नवरात्रि में घरों में छाएगा अंधेरा? एमपी के पास बचा सिर्फ छह दिन का कोयला
MP Power Crisis: नवरात्रि शुरू होने से पहले मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रदेश के ताप बिजली घरों में कोयले का स्टॉक घटकर करीब 4.04 लाख मीट्रिक टन रह गया है। यह स्टॉक मौजूदा खपत के हिसाब से लगभग छह दिन के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है।
त्योहारी सीजन में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में कम कोयला भंडार के बीच बिजली कंपनियों के सामने उत्पादन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि अभी बिजली कटौती या संकट की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन आने वाले दिनों में कोयले की उपलब्धता अहम होगी।
12.25 लाख टन की जगह बचा सिर्फ 4.04 लाख टन कोयला
मध्य प्रदेश के ताप बिजली घरों में सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए करीब 12.25 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक होना चाहिए।
इसके मुकाबले वर्तमान में सिर्फ 4.04 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध है। यानी तय मानक की तुलना में प्रदेश के बिजली घरों में करीब एक तिहाई कोयला ही बचा है।
रोजाना करीब 65 हजार टन कोयले की खपत हो रही है। इस हिसाब से मौजूदा स्टॉक ज्यादा लंबा नहीं चल सकता।
पिछले साल से काफी कम है स्टॉक
आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल इसी अवधि में ताप बिजली घरों में करीब 10.82 लाख टन कोयला स्टॉक उपलब्ध था।
इस बार स्टॉक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता ज्यादा होने के कारण इसकी कमी सीधे उत्पादन क्षमता पर असर डाल सकती है।
एमपी की 83% बिजली कोयले से बनती है
एमपी में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा ताप बिजली घरों से आता है। प्रदेश में कुल बिजली उत्पादन में करीब 83 प्रतिशत हिस्सेदारी कोयले से बनने वाली बिजली की है।
वहीं करीब 17 प्रतिशत बिजली जल विद्युत और लगभग 0.1 प्रतिशत बिजली सोलर ऊर्जा से मिलती है।
यही वजह है कि कोयले की उपलब्धता बिजली व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नवरात्रि में बढ़ सकती है बिजली की मांग
नवरात्रि और त्योहारी सीजन में बिजली की खपत बढ़ जाती है। घरों में सजावट, बाजारों में रोशनी और धार्मिक आयोजनों के कारण मांग में इजाफा होता है।
इसके अलावा आने वाले समय में रबी फसल का सीजन भी शुरू होगा। किसानों को सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी।
रबी फसल के लिए बढ़ेगी बिजली की जरूरत
मध्य प्रदेश में रबी सीजन के दौरान सिंचाई के लिए कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ती है। गेहूं, चना, सरसों और अन्य रबी फसलों की बोवनी के बाद किसानों को लगातार बिजली आपूर्ति की जरूरत होती है।
ऐसे में एक तरफ त्योहारी सीजन में घरेलू मांग बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए सिंचाई बिजली की मांग भी बढ़ सकती है।
कम कोयला स्टॉक के बीच बिजली उत्पादन और आपूर्ति को संतुलित रखना ऊर्जा विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी।
किन बिजली घरों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक
प्रदेश के कुछ बड़े ताप बिजली घरों में कोयला स्टॉक की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के संजय गांधी ताप विद्युत गृह और सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में कोयले की उपलब्धता को लेकर ज्यादा चिंता जताई जा रही है। इन बिजली घरों में स्टॉक की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इसके अलावा प्रदेश के बाकी ताप बिजली संयंत्रों में भी कोयले की उपलब्धता और सप्लाई की निगरानी की जा रही है, ताकि एमपी में बिजली की समस्या पर असर न पड़े।
सरकार की नजर कोयला सप्लाई पर
बिजली कंपनियां कोयले की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सप्लाई पर नजर रख रही हैं। आने वाले दिनों में कोयले की आपूर्ति और बिजली की मांग के आधार पर स्थिति तय होगी।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नवरात्रि के दौरान बढ़ी मांग और रबी सीजन की जरूरतों के बीच बिजली उत्पादन लगातार जारी रखा जाए।
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