दोबारा बनेगी एसआई पुलिस भर्ती की मेरिट लिस्ट, 2013 की भर्ती में हो गया था बड़ा खेल
दस साल से अधिक पुरानी पुलिस भर्ती फिर चर्चा में
मध्य प्रदेश की 2013 पुलिस भर्ती का मामला फिर खुल गया है। जबलपुर हाई कोर्ट ने इस भर्ती पर अहम फैसला सुनाया है। मामला सूबेदार, SI और प्लाटून कमांडर के पदों से जुड़ा है। भर्ती मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ने आयोजित की थी।
2015 में जारी अंतिम मेरिट लिस्ट को चुनौती दी गई थी। जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने छह याचिकाओं पर फैसला सुनाया। सभी याचिकाओं में कानून और तथ्य लगभग समान थे। इसलिए हाई कोर्ट ने सभी मामलों की सुनवाई साथ की। कोर्ट ने 7 अप्रैल 2015 की मेरिट लिस्ट का विवादित हिस्सा जांचा।
162 अंक वाले अभ्यर्थियों को मिला था प्लाटून कमांडर
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती में अपनी पद प्राथमिकता बताई थी। उनकी पहली पसंद जिला पुलिस बल का SI पद था। इसके बाद अन्य पदों को प्राथमिकता दी गई थी। संबंधित याचिकाकर्ताओं ने 162 अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद उन्हें प्लाटून कमांडर पद मिला था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे कटऑफ से एक अंक पीछे थे। उनका दावा जिला पुलिस बल के SI पद पर था। उनके अनुसार कुछ उम्मीदवारों को अनारक्षित पद मिले थे। उन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग की आयु छूट ली थी। इसी वजह से याचिकाकर्ताओं को नुकसान हुआ।
विवाद की जड़ आयु सीमा और आरक्षण बना
भर्ती विज्ञापन में अनारक्षित उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 28 वर्ष थी। यह उम्र 1 जनवरी 2014 के आधार पर तय थी। SC, ST और OBC उम्मीदवारों को पांच साल की छूट थी। इस छूट के बाद अधिकतम उम्र 33 वर्ष थी।
याचिकाकर्ताओं ने इसी व्यवस्था को चुनौती का आधार बनाया। उनका आरोप था कि कुछ उम्मीदवार आयु छूट लेकर अनारक्षित पदों पर पहुंचे। कोर्ट के सामने अनावेदक 3 से 20 तक की जानकारी रखी गई। इनमें कई उम्मीदवार 28 वर्ष से ज्यादा उम्र के थे। कुछ उम्मीदवारों की उम्र 37 वर्ष छह महीने तक थी।
हाई कोर्ट ने 18 उम्मीदवारों के रिकॉर्ड पर क्या देखा
कोर्ट के सामने अनावेदक 3 से 20 की उम्र और मेरिट का रिकॉर्ड था। इनमें कई उम्मीदवार सामान्य आयु सीमा से ऊपर थे। कोर्ट ने देखा कि कई उम्मीदवार 29 से 37 वर्ष के बीच थे। याचिकाकर्ताओं ने इसे आरक्षित वर्ग की आयु छूट से जोड़ा।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ऐसे उम्मीदवारों को अनारक्षित पद नहीं मिलना चाहिए था। हालांकि राज्य ने इस दावे का अलग जवाब दिया। राज्य के अनुसार उम्मीदवारों ने SC, ST और OBC वाली छूट नहीं ली थी। सरकार ने कहा कि उन्हें दूसरी श्रेणी की आयु सीमा मिली थी।
राज्य ने 36 साल की आयु सीमा का तर्क दिया
राज्य ने याचिकाओं का जोरदार विरोध किया था। राज्य ने सामान्य भर्ती नियम लागू होने से भी इनकार किया। उसके अनुसार पुलिस विभाग के पद अलग भर्ती नियमों से चलते थे। राज्य ने विज्ञापन के क्लॉज 1.6.3 का हवाला दिया।
इसमें सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के लिए अलग आयु सीमा थी। राज्य के अनुसार इस श्रेणी की अधिकतम उम्र 36 वर्ष थी। सरकार ने कहा कि इस छूट का सामाजिक वर्ग से संबंध नहीं था। उसने आवेदन फॉर्म के आधार पर अपना पक्ष रखा। कर्मचारी चयन बोर्ड ने भी याचिकाओं का विरोध किया। बोर्ड ने करीब दस साल की देरी का सवाल उठाया।
हाई कोर्ट ने नियम 12(4) को माना अहम
हाई कोर्ट ने 2013 के नियमों के नियम 12(4) को देखा। इस नियम में आरक्षित उम्मीदवार के अनारक्षित चयन की शर्त है। ऐसा उम्मीदवार बिना किसी छूट के योग्य होना चाहिए। नियम में आयु छूट लेने वाले उम्मीदवार को अलग रखा गया है।
कोर्ट ने इसी नियम को विवाद में अहम माना। कोर्ट ने कहा कि छूट लेकर अनारक्षित पद नहीं मिल सकता। ऐसा होने पर दोहरे लाभ की स्थिति बन सकती है। पहला लाभ आयु छूट का होता है। दूसरा लाभ अनारक्षित पद का होता है। कोर्ट ने ऐसी स्थिति को नियमों के खिलाफ माना।
सुप्रीम कोर्ट के साजिब रॉय फैसले का भी आधार
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के साजिब रॉय फैसले का उल्लेख किया। इस मामले में आरक्षित उम्मीदवारों के अनारक्षित चयन पर चर्चा हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती नियमों को अहम माना था। नियमों में रोक हो तो सामान्य सीट नहीं मिल सकती। हाई कोर्ट ने इसी सिद्धांत को मौजूदा मामले में लागू किया।
