एमपी पीडब्ल्यूडी टेंडर आदेश: अब अफसरों की तय होगी जवाबदेही, टेंडर सिस्टम पर लगाम
मध्यप्रदेश PWD में टेंडर प्रक्रिया को लेकर नया आदेश जारी कर जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी है। तकनीकी जांच से लेकर वित्तीय मूल्यांकन तक हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है। गलती मिलने पर संबंधित अफसरों से जवाब भी मांगा जाएगा।
सुनने में यह व्यवस्था सुधारने वाला कदम लगता है। लेकिन इसी आदेश ने विभाग के सामने एक बड़ा और असहज सवाल खड़ा कर दिया है-जब टेंडर प्रक्रिया में पहले से जांच और समितियां मौजूद थीं, तो अब अचानक इतनी सख्ती की जरूरत क्यों पड़ी?
प्रदेश में हजारों करोड़ रुपए के सड़क, पुल और भवनों के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में सिर्फ नया पत्र जारी कर देना काफी नहीं होगा। असली सवाल यह है कि क्या इस बार आदेश फाइलों से निकलकर जमीन पर भी उतरेगा?
मुख्य तथ्य
- टेंडर की तकनीकी जांच में गलती पर जवाबदेही तय होगी।
- वित्तीय मूल्यांकन करने वाली समितियां भी निगरानी के दायरे में रहेंगी।
- टेंडर प्रक्रिया के हर चरण की जिम्मेदारी रिकॉर्ड में रखने की तैयारी है।
- राज्य स्तरीय समिति के स्तर पर फाइलों की दोबारा जांच की व्यवस्था होगी।
- निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने पर पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी होगी।
सबसे बड़ा सवाल-आदेश के बाद कितने मामलों में कार्रवाई होगी?
PWD की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग में निगरानी का मतलब सिर्फ फाइल देखना, पत्र लिखना और जवाब मांगना रह गया है?
अगर हर बार किसी शिकायत या सवाल के बाद नया पत्र जारी करना पड़ता है, तो फिर नियमित निगरानी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति देखते हैं या फिर कार्यालय में बैठकर पत्राचार को ही कार्रवाई मान लिया जाता है? यही वह सवाल है, जिसका जवाब नए आदेश से ज्यादा जरूरी है।
अब लगाम कस रही है, तो पहले ढील कितनी थी?
टेंडर प्रक्रिया को सख्त बनाने की जरूरत बताई जा रही है। लेकिन तकनीकी जांच और वित्तीय मूल्यांकन की व्यवस्था पहले से मौजूद रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि पुरानी व्यवस्था में आखिर ऐसी कौन-सी कमी सामने आई, जिसके बाद अब अतिरिक्त निगरानी की जरूरत महसूस हुई?
कमेटियां जिम्मेदार होंगी, लेकिन कमेटी की निगरानी कौन करेगा?
तकनीकी और वित्तीय समितियों की जिम्मेदारी तय करना अच्छी पहल हो सकती है। लेकिन यहां भी अगला सवाल खड़ा होता है-जिम्मेदार समिति की निगरानी कौन करेगा?
किस अधिकारी ने क्या जांचा, किस बिंदु पर आपत्ति दर्ज की गई और किस आधार पर फाइल आगे बढ़ी-इसका रिकॉर्ड पारदर्शी होना जरूरी है।
सिर्फ जिम्मेदारी लिख देने से जवाबदेही नहीं आती। गलती सामने आने के बाद कार्रवाई होने पर ही व्यवस्था का संदेश नीचे तक जाता है।
टेंडर पास होने के बाद क्या विभाग की जिम्मेदारी खत्म?
सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता का है। कागज पर टेंडर प्रक्रिया कितनी भी मजबूत क्यों न हो, अगर सड़क कुछ समय बाद खराब हो जाए, पुल अधूरा रह जाए या भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठें तो पूरी निगरानी व्यवस्था कठघरे में आती है।
इसलिए निगरानी सिर्फ टेंडर मंजूर होने तक नहीं, बल्कि टेंडर से निर्माण और भुगतान तक होनी चाहिए।
CR और विभागीय निगरानी पर भी उठेंगे सवाल
अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो केवल टेंडर कमेटी की भूमिका देखना पर्याप्त नहीं होगा।
इंजीनियरों की निगरानी, निरीक्षण व्यवस्था, रिपोर्टिंग और CR यानी गोपनीय प्रतिवेदन जैसी विभागीय व्यवस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
क्योंकि सिस्टम की एक कड़ी कमजोर रही तो बाकी पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
पत्राचार नहीं, अब कार्रवाई दिखानी होगी
PWD का नया आदेश तभी प्रभावी माना जाएगा, जब इसके बाद जवाबदेही के वास्तविक उदाहरण सामने आएं।
किसी फाइल पर सवाल उठा तो सिर्फ जवाब मांगा गया या जिम्मेदारी भी तय हुई?
किसी टेंडर में तकनीकी चूक मिली तो सिर्फ प्रक्रिया दोहराई गई या संबंधित स्तर पर कार्रवाई भी हुई? किसी निर्माण की गुणवत्ता खराब मिली तो सिर्फ रिपोर्ट बनी या जिम्मेदारों पर असर भी पड़ा? यही वे सवाल हैं, जो नए आदेश की असली परीक्षा तय करेंगे।
आखिरी सवाल
अगर अब टेंडर सिस्टम में लगाम कसने की जरूरत पड़ रही है, तो क्या विभाग की पुरानी निगरानी व्यवस्था उतनी मजबूत थी, जितनी कागजों पर दिखाई देती थी?
नया आदेश जवाबदेही की शुरुआत हो सकता है। लेकिन अगर इसका अंत भी सिर्फ पत्राचार, स्पष्टीकरण और फाइल बंद करने तक सीमित रहा, तो सवाल और बड़ा होगा।
क्योंकि PWD को अब नया पत्र नहीं, जमीन पर नया असर दिखाना होगा। PWD के उप सचिव एआर सिंह ने कहा कि प्रदेश में कामों की गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से शासन स्तर पर यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ गुणवत्तापूर्ण कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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