बड़ी लापरवाही: कन्फर्म टिकट के बावजूद ट्रेन की बोगी गायब, रेलवे पर जुर्माना
News in short
- मंगलेश कुमार जोशी ने 30 नवंबर को कन्फर्म सीट बुक की थी, लेकिन कोच गायब था।
- यात्रियों को जनरल कोच में बैठने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें असुविधा हुई।
- ठंड में यात्रा करने से मंगलेश कुमार जोशी की स्वास्थ्य समस्याओं को भी नुकसान हुआ।
- रेलवे ने शिकायत का कोई ठोस समाधान नहीं दिया और केवल सीट नंबर की जानकारी दी।
- उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को 15 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया।
News in Detail
भोपाल में रेलवे की लापरवाही के कारण एक यात्री को कन्फर्म एसी कोच के बावजूद जनरल कोच में सफर करना पड़ा। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने रेलवे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 15 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, मंगलेश कुमार जोशी ने 30 नवंबर 2024 को नागपुर से भोपाल के लिए चार वरिष्ठ नागरिकों के लिए कन्फर्म सीटें बुक की थीं। टिकट पर सीट नंबर भी आवंटित किए गए थे। जब ट्रेन भोपाल के प्लेटफार्म पर पहुंची, तो डीएल-1 कोच गायब था। इसके बाद टीटीई ने यात्रियों को जनरल कोच में बैठने के लिए कहा। मजबूरी में उन्हें जनरल कोच में बैठकर सफर करना पड़ा। वहां सीट नहीं थी और उन्हें शौचालय के पास बैठना पड़ा।
ठंड में असुविधा
यह घटना ठंड के मौसम में हुई, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई। इसके अलावा, मंगलेश कुमार जोशी को अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं, जिससे उनका सफर और भी कठिन हो गया। उन्हें न केवल अपनी सीट का खामियाजा भुगतना पड़ा, बल्कि उनकी स्वास्थ्य समस्याओं ने सफर को और भी कष्टकारी बना दिया।
शिकायत और रेलवे की लापरवाही
मंगलेश कुमार जोशी ने इस मामले में रेलवे के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, लेकिन रेलवे ने कोई ठोस समाधान नहीं दिया। रेलवे ने केवल सीट नंबर की जानकारी दी, जबकि कोच की स्थिति पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
उपभोक्ता आयोग का आदेश
भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की लापरवाही को गंभीर माना। आयोग ने कहा कि कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्रियों को जनरल कोच में बैठाना अनुचित था। इसके बाद रेलवे को 15 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया गया।
कोई ठोस सबूत नहीं पेश किया गया
भारतीय रेलवे ने तर्क दिया था कि संबंधित कोच ट्रेन में लगाया गया था और यात्रियों को सीटें आवंटित की गई थीं। लेकिन इस संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। इस पर आयोग ने कहा कि यह सेवा में कमी का मामला है, क्योंकि रेलवे को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी और यात्रियों को बगैर किसी परेशानी के यात्रा करनी चाहिए थी।
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