एमपी पुलिस प्रशिक्षण में वैदिक स्त्रोत का विवाद: गीता, मानस के बाद अब दक्षिणामूर्ति स्त्रोत्रम
News in Short
- पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' का पाठ शुरू।
- एडीजी राजा बाबू सिंह का कहना है, यह स्तोत्र विवेक और नैतिकता बढ़ाएगा।
- विपक्ष ने इसे सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता से जोड़ते हुए आलोचना की।
- भाजपा इसे भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा बता रही है।
- पहले भी गीता और रामचरितमानस का पाठ पुलिस प्रशिक्षण में कराया गया।
News in Detail
मध्यप्रदेश के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अब दिन की शुरुआत 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' के पाठ से की जाएगी। इस निर्णय से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी तटस्थता पर असर डालने वाला कदम बताया है।
भाजपा इसे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा मानते हुए बचाव कर रही है। एडीजी राजा बाबू सिंह का कहना है कि यह स्तोत्र प्रशिक्षुओं में नैतिकता, विवेक और जिम्मेदारी की भावना पैदा करेगा। पुलिस प्रशिक्षण में पहले भी धार्मिक स्त्रोतों का पाठ कराया गया था, जैसे गीता और रामचरितमानस।
पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में नया आदेश लागू
मध्य प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में नया आदेश लागू किया गया है। पुलिस प्रशिक्षण विंग के एडीजी राजा बाबू सिंह ने PTS को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक दिन का प्रशिक्षण 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' के पाठ से शुरू करें। एडीजी का कहना है कि यह स्तोत्र ज्ञान और विवेक का प्रतीक है। इससे पुलिस जवानों में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
दक्षिणामूर्ति स्त्रोत जगाएगा ज्ञान- विवेक
पुलिस प्रशिक्षण में एक नया आदेश लागू किया गया है। अब प्रशिक्षण की शुरुआत 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' के पाठ से होगी। इस आदेश का राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। एडीजी राजा बाबू सिंह का कहना है कि 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' ज्ञान और विवेक का प्रतीक है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम दार्शनिक स्तोत्र है। इसमें शामिल करीब 12 श्लोक अद्वैत वेदांत के सार को दर्शाते हैं।
जवानों में आएगी नैतिकता
एडीजी राजा बाबू सिंह का कहना है कि पहले भी गीता और रामचरित मानस जैसे ग्रंथों को प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। इनकी शिक्षा से पुलिस की निष्पक्षता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है।
ये ग्रंथ धार्मिक अभ्यास के लिए नहीं, बल्कि पुलिस जवानों में नैतिकता और संवेदनशीलता लाने के लिए हैं। यह कदम पहले किए गए बदलावों का हिस्सा है, जिसमें ध्यान और योग सत्र भी शामिल थे। ऐसे बदलावों से प्रशिक्षण में शामिल जवानों के अनुशासन और नैतिकता में वृद्धि होगी।
विपक्ष ने उठाए प्रशिक्षण पर सवाल
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि पुलिस को तटस्थ भाव से काम करना होता है। धार्मिक पाठ उन्हें निष्पक्षता से दूर कर सकते हैं। गुप्ता ने कहा कि पुलिस को निष्पक्ष और तटस्थ रहकर काम करना चाहिए। कांग्रेस ने पुलिस के इस कदम को सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता से जोड़कर सवाल खड़े किए हैं।
एमपी में 3 साल का नर्सिंग डिप्लोमा 4 साल में भी पूरा नहीं हो रहा, हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर
MP ESB Exam Calendar: एमपी में 8 सरकारी भर्ती परीक्षा की तारीखों में बदलाव, जानें नया शेड्यूल
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बदला मौसम का मिजाज, तेज आंधी और बारिश का अलर्ट