“महाराज माया के पुजारी हैं, भगवान के नहीं”… BJP प्रशिक्षण शिविर पर डॉ. गोविंद सिंह का बड़ा हमला

Ramanand Tiwari | May 13, 2026, 24:07 IST
Photograph: (the sootr)
कांग्रेस नेता गोविंद सिंह ने रावतपुरा धाम में भाजपा के प्रशिक्षण शिविर पर सवाल उठाए। उन्होंने धार्मिक स्थलों को राजनीतिक ब्रांडिंग से जोड़ने की आलोचना की।

मध्य प्रदेश की राजनीति में रावतपुरा धाम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के प्रशिक्षण शिविर के बीच कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने रावतपुरा सरकार और भाजपा दोनों पर एक साथ बड़ा हमला बोला है।


उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस ने कभी रावतपुरा धाम में कोई राजनीतिक शिविर नहीं लगाया और न ही ऐसी कोशिश की। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि “महाराज जी माया के पुजारी हैं, भगवान के नहीं” और भाजपा धर्म की आड़ में राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगी है।



“हम लोकतांत्रिक लोग हैं, खेत में भी शिविर लगा लेंगे”

द सूत्र से बातचीत में डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने कभी रावतपुरा धाम को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाया।



उन्होंने कहा, “हम लोग लोकतांत्रिक लोग हैं। खेत में शिविर लगा लेंगे या कहीं भी कार्यक्रम कर लेंगे, लेकिन धार्मिक आस्था के केंद्रों को राजनीतिक प्रशिक्षण का मंच बनाना हमारी सोच नहीं रही।” गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने कभी रावतपुरा धाम में संगठनात्मक शिविर लगाने की पहल तक नहीं की।



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भाजपा के प्रशिक्षण शिविर पर उठाए सवाल

रावतपुरा धाम में चल रहे भाजपा के दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग को लेकर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यहां सरकार की योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है और बड़े मंत्री, सांसद व विधायक जुट रहे हैं। सवाल यह है कि क्या धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल अब राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए किया जाएगा? उनके मुताबिक, भाजपा धर्म और सत्ता को एक साथ मिलाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।



“CBI केस के कारण भाजपा की चापलूसी”

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने बातचीत में रावतपुरा सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि महाराज जी के खिलाफ CBI में मामला दर्ज है और इसी वजह से वे भाजपा के करीब दिखाई दे रहे हैं। गोविंद सिंह ने दावा किया कि सत्ता के संरक्षण के बदले धार्मिक मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है।



आस्था नहीं… आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया”

डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि रावतपुरा सरकार ने दर्जनों संस्थाएं बना रखी हैं, लेकिन अब धार्मिक आस्था से ज्यादा फोकस आर्थिक विस्तार पर दिखाई देता है।



उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “धर्म के प्रति उनकी आस्था नहीं है, बल्कि धन-दौलत के प्रति आस्था है। महाराज जी माया के पुजारी हैं, भगवान के नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि धर्म की आड़ में बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया गया है।



“पहले लाखों की भीड़…अब गाड़ियां गिनने की नौबत”

गोविंद सिंह ने पुराने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब रावतपुरा धाम में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। उन्होंने कहा कि करीब दो दशक पहले महाराज मंच पर आते थे, दर्शन देते थे और लोगों की भारी आस्था दिखाई देती थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उनके मुताबिक, “आज स्थिति यह है कि दो-चार गाड़ियां आ जाएं तो बड़ी बात मानी जाती है।”



“ईमानदार अफसर हटवाए, तब से दूरी बना ली”

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि कमलनाथ सरकार के बाद कुछ ईमानदार राजस्व अधिकारियों को हटवाने में भी दबाव बनाया गया।



उन्होंने कहा कि इसके बाद से उन्होंने रावतपुरा सरकार से दूरी बना ली और उनके कार्यक्रमों में जाना बंद कर दिया।


गोविंद सिंह के मुताबिक, कई बार बुलावे आए, लेकिन उन्होंने उद्घाटन और आयोजनों में शामिल होना उचित नहीं समझा।



रावतपुरा सरकार का पक्ष नहीं आया सामने

इस पूरे विवाद को लेकर रावतपुरा सरकार का पक्ष जानने की भी कोशिश की गई। महाराज से बात करने के लिए कई बार मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। उनके पीए सुयश द्विवेदी को भी कॉल किए गए, हालांकि मोबाइल अटेंड नहीं हुआ। बाद में उन्हें व्हॉट्सऐप पर संदेश भी भेजा गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।



डॉ. गोविंद सिंह के पत्र में क्या लिखा?

डॉ. गोविंद सिंह ने रावतपुरा सरकार को लिखे पत्र में भी कई गंभीर बातें उठाई हैं।


पत्र में उन्होंने कहा कि:



  • रावतपुरा धाम कभी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र था।
  • भाजपा के राजनीतिक शिविरों से धार्मिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
  • धार्मिक मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए।
  • CBI जांच और FIR के बाद भी भाजपा से नजदीकियां सवाल खड़े करती हैं।
  • रावतपुरा धाम को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।

उन्होंने पत्र में आग्रह किया कि धाम की धार्मिक पहचान बचाने के लिए राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाई जाए।



मुख्य बातें एक नजर में

  • गोविंद सिंह बोले: कांग्रेस ने कभी रावतपुरा धाम में शिविर नहीं लगाया
  • भाजपा प्रशिक्षण वर्ग पर खड़े किए सवाल
  • “महाराज माया के पुजारी हैं, भगवान के नहीं” बयान से बढ़ा विवाद
  • CBI केस का हवाला देकर भाजपा से नजदीकियों पर उठाए सवाल
  • धार्मिक स्थलों के राजनीतिक इस्तेमाल पर कांग्रेस का हमला
  • रावतपुरा धाम की घटती भीड़ और बढ़ती राजनीति पर भी टिप्पणी

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अब क्यों बढ़ सकती है सियासत?

रावतपुरा धाम में भाजपा प्रशिक्षण शिविर पहले ही राजनीतिक चर्चा में था। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के सीधे हमले के बाद यह विवाद और तेज हो सकता है।



एक तरफ भाजपा इसे संगठनात्मक कार्यक्रम बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस धार्मिक मंचों के राजनीतिक इस्तेमाल का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की तैयारी में दिख रही है।



कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह



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