मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के 7 अफसरों को मिला 2016 का आईपीएस बैच, आदेश जारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश पुलिस सेवा से प्रमोट हुए 7 अफसरों को नया बैच मिला।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन्हें आईपीएस 2016 बैच अलॉट किया है।
- इन अफसरों ने 1998 में डीएसपी पद से सेवा शुरू की थी।
- सीनियरिटी रूल्स के तहत इन्हें 9 साल का वेटेज मिला है।
- नए बैच से इनके अगले प्रमोशन और डीआईजी पद का रास्ता आसान होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। मध्य प्रदेश पुलिस सेवा से आईपीएस बने सात अफसरों को नया बैच वर्ष मिला है। ये सभी अफसर 1998 बैच के प्रमोटेड आईपीएस अफसर हैं। अब इन्हें आईपीएस 2016 बैच का दर्जा दिया गया है। यह आदेश हाल ही में जारी किया गया है।
क्या है पूरा आदेश
मध्य प्रदेश राज्य पुलिस सेवा संवर्ग से आईपीएस (Indian Police Service) संवर्ग में प्रमोट हुए सात अफसर हैं। ये सभी 1998 बैच के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं। केंद्र सरकार ने इनकी वरिष्ठता और बैच वर्ष तय कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर इन्हें आईपीएस 2016 बैच अलॉट किया है। यह आदेश गृह मंत्रालय के अवर सचिव उदय प्रकाश गुप्त ने जारी किया है। यह पूरा मामला अफसरों की वरिष्ठता तय करने से जुड़ा है।
कैसे तय हुआ बैच वर्ष
इन अफसरों ने 26 सितंबर 1998 को डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) पद पर सेवा शुरू की थी। 31 दिसंबर 2025 तक इनकी सेवा 27 साल पूरी हो चुकी थी। आईपीएस सीनियरिटी रूल्स 1988 के तहत इन्हें वेटेज का फायदा मिला। इस नियम के तहत अधिकतम नौ साल का वेटेज दिया जाता है। गणना वर्ष 2025 में से नौ साल घटाए गए। इस हिसाब से इन्हें 2016 का कैडर वर्ष दिया गया है। यह गणना पूरी तरह तय नियमों के आधार पर की गई है।
वेटेज का फॉर्मूला
आईपीएस विनियम नियमावली में वेटेज का साफ नियम है। 12 साल की सेवा पर कम से कम तीन साल का वेटेज मिलता है। वहीं 27 साल या इससे ज्यादा सेवा पर अधिकतम फायदा मिलता है। ऐसे अफसरों को नौ साल तक का सेवा लाभ दिया जाता है। यही वेटेज फॉर्मूला इन सात अफसरों पर भी लागू हुआ है। इसी वजह से इन्हें सीधे 2016 बैच में गिना गया।
राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस में प्रमोशन एक लंबी प्रक्रिया है। कई साल की सेवा और तय नियमों के बाद ही अफसरों को यह दर्जा मिलता है। इसके बाद भी बैच वर्ष तय करने के लिए अलग गणना होती है। यही वजह है कि प्रमोशन के बरसों बाद भी बैच वर्ष में बदलाव होता रहता है।
वरिष्ठता में कहां स्थान
गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक इन सभी अफसरों को मध्य प्रदेश कैडर की सिविल लिस्ट में जगह दी गई है। ये अफसर 2016 बैच के सबसे जूनियर प्रमोटेड आईपीएस अधिकारी राजेंद्र कुमार वर्मा से ठीक नीचे रहेंगे। वहीं 2017 बैच के सीनियर आईपीएस अंकित जायसवाल से ठीक ऊपर इन्हें स्थान मिलेगा। यानी इनकी वरिष्ठता सूची में साफ जगह तय कर दी गई है। इससे कैडर में किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।
किन अफसरों को मिला फायदा
इस आदेश से जिन सात अफसरों को फायदा मिला है उनमें कई जाने-पहचाने नाम हैं। इनमें निमिषा पांडे, मलय जैन और अमित सक्सेना शामिल हैं। इसके अलावा मनीषा पाठक सोनी और सुमन गुर्जर का नाम भी है। सब्यसाची सर्राफ और समर वर्मा भी इस सूची में हैं। इन सभी को अब आईपीएस 2016 बैच का दर्जा मिल गया है। ये सभी अफसर लंबे समय से मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में काम कर रहे थे।
आगे क्या होगा फायदा
2016 बैच मिलने से इन अफसरों को आगे कई फायदे मिलेंगे। इन्हें जूनियर प्रशासनिक ग्रेड और सिलेक्शन ग्रेड जल्दी मिल सकेगा। पहले इनकी सर्विस लेंथ अलग तरीके से गिनी जाती थी। अब 2016 बैच के हिसाब से सेवा अवधि गिनी जाएगी। इससे आने वाले समय में ये डीआईजी (Deputy Inspector General) पद के लिए भी पात्र हो जाएंगे। यह बदलाव इनके करियर के लिए बड़ा मौका माना जा रहा है। आने वाले समय में इनकी पोस्टिंग और प्रमोशन दोनों पर असर दिखेगा।
राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस में प्रमोशन पाना आसान नहीं होता। इसके लिए तय सेवा अवधि पूरी करनी होती है। साथ ही परफॉर्मेंस और अनुशासन का रिकॉर्ड भी देखा जाता है। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी से ही यह प्रमोशन मिलता है। इन सात अफसरों ने भी यह पूरा रास्ता तय किया है।
बैच वर्ष तय करने का यह नियम सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के हर राज्य में यही सीनियरिटी रूल्स लागू होते हैं। इससे सभी राज्यों के प्रमोटेड आईपीएस अफसरों के साथ एक जैसा व्यवहार होता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार को हर मामले में अलग से गणना करनी पड़ती है।
इससे पहले भी कई राज्यों में प्रमोटेड आईपीएस अफसरों को वेटेज का फायदा मिल चुका है। हर बार सेवा अवधि के हिसाब से बैच वर्ष तय किया जाता है। इस बार मध्य प्रदेश के सात अफसरों की बारी आई है। आने वाले समय में इसी तरह के और आदेश जारी हो सकते हैं।
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