बिना डिलीवरी बना दिए 250 से ज्यादा बर्थ सर्टिफिकेट, एमपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के राजगढ़ के रामगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में फर्जीवाड़ा पकड़ाया है।
- फरवरी 2026 में एक भी डिलीवरी नहीं हुई, फिर भी 137 बर्थ सर्टिफिकेट बन गए।
- कुल 250 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए, 35 हजार रुपए कमाए।
- साल 1950 से 1980 तक के पुराने और अन्य राज्यों के नाम पर भी दस्तावेज बनाए गए।
- मुख्य आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्जुन बैरागी समेत 6 लोग गिरफ्तार हुए हैं।
राजगढ़ में बड़ा फर्जीवाड़ा
मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले का रामगढ़ गांव इन दिनों एक बड़े घोटाले की वजह से चर्चा में है। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर दिए। हैरानी की बात यs है कि जितने सर्टिफिकेट बने, उसमें से एक भी असली नहीं था।
फरवरी 2026 में इस छोटे से स्वास्थ्य केंद्र पर 137 बच्चों के जन्म का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया गया। लेकिन हकीकत ये थी कि उस पूरे महीने वहां एक भी डिलीवरी नहीं हुई थी। पूरा खेल कागजों पर चल रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी।
कब और कैसे खुला राज?
मामले का खुलासा तब हुआ जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को इस असामान्य रजिस्ट्रेशन की जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित ऑपरेटर को पद से हटाया। इसके बाद 6 अप्रैल 2026 को माचलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
डॉ. सुनील चौरसिया, बीएमओ (Block Medical Officer) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जीरापुर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। धारा 318(4), 338 और 336(3) बीएनएस के तहत केस दर्ज हुआ। शिकायत दर्ज होते ही जांच की गति तेज हो गई।
1950 से लेकर 2026 तक के फर्जी दस्तावेज
बता दें कि, जांच में जो तथ्य सामने आए वे और भी चौंकाने वाले हैं। सिर्फ फरवरी 2026 का ही नहीं, बल्कि साल 1950 से लेकर 1980 के भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए थे। उस वक्त रामगढ़ में न कोई स्वास्थ्य केंद्र था और न ही वहां डिलीवरी की कोई व्यवस्था।
इतना ही नहीं, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी यहीं से डाक्यूमेंट्स जारी किए गए। कुल मिलाकर 250 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। ये गिरोह सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं था, इसकी जड़ें देशभर में फैली थीं।
कैसे चलता था यह धंधा
यह पूरा खेल एक सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। लोकसेवा केंद्र, आधार सेंटर और एमपी ऑनलाइन संचालकों के जरिए ग्राहकों को इस गिरोह तक पहुंचाया जाता था। जो लोग आधार कार्ड में नाम या जन्मतिथि बदलवाना चाहते थे, उनके लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए जाते थे।
कॉपी सर्टिफिकेट पांच सौ से एक हजार रुपए वसूले जाते थे। इसके बाद सीआरएस पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज स्कैन कर अपलोड किए जाते थे। संबंधित मेडिकल अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं थी क्योंकि पूरा काम अंदर ही अंदर हो रहा था।
6 आरोपी गिरफ्तार, 35 हजार का गबन कबूला
पुलिस ने मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने करीब 250 फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर 35 हजार रुपए अवैध तरीके से कमाए।
एएसपी केएल बंजारे ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और रामगढ़ स्वास्थ्य केंद्र का कंप्यूटर सिस्टम जब्त किया गया है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने इस मामले में आमजन से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेज बनाना या बनवाना दोनों ही गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। लोगों को चाहिए कि वे हमेशा वैलिड और गवर्नमेंट प्रोसेस का ही पालन करें।
किसी भी दलाल या बिचौलिए के जरिए दस्तावेज बनवाने से बचें। ये मामला अभी जांच के दायरे में है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह से जुड़े और लोगों की पहचान हो सकती है। अभी जांच जारी है।
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