प्रमोशन में आरक्षण मामला : हाईकोर्ट में हुई मामले की अंतिम सुनवाई, हजारों कर्मचारियों की नजर अब आदेश पर

मध्य प्रदेश प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी। फैसला सुरक्षित रखा गया, अब हजारों कर्मचारियों को प्रमोशन आदेश का इंतजार है।

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Neel Tiwari
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Reservation case in promotion: Final hearing of the case held in High Court

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • 17 फरवरी को अंतिम सुनवाई पूरी
  • चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की बेंच में हुई सुनवाई
  • सभी पक्षों की बहस के बाद फैसला हर्ड एंड रिजर्व
  • प्रमोशन प्रक्रिया लंबे समय से ठप
  • 45 याचिकाओं पर एक साथ हुआ फैसला सुरक्षित

Intro 

मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 को लेकर चल रही लंबी कानूनी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मंगलवार 17 फरवरी को हाईकोर्ट में अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया। DPC का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों को अब सिर्फ आदेश जारी होने का इंतजार है।

News in detail

अंतिम सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार 17 फरवरी को अंतिम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजिव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने आखिरकार सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद मामले को “हर्ड एंड रिजर्व” रख लिया है। अब इस बहुप्रतीक्षित विवाद में केवल आदेश जारी होना शेष है।

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रुकी DPC, कर्मचारियों की बढ़ी बेचैनी

यह मामला पिछले लगभग सात महीनों से हाईकोर्ट में विचाराधीन था। 7 जुलाई 2025 की पहली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि मामले के लंबित रहने तक कोई भी विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) आयोजित नहीं की जाएगी। हालांकि कोई लिखित स्थगन आदेश नहीं था, लेकिन उसी मौखिक आश्वासन के बाद से पूरे प्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से रुक गई। इसका सीधा असर हजारों कर्मचारियों के करियर और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ा।

क्रीमी लेयर से लेकर रिप्रेजेंटेशन तक हर एक मुद्दे पर हुई बहस

प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 को लेकर कुल 45 याचिकाएं दाखिल हुईं, जिनमें डॉ. स्वाति तिवारी सहित कई याचिकाकर्ता शामिल हैं। बीते दिनों हुई सुनवाई के दौरान क्रीमी लेयर, पर्याप्त प्रतिनिधित्व, डाटा कलेक्शन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के पालन जैसे मुद्दे उठाए गए। आरक्षित और अनारक्षित वर्ग दोनों की ओर से प्रतिनिधित्व (Representation) की गणना को लेकर तीखी कानूनी बहस हुई। राज्य सरकार ने प्रशासनिक मजबूरियों का हवाला देते हुए रिक्त पदों की बड़ी संख्या का उल्लेख भी किया।

बार-बार टली सुनवाई, आखिरकार निर्णायक मोड़

मामले की सुनवाई कई बार टली। कभी बेंच की अनुपलब्धता तो कभी नई याचिकाओं के कारण सुनवाई आगे बढ़ती रही। 3 फरवरी की निर्धारित तारीख भी कॉज लिस्ट में शामिल न होने से टल गई थी, जिससे कर्मचारियों की निराशा और बढ़ गई थी। लेकिन 17 फरवरी को हुई सुनवाई में सभी पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अब मामला अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है।

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अब आदेश का इंतजार, जल्द आएगा फैसला

हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब प्रदेश के हजारों कर्मचारी आदेश जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रमोशन नियम 2025 लागू रहेंगे या उनमें संशोधन अथवा निरस्तीकरण की दिशा तय होगी। फिलहाल पूरे प्रशासनिक तंत्र और कर्मचारियों की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हुई हैं।

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