अब ठेकेदार ही नहीं, अफसर भी नपेंगे: PWD में टेंडर गड़बड़ी पर होगी सीधी कार्रवाई

Amresh Kushwaha | Aug 31, 2026, 09:49 IST
PWD में टेंडर गड़बड़ी पर होगी सीधी कार्रवाई
PWD में टेंडर गड़बड़ी पर होगी सीधी कार्रवाई
मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग ने नया नियम लागू किया है। सड़क और भवन निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर अब सिर्फ ठेकेदार नहीं, टेंडर पास करने वाले अफसर भी जिम्मेदार होंगे। जानिए पूरी नई व्यवस्था...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • पीडब्ल्यूडी ने टेंडर प्रक्रिया में नई जवाबदेही व्यवस्था लागू की है।
  • अब सिर्फ ठेकेदार नहीं, अफसर भी जिम्मेदार होंगे।
  • जांच दो स्तरों पर होगी, तकनीकी और वित्तीय।
  • गड़बड़ी मिलने पर संबंधित समिति के अफसरों पर कार्रवाई होगी।
  • विभाग ने सभी अधिकारियों को नए निर्देश जारी किए हैं।

अब ठेकेदार अकेला नहीं फंसेगा

मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी (PWD - Public Works Department) ने एक बड़ा फैसला लिया है। सड़क और बड़े भवनों के निर्माण कार्यों में अब सिर्फ ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं होगी।



अब तक क्या होता था, यह समझना जरूरी है। तकनीकी खामी या वित्तीय गड़बड़ी मिलने पर सिर्फ ठेकेदार को नोटिस दिया जाता था। कई बार ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया जाता था।



लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में टेंडर पास करने वाले इंजीनियर और अफसर बच निकलते थे। उन पर कोई सीधी जिम्मेदारी तय नहीं होती थी। अब विभाग ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है।



दो स्तरों पर होगी जांच

विभाग ने टेंडर प्रक्रिया में अलग-अलग स्तरों पर बनी कमेटियों की जिम्मेदारी नए सिरे से तय की है। इसके तहत तकनीकी और वित्तीय जांच करने वाली समितियों के अधिकारियों की जवाबदेही साफ कर दी गई है।



टेंडर जांच में किसी भी स्तर पर चूक होने पर सीधी कार्रवाई होगी। यदि कोई गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती, तो संबंधित समीक्षा समिति के अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी व्यवस्था अब दो चरणों में काम करेगी।



पहला चरण है तकनीकी जांच। दूसरा चरण वित्तीय जांच का है। दोनों ही स्तर पर अलग-अलग समितियां काम करेंगी और अपनी जिम्मेदारी खुद उठाएंगी।



पहला स्तर, तकनीकी समिति

पहले चरण में विभागीय तकनीकी समीक्षा समिति काम करेगी। टेंडर मिलने के बाद यह समिति सबसे पहले सक्रिय होगी।



यह समिति निविदा यानी टेंडर की शर्तों और मापदंडों का बारीकी से परीक्षण करेगी। हर दस्तावेज और हर शर्त को ध्यान से जांचा जाएगा।



अगर इस दौरान कोई तकनीकी गलती मिलती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी इसी समिति की होगी। कमी, पक्षपात या किसी अयोग्य फर्म को टेंडर देने जैसी गड़बड़ी पर सीधी कार्रवाई तय है। पहले यह जिम्मेदारी साफ तौर पर तय नहीं होती थी।



दूसरा स्तर, वित्तीय समिति

तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही मामला वित्तीय मूल्यांकन समिति के पास जाएगा। सिर्फ पूरी तरह पात्र पाए गए टेंडर ही इस चरण तक पहुंचेंगे।



यह समिति वित्तीय प्रस्तावों और दरों की गहराई से जांच करेगी। मूल्यांकन में पारदर्शिता बनाए रखना इसकी मुख्य जिम्मेदारी होगी।



अगर वित्तीय मूल्यांकन में किसी तरह की गड़बड़ी मिलती है, तो इसके लिए यही समिति जिम्मेदार मानी जाएगी। इस तरह हर स्तर पर अलग-अलग जवाबदेही तय कर दी गई है। इससे किसी एक व्यक्ति या समिति पर पूरा दोष डालना आसान नहीं रहेगा।



राज्य स्तर पर भी होगी दोहरी जांच

बड़े टेंडर सीधे राज्य स्तरीय निविदा निरूपण समिति के पास नहीं जाएंगे। इससे पहले विभागाध्यक्ष स्तर पर गठित परीक्षण समिति से जांच जरूरी होगी।



इस समिति को वित्तीय शुद्धता और तथ्यों की पुष्टि करनी होगी। यानी हर फाइल को एक अतिरिक्त जांच से गुजरना होगा।



पूरी जांच और संतुष्टि के बाद ही फाइल अंतिम मंजूरी के लिए आगे भेजी जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि इससे सेटिंग करने पर सीधी रोक लगेगी। पहले कई मामलों में जांच अधूरी रहने की शिकायतें मिलती रही हैं।



किसे मिले निर्देश

विभाग ने अपने प्रमुख अभियंताओं को यह निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम और मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के अधिकारियों को भी निर्देश भेजे गए हैं।



इन सभी निगमों और विभागों को नई व्यवस्था के मुताबिक काम करना होगा। हर स्तर पर अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का ध्यान रखना होगा। विभाग का मानना है कि इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार आएगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर आम जनता के टैक्स के पैसे से जुड़ी है। सड़क और सरकारी भवन जनता के इस्तेमाल के लिए बनते हैं। अगर निर्माण में गड़बड़ी होती है, तो सीधा नुकसान आम लोगों को होता है। अब तक सिर्फ ठेकेदार पर कार्रवाई होने से जवाबदेही अधूरी रहती थी।



नया नियम अफसरों को भी जिम्मेदार बनाता है, जो पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप है। यह खबर सरकारी निर्देशों पर आधारित तथ्यात्मक जानकारी देती है। इसमें किसी व्यक्ति या विभाग पर सीधा आरोप नहीं लगाया गया है। पाठकों को सिर्फ नई व्यवस्था की जानकारी दी गई है।



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