CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अब कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट

Arohi Raj | Sootr Creatives | Sept 28, 2026, 19:59 IST
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थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बच्चों को कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट मिलेगी।<br>
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बच्चों को कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर आया है। कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट दी है। इससे इस बैच पर तीसरी भाषा का तुरंत दबाव नहीं रहेगा। नीति खत्म नहीं हुई है। सरकार ने छूट का विरोध किया और 99 प्रतिशत स्कूल तैयार बताए। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

कक्षा 6 के छात्रों के लिए राहत

सुप्रीम कोर्ट का आदेश कक्षा 6 के छात्रों के लिए राहत लेकर आया है। अब उन्हें कक्षा 7 जैसी छूट मिलेगी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर चल रहे विवाद के बीच यह फैसला आया है। यानी इस बैच पर तीसरी भाषा का तुरंत दबाव नहीं रहेगा। क्या इससे विवाद खत्म हो गया?

समझें क्या है पूरा मामला

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2026-27 सेशन से कक्षा 6 में तीन भाषाएं लागू कीं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बच्चे पहले से दूसरी भाषाएं सीख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 को कक्षा 7 जैसी छूट देने को कहा। थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) खत्म नहीं हुई है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

कक्षा 6 को क्या राहत मिली?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के मुताबिक, कक्षा 6 के छात्रों को छूट मिलेगी। यह छूट वैसी ही है, जैसी कक्षा 7 के छात्रों को मिली है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को कठिनाई में डालने के बजाय सुविधा मिले। सोचिए एक बार। नया सेशन चल रहा हो और भाषा ही बदल जाए।

कक्षा 7 जैसी छूट का मतलब क्या?

इसका मतलब यह नहीं कि तीन भाषा की नीति खत्म हो गई है। राहत खास तौर पर वर्तमान कक्षा 6 बैच के लिए है। यानी बच्चों को बीच सत्र में नई व्यवस्था में ढालने की जल्दी नहीं होगी।

असल सवाल तीसरी भाषा की व्यवस्था का है, जो अदालत में अभी विचाराधीन है।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

CBSE की नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP – National Education Policy) के तहत बनी है। कक्षा 6 से R1, R2 और R3 (यानी तीन अलग भाषा वर्ग) के तहत तीन भाषाएं तय हैं। CBSE के दिशानिर्देशों में कम से कम दो भारतीय भाषाएं रखने की बात है।

विवाद 2026-27 सत्र में कक्षा 6 पर यह व्यवस्था लागू होने से शुरू हुआ।

बीच सत्र में भाषा बदलने की परेशानी

कई स्कूलों और याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में अपनी दलील रखी हैं। कई बच्चे चौथी कक्षा से अपनी पसंद की भाषाएं सीख रहे हैं। कक्षा 6 में अचानक भाषा बदलने से उन्हें परेशानी हो सकती है।

कोर्ट ने पहले भी यह चिंता जताई थी। सितंबर में कोर्ट ने पूछा कि क्या कक्षा 6 को छूट मिल सकती है। 17 सितंबर की सुनवाई में भी यही बात उठी। कोर्ट ने कहा था कि बच्चों को बदलाव के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

सरकार का तर्क क्या है?

"हमने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। सरकार मौजूदा कक्षा 6 को इस साल से छूट देने के पक्ष में नहीं है।"
By: -तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल, सरकार की ओर से
सरकार के मुताबिक करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में तीसरी भाषा की व्यवस्था तैयार है। करीब 1.2 प्रतिशत स्कूलों में अब भी परेशानी बनी हुई है। फिर भी कोर्ट का जोर बच्चों की परेशानी पर रहा। जिन बच्चों के लिए व्यवस्था बदल चुकी है, उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो। क्या 99 फीसदी की तैयारी काफी है?

मुख्य न्यायाधीश ने क्या सुझाया?

"वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई जाए। वह उन स्कूलों और याचिकाकर्ताओं से बात करे, जो अपनी परेशानियां बता रहे हैं।"
By: -जस्टिस सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट

वकील ने क्यों ठुकराई समिति?

"अब किसी और समिति की जरूरत नहीं है। इस मामले में स्पष्ट फैसला लिया जाना चाहिए।"
By: -गोपाल शंकरनारायण, वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस बागची ने क्या कहा?

"हम बच्चों को मुश्किल में डालने के बजाय सुविधा देना चाहते हैं। मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी वही राहत मिलनी चाहिए। यह राहत कक्षा 7 के छात्रों को मिल चुकी है।"
By: -जस्टिस जॉयमाल्या बागची, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट

किताबों का सवाल क्यों उठा?

सुनवाई में किताबों का मुद्दा भी आया। सरकार ने कहा कि किताबें उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं का जवाब था कि ऑनलाइन किताब और हाथ में किताब में फर्क है।

CBSE ने मई में कहा था कि R3 पाठ्यपुस्तकें ऑनलाइन मिलेंगी। वे NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेॉनिंग) और CBSE की वेबसाइट पर होंगी। अलग व्यवस्था वाली भाषाओं के लिए स्कूल SCERT (स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की किताबें ले सकते हैं।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद रखी है। संबंधित पक्ष को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद दो सप्ताह में जवाब पर पलटकर जवाब दाखिल हो सकेगा। रिपोर्ट में 1 अप्रैल 2027 की तारीख का जिक्र है।

फिलहाल राहत कक्षा 6 के छात्रों के हिस्से आई है। तीसरी भाषा का अहम सवाल अभी अदालत में बाकी है। क्या अगले सत्र तक स्थिति साफ हो पाएगी?

यह खबर क्यों जरूरी है

भाषा बच्चे की सीखने की बुनियाद होती है। बीच सत्र में भाषा बदलने से बच्चों और परिवारों को परेशानी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी परेशानी पर ध्यान दिया। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आई नई व्यवस्था पर बहस जारी है। शिक्षा का अधिकार संवैधानिक मूल्य है। इसलिए बच्चों की सुविधा और नीति में संतुलन जरूरी है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक कई बच्चे चौथी कक्षा से अपनी पसंद की भाषाएं सीख रहे हैं।

  1. कक्षा 6 के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से क्या राहत मिली है?
    सुप्रीम कोर्ट के तारेख आदेश के अनुसार, कक्षा 6 के छात्रों को वैसी ही छूट मिलेगी जैसी कक्षा 7 के छात्रों को मिली है, यानी उन्हें तीसरी भाषा का तुरंत दबाव नहीं रहेगा।
  2. क्या सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय तीन भाषाओं की नीति को समाप्त करता है?
    नहीं, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय तीन भाषाओं की नीति को समाप्त नहीं करता है। यह सिर्फ मौजूदा कक्षा 6 बैच के लिए राहत है, और तीन भाषाओं की नीति का मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है।
  3. अगली सुनवाई कब होगी और इसमें क्या होगा?
    मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी, जिसमें संबंधित पक्ष को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा और फिर दो सप्ताह में उस पर पलटकर जवाब दिया जा सकेगा।
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