एमपी पुलिस एसआई भर्ती: हॉरिजॉन्टल कटऑफ की मांग खारिज, HC ने प्री को माना सिर्फ स्क्रीनिंग
समझें क्या है पूरा मामला
- जबलपुर हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती 2025 में हॉरिजॉन्टल कटऑफ की मांग खारिज की।
- भूतपूर्व सैनिक और पुलिस आरक्षक उम्मीदवारों ने नियम संशोधन को चुनौती दी थी।
- कोर्ट ने कहा- प्रारंभिक परीक्षा सिर्फ स्क्रीनिंग टेस्ट है।
- अलग कटऑफ केवल वर्टिकल श्रेणियों UR/OBC/SC/ST/EWS के लिए मान्य है।
- चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने सभी याचिकाएं खारिज कीं।
जबलपुर हाईकोर्ट ने एमपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले में भूतपूर्व सैनिकों और पुलिस आरक्षकों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर हॉरिजॉन्टल आरक्षण श्रेणियों के लिए अलग कटऑफ घोषित करना अनिवार्य नहीं है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने धर्मू खापड़िया एवं अन्य की याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके साथ ही सुमित कुमार पांडेय एवं अन्य की याचिकाएं भी खारिज हुईं। प्रिया मिश्रा एवं अन्य तथा महेंद्र लोधी एवं अन्य की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं। इस मामले में कोर्ट ने 27 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। अब इस पूरे मामले में 22 मई को अंतिम आदेश आया है।
क्या था पूरा विवाद
दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने 24 जनवरी 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर मध्य प्रदेश पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 1997 में संशोधन किया था। संशोधन में यह स्पष्ट कर दिया गया कि एमपी पुलिस एसआई भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा में कटऑफ केवल वर्टिकल श्रेणियों यानी UR, OBC, SC, ST और EWS के लिए घोषित किए जाएंगे।
नए नियम के अनुसार महिलाओं, भूतपूर्व सैनिकों और पुलिस आरक्षकों जैसी हॉरिजॉन्टल श्रेणियों के लिए अलग कटऑफ घोषित नहीं किया जाएगा। इसी संशोधन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
किसने की थी अलग कटऑफ की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए। उनके साथ अन्य अधिवक्ताओं ने भी कोर्ट को पूरी बात बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस आरक्षकों के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसके साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण तय है। वकीलों ने दलील दी कि यह कम्पार्टमेंटलाइज्ड हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन है। इसी वजह से प्रारंभिक परीक्षा में भी इनके लिए अलग कटऑफ होना चाहिए था।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने एक और बड़ा तर्क दिया था। उनका कहना था कि इस भर्ती प्रक्रिया में एक नियम तय है। इसके तहत रिक्तियों के 10 गुना उम्मीदवार अगले चरण के लिए बुलाए जाते हैं। इस हिसाब से भूतपूर्व सैनिकों के लिए कुल 57 पद आरक्षित हैं। इस नियम के आधार पर कम से कम 570 उम्मीदवारों को अगले चरण में शामिल होने का मौका मिलना चाहिए था।
लेकिन अलग कटऑफ न होने के कारण केवल 12 भूतपूर्व सैनिक उम्मीदवार ही अगले चरण के लिए चयनित हो सके, जिससे आरक्षण का उद्देश्य ही खत्म हो गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी, अनिल कुमार गुप्ता और राजेश कुमार डारिया मामलों का हवाला देते हुए कहा था कि हॉरिजॉन्टल आरक्षण प्रत्येक वर्टिकल श्रेणी के भीतर लागू होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि चयन प्रक्रिया के हर चरण, यहां तक कि प्रारंभिक परीक्षा में भी, हॉरिजॉन्टल श्रेणियों को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा न्यायिक सेवाओं में दिव्यांग उम्मीदवारों को अलग कटऑफ देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का भी हवाला दिया गया।
कोर्ट ने कहा- प्रारंभिक परीक्षा सिर्फ स्क्रीनिंग टेस्ट
हाई कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि प्रारंभिक परीक्षा का उद्देश्य केवल उम्मीदवारों की छंटनी करना है। यह अंतिम चयन प्रक्रिया नहीं है और इसके अंक अंतिम मेरिट में जोड़े भी नहीं जाते।
कोर्ट ने अदिति तिवारी बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक परीक्षा केवल एक स्क्रीनिंग मैकेनिज्म है, जहां वास्तविक मेरिट का निर्धारण नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि हॉरिजॉन्टल आरक्षण का वास्तविक अनुप्रयोग अंतिम चयन प्रक्रिया में किया जाता है, न कि प्रारंभिक स्क्रीनिंग स्तर पर।
वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल आरक्षण पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी फैसले का हवाला दिया। जिसमें कहा गया कि SC, ST, OBC और EWS श्रेणियां वर्टिकल रिजर्वेशन हैं, जबकि महिलाओं, भूतपूर्व सैनिकों और दिव्यांगों के लिए दिया गया आरक्षण हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन कहलाता है।
हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन स्वतंत्र कोटा नहीं होता बल्कि संबंधित वर्टिकल श्रेणी के भीतर समायोजित किया जाता है। यानी OBC वर्ग का भूतपूर्व सैनिक OBC श्रेणी में ही समायोजित होगा।
कम्पार्टमेंटलाइज्ड रिजर्वेशन को भी समझाया
कोर्ट ने अनिल कुमार गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कम्पार्टमेंटलाइज्ड हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन में प्रत्येक वर्टिकल श्रेणी के भीतर अलग-अलग समायोजन किया जाता है। यदि किसी श्रेणी में पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिलते हैं तो वे सीटें उसी वर्टिकल श्रेणी के अन्य उम्मीदवारों से भरी जा सकती हैं।
कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में यह भी स्पष्ट है कि भूतपूर्व सैनिक या पुलिस आरक्षकों की खाली सीटों को कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाएगा। इससे साफ है कि राज्य का उद्देश्य केवल इन्हीं श्रेणियों से पद भरना नहीं है।
दिव्यांग उम्मीदवारों वाले फैसले को अलग बताया
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के PwD उम्मीदवारों से जुड़े फैसले को वर्तमान मामले से अलग माना। कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवारों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत विशेष वैधानिक संरक्षण प्राप्त है।
उन मामलों में नियमों को शिथिल करने और अलग कटऑफ देने का कानूनी आधार मौजूद है, जबकि भूतपूर्व सैनिकों और पुलिस आरक्षकों के मामले में ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी सभी याचिकाएं
चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि 24 जनवरी 2025 को राज्य सरकार द्वारा किया गया संशोधन पूरी तरह वैध है और यह संविधान या भर्ती नियमों के विपरीत नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी SI भर्ती 2025 की नियम पुस्तिका भी संशोधित नियमों के अनुरूप है। इसी के साथ हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
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