MP प्रमोशन: हाई कोर्ट में केस चलते हुए भी सशर्त मिल सकती है पदोन्नति!

Jitendra Shrivastava | Jun 30, 2026, 17:53 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. MP में पदोन्नति नियम 2025 पर हाई कोर्ट में केस चल रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता की राय के मुताबिक शर्त के साथ प्रमोशन कानूनी है। GAD ने सभी विभागों को पत्र भेजा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • MP में दशक से रुकी पदोन्नति- अब सरकार ने उठाया बड़ा कदम।
  • हाई कोर्ट में केस चल रहा, फिर भी प्रमोशन दे सकती है सरकार?
  • वकील की राय- शर्त के साथ पदोन्नति कानूनी है।
  • 40% क्षमता पर चल रहा सरकारी तंत्र, खाली पड़े हैं बड़े पद।
  • MP प्रमोशन नियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट तक गई लड़ाई।

मध्यप्रदेश में करीब एक दशक से सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति रुकी हुई है। राज्य सरकार के पदोन्नति नियम 2025 को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। अब सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता से कानूनी राय मांगी। राय आई कि हाई कोर्ट में केस चलते हुए भी शर्त के साथ प्रमोशन दिया जा सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 30 जून 2026 को सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को इस राय से अवगत कराया।



क्यों रुकी थी पदोन्नति?

मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के पहले दिन राज्य सरकार ने मौखिक आश्वासन दिया था कि केस चलते-चलते प्रमोशन नहीं किए जाएंगे। यह आश्वासन जल्दी फैसला आने की उम्मीद में दिया गया था।



लेकिन हालात बदल गए। मामला 17 फरवरी 2026 को फैसले के लिए सुरक्षित हो गया था। इसके बाद एक न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट चले गए और दूसरे का तबादला हो गया। अब यह केस नई बेंच के सामने फिर से सुना जाएगा। फैसला आने में काफी वक्त लग सकता है।



वरिष्ठ अधिवक्ता ने क्या कहा?

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की राय GAD (General Administration Department- सामान्य प्रशासन विभाग) को भेजी। वैद्यनाथन ने इन्हीं याचिकाओं में हाई कोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखा था।



उनकी 27 जून 2026 की कानूनी राय के मुताबिक तीन अहम बातें सामने आईं-



पहली- सरकार का मौखिक आश्वासन किसी न्यायिक आदेश में दर्ज नहीं हुआ। इसलिए यह कोर्ट की बाध्यकारी शर्त नहीं बन सकता।



दूसरी- हाई कोर्ट ने पदोन्नति नियम 2025 पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। इसलिए नियम अभी भी लागू और वैध हैं।



तीसरी- सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के अनुसार DPC (विभागीय पदोन्नति समिति – Departmental Promotion Committee) बैठाई जा सकती है। लेकिन प्रमोशन इस शर्त के साथ हो कि अगर कोर्ट का अंतिम फैसला विपरीत आया तो उसे माना जाएगा।



सरकारी तंत्र में कितनी रिक्तियां?

कानूनी राय में एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया। राज्य सरकार अभी केवल 40 प्रतिशत अधिकृत क्षमता पर काम कर रही है। करीब एक दशक से पदोन्नति न होने के कारण ऊपरी पदों पर बड़े पैमाने पर रिक्तियां हैं।



इसका असर सिर्फ वरिष्ठ पदों तक नहीं रुका। नीचे के पदों पर भर्ती भी इसी कारण अटकी है। जब ऊपर के पद खाली नहीं होते तो नीचे से प्रमोशन नहीं होता। और जब प्रमोशन नहीं होता तो नई भर्ती के लिए जगह नहीं बनती।





GAD ने क्या किया 30 जून को?

अपर सचिव अजय केटेसरिया ने 30 जून 2026 को एक पत्र जारी किया। यह पत्र समस्त विभागों के भारसाधक सचिव, विभागाध्यक्ष और जिला कलेक्टरों को भेजा गया।



पत्र में महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता की कानूनी राय का हवाला दिया गया। सभी से कहा गया कि इस विधिक परामर्श के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे साफ है कि राज्य सरकार अब DPC बैठाकर सशर्त पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।



क्या है कानूनी पेच?

वैद्यनाथन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अभी प्रमोशन दिए जाते हैं और बाद में कोर्ट का फैसला विपरीत आता है तो प्रशासनिक उलटफेर हो सकता है। इसलिए सरकार को इस जोखिम और प्रशासनिक जरूरत को तोलकर फैसला लेना होगा।



सुप्रीम कोर्ट के मामले State of Madhya Pradesh vs. Vinay Kumar Babele में यह स्थापित हो चुका है कि नियमों को चुनौती मिलने से DPC बैठाने पर रोक नहीं लगती।



एक्सपर्ट कोट्स

वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की कानूनी राय (27 जून 2026) के इस दस्तावेज में उनका मत स्पष्ट है कि हाई कोर्ट का कोई अंतरिम आदेश नहीं होने के कारण पदोन्नति नियम लागू और वैध हैं। मौखिक आश्वासन को अनिश्चितकालीन रोक नहीं माना जा सकता। सशर्त पदोन्नति को न्यायिक समर्थन प्राप्त है।



FAQ

  1. MP पदोन्नति नियम 2025 क्या है और इसे क्यों चुनौती दी गई?
    मध्यप्रदेश सरकार ने 2025 में सरकारी सेवाओं में पदोन्नति के नए नियम बनाए। इन्हें हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
  2. क्या हाई कोर्ट में केस चलते हुए प्रमोशन दिया जा सकता है?
    वरिष्ठ अधिवक्ता की कानूनी राय के अनुसार हां। हाई कोर्ट ने कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। लेकिन प्रमोशन इस शर्त के साथ होना चाहिए कि अंतिम न्यायिक फैसले के अनुरूप रहेगा।
  3. DPC क्या होती है और इसका प्रमोशन से क्या संबंध है?
    DPC यानी Departmental Promotion Committee सरकारी विभागों में पदोन्नति की सिफारिश करती है। यह समिति पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करती है। DPC की बैठक के बिना पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती।

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