प्रमोशन में आरक्षण: नियम 2025 के विरोध में उतरा अजाक्स, 13 जनवरी को अंतिम सुनवाई पर संशय

मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियम 2025 के खिलाफ कानूनी विवाद बढ़ता जा रहा है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने अजाक्स संगठन से अलग याचिका दायर करने को कहा था।

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Neel Tiwari
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NEWS In short 

  1. 13 जनवरी की सुनवाई अब अंतिम नहीं-नई याचिका से बढ़ सकता है इंतजार।
  2. पिछली सुनवाई में HC ने अजाक्स को अलग याचिका दायर करने को कहा था।
  3. आरक्षित वर्ग की नई याचिका-प्रमोशन नियम 2025 के नियम 11–12 को दी चुनौती।
  4. SC आदेशों की अनदेखी का आरोप-मेरिट आधारित पदोन्नति रोके जाने पर सवाल।
  5. प्रमोशन पॉलिसी अधर में-फैसला अब सभी वर्गों के भविष्य तय करेगा।

News in Detail

मध्यप्रदेश में सालों से अटकी पदोन्नतियों को लेकर चल रहा विवाद अब और पेचीदा होता नजर आ रहा है। पदोन्नति नियम 2025 के खिलाफ जारी कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि अजाक्स संगठन को नियमों को चुनौती देने के लिए अलग याचिका दायर करनी होगी। अब आरक्षित वर्ग की ओर से नई याचिका दाखिल होने से मामला फिर से उलझता नजर आ रहा है। 13 जनवरी 2026 को प्रस्तावित सुनवाई इस प्रकरण की अंतिम बहस मानी जा रही थी, लेकिन ताज़ा घटनाक्रम ने इस उम्मीद को नाकाम कर दिया है।

13 जनवरी को थी अंतिम बहस की उम्मीद

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि अजाक्स संगठन यदि प्रमोशन नियमों का विरोध नहीं कर रहा है, तो पहले इन्हें लागू किया जाए। इसके बाद अलग याचिका दायर की जाए। यह धारणा बनी थी कि 13 जनवरी की सुनवाई में लंबित याचिकाओं पर अंतिम बहस हो सकती है।

नई याचिका से लंबा हो सकता है इंतजार

अब आरक्षित वर्ग के अधिकारी सुरेश कुमार कुमरे द्वारा दायर नई याचिका ने पूरे मामले को नया आयाम दे दिया है। इस याचिका में पदोन्नति नियम 2025 के नियम 11 और 12 को असंवैधानिक बताते हुए सीधे चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इन नियमों से आरक्षित वर्ग के अधिकारी वंचित हो रहे हैं। यह मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर पदोन्नति को प्रभावित करता है। यह संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के जनरल सिंह बनाम भारत संघ प्रकरण का हवाला दिया गया। 17 मई 2018 को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि आरक्षित से आरक्षित, अनारक्षित से अनारक्षित और मेरिट के आधार पर पदोन्नति की जा सकती है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इन निर्देशों की सही व्याख्या नहीं की और पदोन्नति प्रक्रिया को वर्षों तक रोके रखा।

अब आखिरी सुनवाई पर संशय

जहां एक ओर अनारक्षित वर्ग पहले से ही पदोन्नति नियम 2025 को लेकर कोर्ट में चुनौती दे चुका है। वहीं अब आरक्षित वर्ग की याचिका में भी नियमों को चुनौती दे दी गई है। इसलिए यह लगभग तय माना जा रहा है कि 13 जनवरी 2026 की सुनवाई अब अंतिम नहीं होगी। कोर्ट को सभी पक्षों और नई याचिकाओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्यवाही तय करनी पड़ेगी।

प्रमोशन पॉलिसी पर बड़ा फैसला अभी बाकी

प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ा यह विवाद अब केवल नियमों की वैधता तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल भी उठ रहा है कि मेरिट, समानता और आरक्षण के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। हाईकोर्ट की आने वाली सुनवाइयों से यह स्पष्ट होगा कि पदोन्नति नियम 2025 मौजूदा संवैधानिक कसौटी पर टिकते हैं या नहीं। फिलहाल, नई याचिका के साथ यह मामला और उलझ गया है। हजारों कर्मचारियों की पदोन्नति का भविष्य अब भी अदालत के फैसले पर टिका हुआ है।

प्रमोशन में आरक्षण 2025 नियम हुए लागू तो आगे क्या होगा

प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 से करीब 4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी प्रभावित है। 9 साल से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया के बाद नई प्रमोशन नीति 2025 लागू होगी। इससे लगभग 4 लाख कर्मचारियों को पदोन्नति मिल सकती है। इस नीति लागू होने से लगभग 2 लाख नई रिक्तियां भी बनेंगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया को भी गति मिलेगी। इसके अलावा, वरिष्ठता और मेरिट के आधार पर पदोन्नति मिलने से ऑफिसर और कर्मियों की कैरियर ग्रोथ भी सुधरेगी। 

यदि पदोन्नति नियम 2025 रद्द हो जाते हैं तो क्या असर होगा?

प्रमोशन प्रक्रिया फिर से लंबे समय के लिए अटकी रह सकती है। हाईकोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा रखी है। यह रोक पुराने और नए नियमों का अंतर स्पष्ट करने के लिए है। तब तक प्रमोशन लागू नहीं होंगे। यदि नए नियम रद्द होते हैं, तो 2002 के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं। इससे पूरे मध्य प्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।

आरक्षण से जुड़ी कानूनी अनिश्चितता बनी रहने पर कई विभागों में प्रमोशन और नई भर्तियां प्रभावित रहेंगी। प्रशासनिक प्रणाली धीमी पड़ेगी। सामान्य वर्ग कर्मियों के लिए यदि आरक्षण रद्द होता है, तो उनमें संतुलन और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति के अवसर बदल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन्स के बिना नई व्यवस्था लागू करना मुश्किल होगा। 

निष्कर्ष

अब कुल मिलाकर जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले का असर लाखों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ने वाला है। अगर प्रमोशन में आरक्षण लागू हुआ, तो लगभग 4 लाख+ कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं नियम 2025 रद्द होने पर प्रमोशन और लंबे समय तक रुका रह सकता है। नई नियुक्तियां भी प्रभावित होंगी।

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