कानूनी लड़ाई के लिए MPPSC ने सात गुना बढ़ाए वकील, रिजल्ट में आएगी तेजी
मप्र लोक सेवा आयोग (पीएससी) ने कानूनी विवादों के कारण भर्ती में हो रही देरी रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने विधि शाखा को मजबूत करते हुए वकीलों की संख्या में काफी बढ़ोतरी की है। इसी सिलसिले में शनिवार को एक दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की गई।
तीन से बढ़ाकर 21 किए वकील
आयोग में पहले कानूनी मामलों को हैंडल करने के लिए तीन ही वकील थे। लेकिन अब लगातार हो रहे केस के बाद इनकी संख्या तीन से बढ़ाकर 21 कर दी गई है। यानी सात गुना बढ़ोतरी की गई। इन सभी की कार्यशाला आयोग ने शनिवार को की थी। इसमें जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर तीनों बेंच के अधिकृत वकील भी मौजूद रहे।
कार्यशाला में यह दी गई सीख
आयोग की कार्यशाला का उद्देश्य न्यायालय में MPPSC के विरुद्ध प्रकरणों में आयोग मजबूत पक्ष रखना है। कार्यशाला में आयोग के अध्यक्ष प्रो. राजेश लाल मेहरा, सदस्य प्रो. नरेन्द्र कुमार कोष्टी, सदस्य पिंकेशलता रघुवंशी एवं सचिव शीतला पटले, परीक्षा नियंत्रक डॉ विरेन्द्र कुमार गुप्ता तथा अन्य अधिकारी शामिल थे। इनके द्वारा आयोग के विभिन्न न्यायालयीन मामलों को लेकर अपने विचार रखे गए।
वकीलों ने भी केस को लेकर रखी बात
आयोग के अधिवक्ताओं में शशांक इंदापुरकर, विशाल सनोठिया तथा आदित्य पचोरी व अन्य अधिवक्ताओं द्वारा विचार रखे गए। कार्यशाला के अंत में विधि अधिकारी अनिता शुक्ला द्वारा आभार व्यक्त किया गया एवं कार्यशाला का संचालन के.सी. पाण्डे द्वारा किया गया।
क्यों जरूरी है इतने वकील
आयोग की भर्ती को लेकर लगातार याचिकाएं लग रही है। जबलपुर के साथ ही इंदौर और ग्वालियर में विविध याचिकाएं चल रही है। ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण का केस चल ही रहा है।
जिससे 13 फीसदी पद होल्ड पर है। हाल ही में राज्य सेवा मेंस 2025 को लेकर एक साल तक मामला अटका जिसके बाद कोर्ट से मंजूरी मिली।
असिस्टेंट प्रोफेसर के कई विषय और फूड सेफ्टी ऑफिसर को लेकर भी रिजल्ट अटका रहा और अब कोर्ट की मंजूरी के बाद जारी हुआ। अधिक वकील होने से कोर्ट में पैरवी करने में तेजी आएगी, इससे रिजल्ट भी जल्द जारी हो सकेंगे।
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