फिर टली प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई, कर्मचारियों का इंतजार और लंबा

एमपी में प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में एक बार फिर देरी हो गई है। हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद 3 फरवरी को तय सुनवाई नहीं हो सकी है। मामला कॉज लिस्ट में शामिल ही नहीं हुआ। अब कर्मचारियों की निगाहें 5 फरवरी पर टिकी हैं।

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Neel Tiwari
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News in Short

  • 3 फरवरी को तय सुनवाई कॉज लिस्ट में शामिल नहीं हुई है।

  • अब 5 फरवरी को प्रमोशन आरक्षण मामले की सुनवाई होगी।

  • चीफ जस्टिस फिलहाल VC से सुनवाई कर रहे हैं।

  • कोर्ट इस अहम मामले को प्रत्यक्ष रूप से सुनना चाहता है।

  • DPC ठप होने से हजारों कर्मचारियों का प्रमोशन अटका हुआ है।

News in Detail

कॉज लिस्ट से बाहर रहा मामला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 27 जनवरी 2025 के आदेश के मुताबिक प्रमोशन में आरक्षण पर सुनवाई आज होनी थी। यह सुनवाई आज, 3 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे तय थी।

वहीं, मामला चीफ जस्टिस की कॉज लिस्ट में लिस्टेड नहीं किया गया है। इसी वजह से सुनवाई नहीं हो सकी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को तय की गई है।

पिछला आदेश जिसके अनुसार आज होनी थी सुनवाई

क्यों टली सुनवाई, क्या है वजह

कानूनी जानकारों के अनुसार फिलहाल चीफ जस्टिस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई कर रहे हैं। प्रमोशन में आरक्षण का यह मामला न केवल संवैधानिक बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

ऐसे में कोर्ट इस मामले की सुनवाई प्रत्यक्ष रूप से करना चाहता है। यही कारण है कि सुनवाई को कुछ दिन आगे बढ़ाया गया है। अनुमान है कि 5 फरवरी को चीफ जस्टिस जबलपुर हाईकोर्ट में मौजूद रहेंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान कई बार ऑडियो और ERP एक्सेस जैसी समस्याएं आती हैं। इससे सुनवाई प्रभावित होती है। उदाहरण के तौर पर, सोमवार को ही जजों का ERP सही ढंग से काम नहीं कर रहा था। इसके कारण उन्हें अपलोड किए गए दस्तावेज देखने में परेशानी हो रही थी।

7 महीने, 16 सुनवाई और 45 याचिकाएं, फैसले का इंतजार

प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 को लेकर अब तक जबलपुर हाईकोर्ट में 46 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। इसमें से एक याचिका पिछली सुनवाई में वापस ली गई थी।

अब कुल 45 याचिकाएं दायर हैं। डॉ. स्वाति तिवारी सहित कई याचिकाकर्ताओं के जरिए 26 जून 2025 को यह मामला दायर किया गया था। वहीं, 7 जुलाई 2025 को पहली सुनवाई हुई थी और तभी से यह नियम कानूनी विवादों में घिर गया है। अब तक 16 बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय अब भी बाकी है।

लिखित स्टे नहीं, लेकिन मौखिक आदेश से थमी DPC

हालांकि हाईकोर्ट ने प्रमोशन पर कोई लिखित स्टे आदेश जारी नहीं किया है। वहीं, पहली ही सुनवाई में महाधिवक्ता के जरिए दी गई अंडरटेकिंग और कोर्ट की टिप्पणी के बाद से कोई भी DPC नहीं की गई थी। व्यावहारिक रूप से यह मौखिक निर्देश ही कर्मचारियों के लिए प्रमोशन पर पूर्ण विराम बन गया है।

सरकार की दलील: 40% स्ट्रेंथ पर चल रहा प्रशासन

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के 54 विभागों और करीब 1500 कैडर में क्लास-1 और क्लास-2 के कुल 14 हजार 860 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 8 हजार 688 पद रिक्त हैं।

सरकार ने कहा कि केवल 40 प्रतिशत अधिकारियों के भरोसे प्रशासन चल रहा है। वहीं, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक कसौटी से समझौता नहीं किया जा सकता है।

अब निगाहें 5 फरवरी पर

सभी पक्षों की लगभग अंतिम बहस पूरी हो चुकी है। कोर्ट के रुख से संकेत मिल चुके हैं कि फैसला ज्यादा दूर नहीं है।

हालांकि बार-बार टलती सुनवाई ने कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ा दी है। अब 5 फरवरी को होने वाली सुनवाई को एक बार फिर निर्णायक माना जा रहा है। प्रमोशन में आरक्षण पर वर्षों से चले आ रहे विवाद के खत्म होने की उम्मीद की जा रही है।

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