शिक्षक भर्ती विवाद: दरी पर बैठ अभ्यर्थियों से बोले आयुक्त,कोर्ट का फैसला आने दें
मध्य प्रदेश में MP Primary Teacher Recruitment 2025 को लेकर अभ्यर्थियों का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।
मंगलवार रात यह मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया, जब आयुक्त अभिषेक सिंह पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से जमीन पर बैठकर बातचीत की। अभ्यर्थियों ने अपनी परेशानी बताई और नियुक्ति देने की मांग सामने रखी। आयुक्त ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और नियमों की स्थिति समझाई। उन्होंने कहा कि विभाग फिलहाल नियमों के मुताबिक ही आगे बढ़ सकता है। साथ ही उन्होंने अभ्यर्थियों से कोर्ट के फैसले का इंतजार करने कहा।
13,089 पदों वाली भर्ती में कहां फंसा पूरा मामला
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने 2025 में बड़ी शिक्षक भर्ती कराई थी। इस भर्ती में प्राथमिक शिक्षकों के कुल 13,089 पद शामिल किए गए थे। इनमें स्कूल शिक्षा विभाग के 10,150 पद शामिल किए गए थे। वहीं जनजातीय कार्य विभाग के लिए 2,939 पद रखे गए थे। आधिकारिक रिकॉर्ड में इस भर्ती का नाम Primary School Teacher Selection Test है।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान D.El.Ed योग्यता को लेकर शर्तें लागू थीं। इसी योग्यता को लेकर कुछ अभ्यर्थियों की परेशानी बाद में सामने आई। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास कर नौकरी की उम्मीद रखी। लेकिन योग्यता पूरी होने की तारीख को लेकर उनका मामला अटक गया।
अभ्यर्थियों का दावा है कि बाद में कटऑफ तारीख को लेकर विवाद खड़ा हुआ। उनका कहना है कि इससे कई सफल अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो गए।
अभ्यर्थियों का कहना है, नियम पहले साफ होने चाहिए थे
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी शिकायत इसी कटऑफ को लेकर है। उनका कहना है कि आवेदन प्रक्रिया के समय स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। अभ्यर्थी चाहते हैं कि उनकी योग्यता और परीक्षा परिणाम दोनों को देखा जाए। उनका तर्क है कि परीक्षा पास करने के बाद उन्हें मौका मिलना चाहिए। हालांकि नियुक्ति का अंतिम फैसला संबंधित नियमों और न्यायालय के आदेश पर निर्भर रहेगा।
इस मामले में कुछ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में शिक्षक भर्ती से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। हालांकि उपलब्ध हाई कोर्ट आदेशों में अलग-अलग पात्रता विवाद सामने आए हैं। इसलिए हर याचिका का असर उसके अपने तथ्यों पर निर्भर करेगा।
आयुक्त ने प्रदर्शनकारियों को क्या समझाया
मंगलवार रात अभ्यर्थियों से बातचीत के दौरान आयुक्त ने संयम दिखाया। उन्होंने कहा कि विभाग नियमों से बाहर जाकर नियुक्ति नहीं कर सकता। अगर अदालत से राहत मिलती है, तो आगे रास्ता खुल सकता है। ऐसी स्थिति में विभाग नियमों के अनुसार जरूरी कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल अधिकारियों की नजर न्यायालय में चल रही प्रक्रिया पर बनी है।
आयुक्त ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं से घर लौटने की अपील भी की। उन्होंने बारिश के मौसम में खुले स्थान पर रुकने से बचने कहा। महिला अभ्यर्थियों से भी उन्होंने विशेष तौर पर घर जाने की अपील की। उनकी चिंता यह थी कि रात में खुले में रुकना सुरक्षित नहीं है।
करीब एक हजार अभ्यर्थियों का दावा, नौकरी अभी अटकी
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब एक हजार लोग प्रभावित हैं। इनमें वे उम्मीदवार शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने परीक्षा में सफलता पाई। लेकिन संबंधित तारीख तक D.El.Ed पूरी नहीं होने से मामला अटक गया। यह संख्या फिलहाल अभ्यर्थियों के दावे के तौर पर ही देखी जानी चाहिए। इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से नहीं होती है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में मेहनत पूरी ईमानदारी से की। उनकी मांग है कि उन्हें केवल तकनीकी वजह से बाहर नहीं किया जाए। वे चाहते हैं कि सरकार उनके मामले पर मानवीय नजरिया अपनाए। लेकिन सरकार के लिए नियम और न्यायालय दोनों का पालन जरूरी है।
कोर्ट का फैसला क्यों बन गया सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका न्यायालय के फैसले की है। किसी भी नियुक्ति में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता बेहद अहम होती है। सरकारी विभाग नियमों के खिलाफ जाकर नियुक्ति करने का जोखिम नहीं उठा सकता। यही वजह है कि अधिकारी फिलहाल कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े पात्रता मामलों पर सुनवाई की है। कुछ मामलों में अदालत ने भर्ती नियमों की अहमियत पर टिप्पणी की है। एक मामले में अदालत ने कहा कि नियमों से अलग राहत मांगना आसान नहीं। इसलिए वर्तमान विवाद का समाधान भी न्यायिक आदेश से प्रभावित हो सकता है।
आगे अभ्यर्थियों के लिए क्या रास्ता बचता है
फिलहाल अभ्यर्थियों के पास न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना जरूरी है। साथ ही उन्हें MPESB के नए नोटिस लगातार चेक करते रहना चाहिए। अगर अदालत राहत देती है, तो नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अगर राहत नहीं मिलती, तो मौजूदा पात्रता नियम लागू रह सकते हैं। इसलिए अभी किसी अंतिम नियुक्ति या राहत का दावा करना जल्दबाजी होगी।
पूरे मामले की असली तस्वीर अदालत और आधिकारिक आदेशों से साफ होगी। अभ्यर्थियों का आंदोलन जरूर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा बढ़ा रहा है। लेकिन नौकरी मिलने का फैसला केवल प्रदर्शन के आधार पर नहीं होगा। अंतिम फैसला नियम, दस्तावेज और न्यायालय के आदेशों पर ही निर्भर करेगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
FASTag लोकल पास के लिए करें ऑनलाइन आवेदन, टोल प्लाजा जाने की जरूरत नहीं
शिक्षक दिवस पर किया वादा, एक साल बाद भी अधूरा
सड़क घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, ग्वालियर नगर निगम आयुक्त से मांगा हलफनामा
MIC ने खारिज किया सरकारी संपत्ति कब्जाधारकों से संपत्ति कर प्रस्ताव
prathmik shikshak bharti 2025