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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई अंतिम चरण में पहुंची।
- चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने संकेत दिए, जल्द आ सकता है फैसला।
- नई याचिका सुनवाई के दौरान वापस ली गई, कोर्ट ने विरोधाभासी रुख पर सवाल उठाए।
- सरकार ने डीपीसी न करने की अंडरटेकिंग वापस लेने की अनुमति मांगी।
- अगली और निर्णायक सुनवाई 3 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे तय हुई।
NEWS IN DETAIL
Jabalpur. मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट में साफ संकेत मिले कि लंबी चली बहस अब अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही फैसला आ सकता है।
नई याचिका से शुरू सुनवाई, बाद में हुआ बदलाव
सुनवाई की शुरुआत एक नई याचिका से हुई, जो हाल ही में दाखिल की गई थी। यह याचिका मध्य प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड में पदस्थ अधिकारी की ओर से दायर की गई थी। हालांकि, सुनवाई आगे बढ़ते ही परिस्थितियां बदलीं और याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला कर लिया। इससे मामले की दिशा पूरी तरह साफ हो गई।
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सरकार ने नई याचिका पर जताया कड़ा ऐतराज
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने नई याचिका का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बार-बार नई याचिकाएं दायर कर मामले को जानबूझकर लंबा किया जा रहा है। इससे न केवल सुनवाई प्रभावित हो रही है, बल्कि अंतिम फैसले में भी देरी हो रही है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि हर याचिका को सुनने का अवसर मिलना चाहिए।
DPC को लेकर सरकार की अंडरटेकिंग पर बहस
सुनवाई के दौरान सरकार ने एक और अहम मुद्दा उठाया। महाधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि पहले दी गई उस अंडरटेकिंग को वापस लेने की अनुमति दी जाए, जिसमें DPC न करने का भरोसा दिया गया था। कोर्ट ने इस पर साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर वह स्थगन आदेश भी जारी कर सकता है। किसी भी स्थिति में सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होने दी जाएगी।
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प्रशासनिक हालत पर सरकार ने रखे आंकड़े
सरकार ने कोर्ट के सामने प्रदेश की प्रशासनिक स्थिति की पूरी तस्वीर रखी। बताया गया कि मध्य प्रदेश में कुल 54 विभाग और करीब 1500 कैडर हैं। क्लास वन और क्लास टू के कुल 14,860 स्वीकृत पदों में से केवल 6,232 पद भरे हुए हैं। इसका मतलब है कि सरकार लगभग 40 प्रतिशत अधिकारियों के सहारे प्रशासन चला रही है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
कोर्ट की सख्ती के बाद वापस ली गई याचिका
नई याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पुराने रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता पहले सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन नियम लागू करने की मांग कर चुका है। अब वही व्यक्ति हाईकोर्ट में उसी नियम का विरोध कर रहा था। इन सवालों के बाद याचिकाकर्ता संतोषजनक जवाब नहीं दे सका और याचिका वापस ले ली गई।
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प्रतिनिधित्व की गणना को लेकर असली टकराव
इसके बाद कोर्ट ने मुख्य याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। आरक्षित वर्ग की ओर से कहा गया कि प्रमोशन नियम 2025 में प्रतिनिधित्व की गणना सही तरीके से नहीं की गई है। उनका तर्क था कि जो अधिकारी मेरिट के आधार पर पहले ही प्रमोट हो चुके हैं, उन्हें आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व में नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
कोर्ट ने बताया आरक्षण का असली मकसद
इस दलील पर कोर्ट ने साफ आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर मेरिट से आए अधिकारियों को पूरी तरह अलग कर दिया गया, तो प्रमोशन में आरक्षण का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने उदाहरण देकर समझाया कि आरक्षण का मकसद न तो पूरा भराव करना है और न ही कम प्रतिनिधित्व छोड़ना, बल्कि संतुलन बनाए रखना है।
अनारक्षित वर्ग ने भी रखी अपनी शर्त
अनारक्षित वर्ग की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि वे भी इस बात से सहमत हैं कि मेरिट से आए अधिकारियों को अनारक्षित वर्ग में न गिना जाए। लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि यह भी देखा जाए कि इन अधिकारियों ने अपने करियर में कभी आरक्षण का लाभ लिया है या नहीं। इस बिंदु पर सरकार के पास ठोस डाटा न होने की बात सामने आई।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का लिया सहारा
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज और आरबी राय मामलों के निर्देशों के आधार पर बनाया गया है। सरकार ने कहा कि अगली सुनवाई में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन आधारों पर पुराने नियम निरस्त हुए थे और नया डाटा किस तरह जुटाया गया है।
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अब 3 फरवरी को होगी निर्णायक सुनवाई
हाईकोर्ट में इस दिन सुनवाई करीब डेढ़ घंटे तक चली। लंच के बाद बहस और आगे बढ़ी, जिससे साफ हो गया कि मामला अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी दोपहर 12:30 बजे का समय तय किया है। इस दिन सरकार अपनी अंतिम दलील रखेगी, जिसके बाद इस बहुप्रतीक्षित मामले में फैसला आने की उम्मीद है।
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