जाली मोहर और हस्ताक्षर लगाए गए, और बिल तैयार कर ट्रेजरी से पास करवाए गए। घोटाले का तरीका बेहद चालाकी भरा और तकनीकी रूप से एडवांस था।



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एक ही बिल को कई बार ट्रेजरी में अपलोड किया गया। ट्रेजरी सॉफ्टवेयर पकड़ ने पाए इसके लिए बिल के फॉन्ट साइज बदल दिए जाते थे, जिससे सिस्टम उसे अलग डॉक्यूमेंट समझकर पास कर देता था। कई बार तो एक ही घंटे में दो बार ट्रांसफर तक किए गए। ऐसे मामलों में ट्रेजरी ऑफिसर की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।



स्वास्थ्य विभाग ने दी ये सफाई

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अब तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों के सर्टिफिकेट की पड़ताल की गई है। इनमें से 40 प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट फर्जी निकले। स्वास्थ्य विभाग ने यह साफ कर दिया है कि घोटाले में उपयोग किए गए सर्टिफिकेट उनके कार्यालय से जारी नहीं किए गए। यह पूरी जांच 2019 से 2024 के बीच के बिलों पर केंद्रित है। पीएचक्यू की वेलफेयर और अन्य शाखाओं के कर्मचारी भी रडार पर हैं।



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प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट क्या होता है?

प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट गंभीर बीमारियों जैसे टीबी, कैंसर आदि के लंबे इलाज के लिए दिया जाता है। यह प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग सालभर के लिए जारी करता है, जिसका समय-समय पर नवीनीकरण जरूरी होता है। आरोप है कि एक बार सर्टिफिकेट बनवाने के बाद उसकी कॉपी से फर्जी बिल तैयार कर, लाखों रुपए के बिलों को पास करवाया गया।



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