एमपी पुलिस के स्टार अफसर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर? DGP की गाइडलाइन से पड़ेगा फर्क?
संतोष पटेल 34 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स और फॉलोअर्स। भागवत प्रसाद पांडे 13 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स। रवींद्र सिंह ठाकुर 4 लाख 38 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स। ये मध्यप्रदेश पुलिस के कुछ ऐसे अफसर हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन फॉलोइंग है।
साहब कुछ भी करते हैं, उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करना नहीं भूलते। दूसरी तरफ डीजीपी कैलाश मकवाना ये नियम निकाल रहे हैं कि पुलिस वाले वर्दी में रील न बनाएं। सोशल मीडिया पर वर्दी में फोटो न डालें, केस की जानकारी न दें। लेकिन क्या किसी को फर्क पड़ता है?
डीजीपी ने क्या नियम निकाला?
दरअसल डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें 24 पॉइंट्स के जरिए बताया गया है कि फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर क्या पोस्ट करना है और क्या नहीं।
गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि पुलिस की उपलब्धियों को अपना निजी प्रचार नहीं बनाना है। ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा। बिना अनुमति सोशल मीडिया अकाउंट से कमाई करना या पेड प्रमोशन करना भी नियमों के खिलाफ होगा। अगर कोई अकाउंट मॉनेटाइज है तो 30 दिन के अंदर उससे होने वाली कमाई की जानकारी देनी होगी।
हालांकि ये नियम पहली बार नहीं आए हैं। एमपी पुलिस विभाग पहले भी सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कई बार निर्देश जारी कर चुका है। इसके बावजूद सवाल उठता है कि क्या इन नियमों का असर पुलिस अफसरों पर पड़ा है? इसी को समझने के लिए द सूत्र ने सोशल मीडिया पर लोकप्रिय कुछ पुलिस अधिकारियों के अकाउंट खंगाले।
संतोष पटेल, डीएसपी
डीएसपी संतोष पटेलमध्य प्रदेश के सबसे चर्चित पुलिस अफसर हैं। इनकी रील वक्त-वक्त पर वायरल होती रही है। डीजीपी ने अपने निर्देशों में ये भी लिखा कि केस की जानकारी सोशल मीडिया पर न डालें। लेकिन साहब के पास कोई भी फरियादी आता है, उसके केस की और उसकी रील जरूर बनती है। क्यों बनती है, ये तो संतोष पटेल ही जानें।
dgp mp police ने ये भी लिखा है कि किसी उपलब्धि को निजी प्रचार की तरह न दिखाएं। लेकिन पटेल साहब तलैया इंस्पेक्टर दीपक डेहरिया के काम से इतने प्रभावित हैं कि 3 केस भी बता दिए, जिसमें इंस्पेक्टर साहब ने अच्छा काम किया।
किसी को पकड़ते भी हैं, तो उसकी खबर सोशल मीडिया के जरिए पूरे शहर को दी जाती है। वर्दी में आते-जाते थोड़ी-बहुत रील ये भी बना लेते हैं। कोई कार्रवाई भी करते हैं, तो उसकी रील बनाना नहीं भूलते।
भागवत प्रसाद पांडे, एसआई
पांडे जी को भी रील का चस्का है। किसी जगह पर अगर ये मौजूद हैं, तो समझिए कैमरा भी होगा। साहब बाद में पहुंचते हैं, कैमरा पहले पहुंच जाता है। फेसबुक पर तो इनकी रील 135 मिलियन, 94 मिलियन, 68 मिलियन तक जाती है।
अपनी रील में एडिटिंग भी कमाल की करवाते हैं। देखने वाले को मजा न आए तो कहना। शायरी करने का भी थोड़ा शौक रखते हैं। किसी गाड़ी को अगर रोका, तो मानकर चलिए एक शायरी तो बनती है। हर जानकारी वर्दी में ही देते हैं।
डीजीपी साहब आदेश निकाल रहे हैं कि वर्दी में रील न बनाएं। लेकिन पांडे जी का तो काम ही रील से शुरू होता है। अब अगर रील नहीं बनाएंगे तो पता कैसे चलेगा कि भागवत प्रसाद पांडे ड्यूटी पर हैं।
रविंद्र सिंह ठाकुर, एसआई
रविंद्र सिंह ठाकुर भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल में पीछे नहीं हैं। इनकी वर्दी में रील आसानी से आपको मिल जाएगी। हालांकि उस रील को ये कभी जानकारी देने का जरिया बना देते हैं, तो कभी जिम करते हुए साइड इमेज में वर्दी वाली इमेज भी डाल देते हैं।
एसआई भर्ती 2026 की जानकारी देनी थी, तो वर्दी पहनकर ही दे दी। शायद ज्यादा व्यूज मिल जाएं। 2016 में साहब ने पुलिस जॉइन की थी। 2026 में 10 साल पूरे कर चुके हैं। उसकी खुशी भी बतानी जरूरी है। इसलिए एक रील इसकी भी डाल दी। ड्यूटी करते-करते भी तो एक रील बनती है। इसलिए वो भी वर्दी में बनाकर डाल दी। काम अपनी जगह है, फैन्स को भी तो अपडेट देना है। वरना लाइक और कमेंट कैसे आएंगे?
पहली बार जारी नहीं हुए नियम
ये पहली बार नहीं है जब पुलिस विभाग ने अफसरों और कर्मचारियों के लिए नियम निकाले हैं। PHQ, आईजी, एसपी के स्तर पर कई बार आंतरिक सर्कुलर जारी हो चुके हैं। इनमें वर्दी पहनकर रील बनाना, फोटो डालना इन सबको अनुशासनहीनता माना गया है।
हालांकि पहले के निर्देश डांस, एक्टिंग तक सीमित थे। यानी वर्दी की गरिमा बनाए रखने तक। डीजीपी ने जो नई गाइडलाइन जारी की उसमें एआई और चैटजीपीटी पर भी रोक लगाई है। साथ ही कमाई का ब्यौरा देने की बात भी पहली बार सामने आई है।
सिविल सेवा आचरण नियम पहले से
इन सर्कुलर और चेतावनी के अलावा, प्रदेश में सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 लागू है। इसमें पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की शर्तें भी तय हैं। लेकिन उसके बाद भी पुलिस अफसर न रीलबाजी से परहेज करते हैं, न ही सोशल मीडिया मोह छोड़ पा रहे हैं।
FAQ
- Q1. एमपी पुलिस ने सोशल मीडिया को लेकर नई गाइडलाइन क्यों जारी की है?
A. मध्यप्रदेश पुलिस ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर 24 बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर पोस्ट, फोटो, वीडियो और जानकारी साझा करने के नियम तय करना है। - Q2. नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में एमपी के पुलिसकर्मियों के लिए क्या नियम बनाए गए हैं?
A. गाइडलाइन में वर्दी में रील बनाने, केस से जुड़ी जानकारी साझा करने, निजी प्रचार करने और बिना अनुमति अकाउंट मॉनेटाइजेशन जैसे मामलों को लेकर निर्देश दिए गए हैं। - Q3. मध्यप्रदेश में कौन-कौन से पुलिस अधिकारी सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हैं?
A. संतोष पटेल, भागवत प्रसाद पांडे और रविंद्र सिंह ठाकुर जैसे पुलिस अधिकारी सोशल मीडिया पर अपनी रील और वीडियो के कारण काफी चर्चित हैं।
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