MP प्राइमरी शिक्षक भर्ती: कल तक दस्तावेज अपलोड नहीं किए तो हजारों अभ्यर्थी होंगे बाहर

Amresh Kushwaha | Jul 19, 2026, 08:35 IST
MP प्राइमरी शिक्षक भर्ती
मध्य प्रदेश में प्राइमरी टीचर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों को सिर्फ तीन दिन में दस्तावेज अपलोड करने का आदेश दिया गया है। इसमें 18 से 20 जुलाई की समय सीमा तय है। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मप्र में प्राइमरी टीचर भर्ती के दस्तावेज अपलोड शुरू हो गए हैं।
  • अभ्यर्थियों को सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है।
  • 18 से 20 जुलाई तक दस्तावेज अपलोड करना जरूरी है।
  • समय पर अपलोड न करने वाले भर्ती से बाहर होंगे।
  • 27 और 28 जुलाई को नियुक्ति पत्र देने की योजना है।

प्राइमरी शिक्षक भर्ती का मामला

मध्य प्रदेश में प्राइमरी टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने दस्तावेज अपलोड करने का काम शुरू कर दिया है। वहीं, अभ्यर्थियों को सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है। इससे उम्मीदवारों में नाराजगी बढ़ गई है।



सिर्फ 3 दिन की मोहलत

शिक्षा विभाग ने इस बारे में आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि 18 से 20 जुलाई के बीच दस्तावेज अपलोड करने होंगे। यह अपलोड एमपी ऑनलाइन (MP Online) पोर्टल पर होगा। जो अभ्यर्थी तय समय में दस्तावेज नहीं देंगे, उन्हें भर्ती से बाहर माना जाएगा।



कई अभ्यर्थियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। कई लोग इस दौरान घर से बाहर होते हैं। कुछ लोग वीकेंड पर घूमने गए हैं। ऐसे में उन्हें दिक्कत हो सकती है। अभ्यर्थियों की मांग है कि उन्हें थोड़ा और समय मिले।



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दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया

सिर्फ दस्तावेज अपलोड करना ही काफी नहीं है। अभ्यर्थियों को यह भी बताना होगा कि वे किस शिविर में सत्यापन कराएंगे। इसके लिए 21 जुलाई तक का समय दिया गया है। दस्तावेज अपलोड करने के अगले दिन अभ्यर्थी को खुद चुने गए सत्यापन केंद्र पर जाना होगा। वहां उसके दस्तावेजों की जांच होगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए अभ्यर्थियों को पोर्टल शुल्क भी देना होगा। यह पूरी प्रक्रिया जिलों में लगाए गए विशेष शिविरों में होगी।



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10 हजार पदों पर भर्ती

मध्य प्रदेश में प्राइमरी टीचर के करीब 10 हजार पद खाली हैं। इनमें से आठ हजार पद शिक्षा विभाग में हैं। बाकी दो हजार पद आदिमजाति विभाग में हैं। यह भर्ती प्राथमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक विशेष शिक्षा चयन परीक्षा 2025 के आधार पर हो रही है। यह परीक्षा कर्मचारी चयन मंडल ने आयोजित की थी। परीक्षा परिणाम के आधार पर चुने गए अभ्यर्थियों को अब सूचित किया जा रहा है।



क्यों हो रही जल्दबाजी

विभाग के अधिकारियों ने भर्ती में तेजी की वजह भी बताई है। उनका कहना है कि 27 और 28 जुलाई को अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की योजना है। पहले ही इस भर्ती में काफी देरी हो चुकी है। दरअसल पात्र टीचरों की नियुक्ति का मामला पहले कोर्ट में गया था। कोर्ट ने रिजल्ट को रिवाइज करने का निर्देश दिया था। कर्मचारी चयन मंडल ने इसके बाद रिजल्ट रिवाइज किया। यह काम 14 जुलाई को पूरा हुआ। इसी वजह से अब भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।



कोर्ट में अटके मामले

इस भर्ती से जुड़े करीब 400 मामले अभी भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इन मामलों को फिलहाल भर्ती प्रक्रिया से अलग रखा गया है। बाकी सभी अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कोर्ट में लंबित मामलों पर फैसला आने के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा।



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तीन दिन का समय पर्याप्त- आयुक्त

एमपी शिक्षा विभाग के आयुक्त अभिषेक सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तीन दिन का समय पर्याप्त है। उनके मुताबिक सभी अभ्यर्थियों को समय पर दस्तावेज अपलोड करने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अभ्यर्थी वाजिब वजह से चूक सकते हैं। ऐसे मामलों पर विभाग अलग से विचार करेगा। लेकिन यह विचार तभी होगा जब वजह वैधानिक होगी। बिना ठोस वजह के चूकने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी।



आदिमजाति विभाग बेखबर

प्राइमरी टीचर भर्ती में करीब दो हजार अभ्यर्थी आदिमजाति विभाग में नियुक्ति पाएंगे। वहीं, इस विभाग की तैयारी अभी अधूरी है। फिलहाल आदिमजाति विभाग की ओर से कोई खास तैयारी नहीं की गई है। इससे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई अभ्यर्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनका सत्यापन समय पर होगा या नहीं।



अब सबकी निगाहें 20 जुलाई की समय सीमा पर टिकी हैं। देखना होगा कि कितने अभ्यर्थी समय पर दस्तावेज अपलोड कर पाते हैं। इसके बाद ही साफ होगा कि किन्हें नियुक्ति पत्र मिलेगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर शिक्षा और रोजगार से जुड़े मौलिक अधिकार से सीधे जुड़ी है। संविधान हर नागरिक को समान अवसर और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार देता है। जब हजारों अभ्यर्थियों को बहुत कम समय में जरूरी दस्तावेज जमा करने कहा जाता है, तो पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।



यह खबर आम नागरिकों को उनके अधिकार और जिम्मेदारी दोनों समझने में मदद करती है। साथ ही यह प्रशासनिक जवाबदेही को भी सामने लाती है। शिक्षा विभाग जैसी संस्थाओं को समय सीमा तय करते वक्त आम अभ्यर्थियों की व्यावहारिक परेशानियों का ध्यान रखना चाहिए। यह खबर सामाजिक न्याय और डिजिटल पहुंच जैसे मुद्दों पर भी रोशनी डालती है।



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