मोदी मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़ा मध्यप्रदेश राज्यसभा उपचुनाव, दिल्ली से आएगा उम्मीदवार, प्रदेश के दिग्गजों की उम्मीदें कमजोर!
मंत्रिमंडल विस्तार के समीकरणों से जुड़ा उम्मीदवार चयन?
राजनीतिक आकलन है कि भाजपा इस सीट से नया राष्ट्रीय समीकरण बना सकती है। उम्मीदवार का चयन संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को ध्यान में रखकर हो सकता है। हालांकि दोनों घटनाक्रमों के बीच किसी आधिकारिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख भी अभी घोषित नहीं की गई है।
मध्यप्रदेश की सीट, लेकिन उम्मीदवार दूसरे राज्य से?
राजनीतिक चर्चाओं में दूसरे राज्य के नेता को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसा होने पर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं की उम्मीदों को झटका लग सकता है। प्रदेश के कई नेता लंबे समय से बड़े राजनीतिक अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फिलहाल केंद्रीय नेतृत्व ने किसी बाहरी उम्मीदवार के चयन का आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। उम्मीदवार का अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को करना है।
मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट
केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से मध्यप्रदेश की एक राज्यसभा सीट खाली हुई है। उनका निर्धारित कार्यकाल दो अप्रैल 2030 तक था। इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी है। मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा का संख्या बल मजबूत है। ऐसे में राज्यसभा उपचुनाव में पार्टी की स्थिति भी मजबूत मानी जा रही है।
राज्यसभा उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार उपचुनाव की अधिसूचना 26 अक्टूबर को जारी होगी। उम्मीदवार दो नवंबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच तीन नवंबर को होगी। पांच नवंबर तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। मतदान के लिए 12 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
दिल्ली के फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
इस उपचुनाव में भाजपा का उम्मीदवार राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। दूसरे राज्य के नेता को मौका मिलने पर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं को बल मिलेगा। वहीं मध्यप्रदेश के नेता का चयन होने पर प्रदेश की राजनीति में अलग संदेश जाएगा। उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही इन राजनीतिक अटकलों की स्थिति स्पष्ट होगी।