एमपी पुलिस भर्ती के बदले नियम, अब पदक नहीं प्रदर्शन भी देगा सरकारी नौकरी
मध्यप्रदेश में खेल को केवल पदक तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे करियर से भी जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों की पुलिस विभाग में सीधी भर्ती के नियमों में बदलाव कर भर्ती प्रक्रिया को नियमित, पारदर्शी और अधिक व्यावहारिक बनाने का फैसला किया है। इसका सबसे बड़ा असर उन खिलाड़ियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने भविष्य के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
खिलाड़ियों के पलायन पर लगेगी रोक
यह फैसला केवल एमपी पुलिस भर्ती प्रक्रिया में बदलाव नहीं है, बल्कि खेल प्रतिभाओं को राज्य में ही अवसर देने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। लंबे समय से बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में कई खिलाड़ी अन्य राज्यों की योजनाओं का सहारा लेते रहे हैं।
अब मध्यप्रदेश पुलिस में खेल कोटे से हर वर्ष भर्ती की व्यवस्था होने से खिलाड़ियों को अपने राज्य में ही सम्मानजनक सरकारी सेवा का विकल्प मिलेगा। इससे खेल और रोजगार के बीच की दूरी कम होने की उम्मीद है।
क्या बदला, इसे आसान भाषा में समझिए
- पुलिस विभाग में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती फिर शुरू होगी।
- हर साल भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने का प्रावधान किया गया है।
- 10 उप निरीक्षक और 50 आरक्षक पदों पर नियुक्ति का अवसर मिलेगा।
- चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है।
- भर्ती नियमों में संशोधन की अधिसूचना 15 जून को जारी की गई है।
भर्ती में खिलाड़ियों को कौन-कौन सी राहत मिलेगी
संशोधित नियमों के तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को कई महत्वपूर्ण छूट भी दी गई हैं। इसका उद्देश्य खेल उपलब्धियों को उचित महत्व देना है।
खिलाड़ियों को ये सुविधाएं मिलेंगी:
- निर्धारित ऊंचाई संबंधी शारीरिक मापदंडों में छूट।
- लिखित परीक्षा से छूट।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) से छूट।
- केवल खेल उपलब्धियों के आधार पर मूल्यांकन।
कौन बन सकेगा उप निरीक्षक?
उप निरीक्षक पद के लिए पात्रता का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों तक सीमित रखा गया है। इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे—
- ओलंपिक खेल
- एशियाई खेल
- राष्ट्रमंडल खेल
- विश्व कप
- विश्व चैम्पियनशिप
इन प्रतियोगिताओं में सहभागिता करने वाले तथा स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी सीधे नियुक्ति के लिए पात्र होंगे।
आरक्षक पद के लिए कौन कर सकेगा दावा?
आरक्षक पद के लिए पात्रता अपेक्षाकृत व्यापक रखी गई है। इन खिलाड़ियों को अवसर मिलेगा—
- उप निरीक्षक पद के लिए पात्र खिलाड़ी
- राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेता खिलाड़ी
- अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी
मेरिट बराबर होने पर कैसे होगा फैसला?
यदि दो खिलाड़ियों के मेरिट अंक समान होते हैं, तो प्राथमिकता का क्रम तय किया गया है। निर्णय के लिए इन बिंदुओं को आधार बनाया जाएगा-
- ओलंपिक प्रदर्शन
- एशियाई खेलों की उपलब्धि
- विश्व कप या अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्तर
- खिलाड़ी की आयु
खेल संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि जब खिलाड़ियों को यह भरोसा होगा कि खेल उनके लिए रोजगार का माध्यम भी बन सकता है, तो परिवारों का रुझान भी खेलों की ओर बढ़ेगा। नियमित भर्ती की व्यवस्था प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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