कोर्ट ने बलबीर सिंह गुर्जर मामले का भी उल्लेख किया। उस मामले में आयु छूट का सवाल सामने आया था। आयु छूट लेने वाले उम्मीदवार को बिना छूट पात्रता दिखानी थी। हाई कोर्ट ने इस फैसले को भी मामले में प्रासंगिक माना।
याचिकाकर्ताओं को एक अंक का सीधा फायदा मिला
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के 162 अंकों को भी अहम माना। कोर्ट के अनुसार वे संबंधित SI पद की कटऑफ से केवल एक अंक पीछे थे। मेरिट लिस्ट में कुछ आरक्षित उम्मीदवार अनारक्षित पदों पर शामिल थे। कोर्ट ने आयु छूट के नियम को लागू करते हुए उनका समायोजन गलत माना।
ऐसे उम्मीदवारों को अनारक्षित सूची से हटाने पर मेरिट बदलना तय था। इससे याचिकाकर्ताओं की स्थिति ऊपर आ सकती थी। कोर्ट ने माना कि शिकायत केवल अनुमान पर आधारित नहीं थी। इसका सीधा असर याचिकाकर्ताओं के पद आवंटन पर पड़ता था।
दस साल बाद चुनौती पर भी हाई कोर्ट ने फैसला दिया
2015 की मेरिट लिस्ट को करीब दस साल बाद चुनौती मिली। कर्मचारी चयन बोर्ड ने देरी को अहम आधार बनाया था। बोर्ड ने जरूरी पक्षकार नहीं जोड़ने की बात भी कही। बोर्ड के अनुसार पुराने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पुलिस के पास थे। इन रिकॉर्ड की जांच करना भी कठिन बताया गया था। हाई कोर्ट ने देरी वाली आपत्ति को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने मामले को सिर्फ सामान्य प्रक्रियागत गलती नहीं माना। उसके अनुसार मामला नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था। इसलिए देरी को चुनौती में बाधा नहीं माना गया।
2015 की मेरिट लिस्ट का विवादित हिस्सा रद्द
हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2015 की मेरिट लिस्ट का विवादित हिस्सा रद्द किया। पूरी मेरिट लिस्ट को रद्द नहीं किया गया है। केवल अनारक्षित पदों से जुड़ा समायोजन हटाया गया है। आयु छूट लेने वाले उम्मीदवारों का अनारक्षित पदों पर समायोजन हटेगा।
इसके बाद नई मेरिट लिस्ट तैयार होगी। नई सूची 2013 के नियमों के अनुसार बनाई जाएगी। विज्ञापन की शर्तों को भी ध्यान में रखा जाएगा। आयु छूट लेने वाले उम्मीदवारों को अनारक्षित पद नहीं मिलेंगे। उनके आरक्षित पदों पर समायोजन की स्थिति अलग देखी जाएगी।
12 सप्ताह में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश
हाई कोर्ट ने नई मेरिट तैयार करने की समय सीमा तय की है। राज्य और चयन बोर्ड को 12 सप्ताह का समय मिला है। यह अवधि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने से शुरू होगी। इसी दौरान उम्मीदवारों की नई मेरिट तय करनी होगी। याचिकाकर्ताओं की प्राथमिकता और योग्यता भी देखी जाएगी।
162 अंक वाले उम्मीदवारों की स्थिति फिर से जांची जाएगी। उनकी नई मेरिट के आधार पर पद तय होगा। जिला पुलिस बल के SI पद की पात्रता भी देखी जाएगी। दूसरी प्राथमिकता वाले पदों पर भी नई स्थिति लागू होगी।
आरक्षित उम्मीदवारों की पूरी नियुक्ति रद्द नहीं हुई
हाई कोर्ट ने आदेश में यह बात साफ रखी है। अनावेदक 3 से 20 की पूरी नियुक्ति रद्द नहीं हुई। आदेश का असर अनारक्षित पदों पर उनके समायोजन तक है। आरक्षित पदों पर उनका मामला अलग से देखा जाएगा। राज्य को कानून के अनुसार उनके मामले पर विचार करना होगा।
इसलिए पूरी 2013 पुलिस भर्ती खत्म नहीं हुई है। केवल मेरिट में हुए खास समायोजन की दोबारा जांच होगी। याचिकाकर्ताओं की नई स्थिति भी इसी प्रक्रिया से तय होगी।
अब 2013 की भर्ती में आगे क्या होगा
अब 2015 की मेरिट लिस्ट के विवादित हिस्से की दोबारा जांच होगी। इस बार आयु छूट और पद पात्रता का रिकॉर्ड देखा जाएगा। अनारक्षित पदों पर उम्मीदवारों की पात्रता फिर तय होगी। 162 अंक वाले याचिकाकर्ताओं की मेरिट स्थिति भी बदलेगी। उनकी पद प्राथमिकता को नई मेरिट के साथ देखा जाएगा। नई सूची बनने के बाद ही पद आवंटन साफ होगा। हाई कोर्ट ने इसके लिए 12 सप्ताह की समय सीमा तय की है। इस आदेश से दशक पुराने भर्ती विवाद को नया मोड़ मिला है।
आदेश में लागत का कोई निर्देश नहीं
हाई कोर्ट ने सभी संबंधित रिट याचिकाओं को स्वीकार किया। अदालत ने मेरिट लिस्ट के विवादित हिस्से को रद्द किया। नई मेरिट तैयार करने का निर्देश राज्य और चयन बोर्ड को दिया। उम्मीदवारों की पात्रता फिर से तय करने को कहा गया। इस प्रक्रिया में उनकी प्राथमिकता और मेरिट दोनों देखी जाएंगी।