कई प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस अब तक तय नहीं, बिना फीस जाने एडमिशन लेने को मजबूर विद्यार्थी

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 31, 2026, 14:47 IST
मध्य प्रदेश के कई निजी आयुष कॉलेजों की फीस तय नहीं हुई हैं। AFRC कमेटी के गठन में गड़बड़ी के बीच छात्रों को बिना फीस जाने एडमिशन लेना पड़ रहा है।
Students seeking admission to private AYUSH colleges in Madhya Pradesh face uncertainty as delayed AFRC meetings leave fees at several institutions undecided.
मध्यप्रदेश के कई प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस अभी तय नहीं हुई है। छात्रों को अब तक नहीं पता कि कितनी फीस देनी होगी। इसके बावजूद उन्हें काउंसलिंग में चॉइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग करनी पड़ रही है। इससे छात्र और उनके माता-पिता परेशान हैं। उन्हें डर है कि एडमिशन के बाद कॉलेज मनमानी फीस वसूल सकते हैं।

यह परेशानी प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति (एएफआरसी) के गलत गठन से हुई है। लेकिन इसे सुधारने के बजाय विभागों के बीच चिट्ठियां भेजी जा रही हैं।



जीएडी ने कहा- सीधे हमें पत्र न लिखें

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने एएफआरसी के चेयरमैन को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि समिति सीधे जीएडी को पत्र न भेजे। पहले अपनी बात तकनीकी शिक्षा विभाग को बताए। वहां से प्रस्ताव आने के बाद ही जीएडी इस पर फैसला करेगा।



दरअसल, फीस कमेटी ने जीएडी को पत्र लिखकर बताया था कि समिति के पुनर्गठन के आदेश में सदस्य की जगह सदस्य-सचिव का पदनाम जोड़ दिया गया है, जबकि एएफआरसी एक्ट, 2007 में इस पद का कोई प्रावधान नहीं है।



इस पर जीएडी ने जवाब दिया कि समिति के गठन का प्रस्ताव तकनीकी शिक्षा विभाग से आया था। इसलिए पदनाम में सुधार का प्रस्ताव भी उसी विभाग के जरिए भेजना होगा।



16 सितंबर को बनी कमेटी, पहली बैठक भी नहीं हुई

एएफआरसी की कमेटी बनने का आदेश 16 सितंबर को जारी हुआ था। लेकिन अब तक समिति की पहली औपचारिक बैठक भी नहीं हो सकी है। इसकी बड़ी वजह गठन के आदेश में पदनाम को लेकर पैदा हुआ विवाद है।



आदेश में तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक या अतिरिक्त संचालक को सदस्य-सचिव बना दिया गया, जबकि एक्ट में ऐसा कोई पद नहीं है। पहले तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से नियुक्त OSD ही समिति के सचिव की जिम्मेदारी संभालते थे।



इसके अलावा विधि और वित्त विभाग के प्रतिनिधियों के लिए सचिव या अतिरिक्त सचिव जैसे विकल्प दिए गए हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि बैठक में अधिकृत सदस्य कौन होगा। हालांकि वित्त विभाग ने अतिरिक्त सचिव को भेजने पर सहमति दे दी है।



गलती सामने आने के बाद समिति के नए चेयरमैन और उनके ओएसडी की ओर से जीएडी को पत्र भेजे गए, लेकिन मामला अब तक नहीं सुलझा है।



फीस तय नहीं होने से छात्रों की बढ़ी चिंता

समिति की बैठक नहीं होने का सीधा असर आयुष पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। कई निजी आयुष कॉलेजों की फीस अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में विद्यार्थियों को यह पता ही नहीं है कि जिस कॉलेज का चयन कर रहे हैं, वहां पढ़ाई पर कितना खर्च आएगा।



फीस तय होने में हो रही देरी से छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है। उन्हें आशंका है कि कॉलेज प्रबंधन बाद में अपनी मर्जी से फीस न लगा दे।



चेयरमैन बोले- पत्र मिलते ही आगे भेजेंगे

इस मामले में जीएडी के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला से संपर्क करने और मैसेज भेजने पर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।



FAQ

  1. प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस तय क्यों नहीं हुई है?
    प्राइवेट आयुष कॉलेजों की फीस तय नहीं हुई है क्योंकि एएफआरसी कमेटी के गठन में गड़बड़ी के कारण अब तक पहली औपचारिक बैठक नहीं हो सकी है।
  2. अभी छात्रों को फीस के बिना एडमिशन कैसे ले रहे हैं?
    हां, छात्रों को कई कॉलेजों की फीस की जानकारी के बिना चॉइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग करनी पड़ रही है, क्योंकि फीस अभी तय नहीं हुई है।
  3. जीएडी ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
    जीएडी ने स्पष्ट किया है कि एएफआरसी की समिति ने जो पत्र भेजा है, उसे तकनीकी शिक्षा विभाग के माध्यम से ही उचित कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
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