प्रमोशन में आरक्षण: SC ने कहा 90 दिन में फैसला, एमपी में 116 दिन से इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रमोशन में आरक्षण का मामला 17 फरवरी 2026 से सुरक्षित, 116 दिन पूरे।
- सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित फैसलों के लिए 3 महीने की समय-सीमा तय की है।
- जमानत मामलों में उसी दिन या अगले दिन आदेश अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
- कानूनी विशेषज्ञों के बीच अब आगे की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं शुरू।
SC की गाइडलाइंस के बाद उठा बड़ा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुनवाई के बाद मामले अनिश्चितकाल तक सुरक्षित नहीं रह सकते। हाईकोर्ट्स के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की गई। जजमेंट डिलीवरी को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। मध्य प्रदेश का प्रमोशन में आरक्षण मामला 116 दिन से सुरक्षित है। कानूनी और प्रशासनिक हलकों में सवाल यह है कि फैसला अभी तक क्यों नहीं आया।
17 फरवरी को सुरक्षित हुआ था फैसला
प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने पूरी कर 17 फरवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 12 जून 2026 तक इस फैसले का इंतजार 116 दिनों तक पहुंच चुका है। दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 90 दिनों की अवधि भी अब काफी पीछे छूट चुकी है। इससे कर्मचारियों के बीच उत्सुकता और बढ़ गई है।
लाखों कर्मचारियों की नजर
यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं माना जा रहा बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे लाखों कर्मचारी, विभिन्न विभागों में लंबित प्रमोशन, वरिष्ठता सूची और कई भर्ती प्रक्रियाएं इस फैसले से प्रभावित हो सकती हैं। यही कारण है कि हर गुजरते दिन के साथ इस मामले को लेकर चर्चा और तेज होती जा रही है।
sc ने क्यों जारी की थीं नई गाइडलाइंस?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि फैसलों में अत्यधिक देरी न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। नई गाइडलाइंस के तहत हाईकोर्ट्स को सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकतम तीन महीने में फैसला सुनाने का प्रयास करना होगा। यदि फैसला नहीं आता है तो प्रशासनिक स्तर पर उसकी समीक्षा की व्यवस्था भी बताई गई है। शीर्ष अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पक्षकारों को अनिश्चितकाल तक निर्णय का इंतजार न करना पड़े।
दोबारा सुनवाई पर कयास जारी
इस मामले में लगातार कयास लग रहे हैं कि अब सुनवाई किसी अन्य बेंच के सामने होगी। खबर लिखे जाने तक ऐसा कोई तथ्य या स्टेटस सामने नहीं आया। अभी भी मामला सुरक्षित बताया जा रहा है। किसी जज की बेंच में यह मामला लिस्ट नहीं हुआ। इसलिए दोबारा सुनवाई की चर्चा सिर्फ कयास है।
जुड़े जजों की स्थिति भी बदली
प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई करने वाले तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा अब सुप्रीम कोर्ट में हैं। जस्टिस विनय सराफ का स्थानांतरण इंदौर खंडपीठ में हो चुका है। इस कारण कानूनी हलकों में संभावनाओं को लेकर चर्चा है। आधिकारिक तौर पर मामले की स्थिति में अभी कोई परिवर्तन दर्ज नहीं हुआ है।
63 सुरक्षित मामलों में कई पर आ चुके हैं फैसले
जानकारी के अनुसार इसी खंडपीठ ने फरवरी 2026 में सुरक्षित रखे 63 मामलों में से कई का निस्तारण किया। इनमें एक मामला प्रमोशन में आरक्षण प्रकरण के अगले दिन 18 फरवरी को सुरक्षित रखा गया था। इसका फैसला 20 मई को जारी किया गया। इससे प्रमोशन में आरक्षण मामले को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
फैसले का इंतजार, चर्चाओं का दौर जारी
सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइंस के बाद प्रदेश के कर्मचारी वर्ग को उम्मीद थी कि लंबे समय से सुरक्षित यह फैसला जल्द सामने आ सकता है। फिलहाल मामले की स्थिति यथावत है और लाखों कर्मचारियों की निगाहें अब भी इस बहुप्रतीक्षित निर्णय पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रकरण में अगला कदम क्या होगा। प्रदेश को लंबे समय से प्रतीक्षित फैसला कब मिलता है यह भी महत्वपूर्ण है।
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