राज्यसभा की 3 सीटें और दतिया उपचुनाव ने बढ़ाई सियासी गर्मी, बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने तेज की रणनीति

Ramanand Tiwari | May 22, 2026, 15:10 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में चुनावी माहौल गर्म हो गया है। चुनाव आयोग ने अब राज्यसभा चुनाव की तारीख तय कर दी है। MP में तीन सीटों पर चुनाव होने हैं। बता दें कि कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल खत्म हो रहा है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में अचानक चुनावी तापमान बढ़ गया है। राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव और दतिया विधानसभा उपचुनाव ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की रणनीतिक हलचल तेज कर दी है। अब चुनाव आयोग ने भी तस्वीर साफ कर दी है। निर्वाचन आयोग ने 18 जून 2026 को राज्यसभा चुनाव की तारीख तय कर दी है। मध्य प्रदेश समेत 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होंगे।



MP में तीन सीटों पर चुनाव होना है। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा के जॉर्ज कुरियन व सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।



राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल

  • अधिसूचना जारी होगी - 1 जून 2026
  • नामांकन की आखिरी तारीख - 8 जून
  • नामांकन जांच - 9 जून
  • नाम वापसी - 11 जून
  • मतदान - 18 जून
  • मतगणना - 18 जून शाम 5 बजे
  • पूरी प्रक्रिया - 20 जून तक

इस आधिकारिक घोषणा के बाद अब राजनीतिक दलों की अंदरूनी बैठकों और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है।



MP की 3 सीटों पर क्या है गणित?

मध्य प्रदेश की मौजूदा विधानसभा ताकत के हिसाब से राज्यसभा की तीन सीटों में से 2 सीटें भाजपा के और 1 सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है।



लेकिन सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की तीसरी सीट रणनीति को लेकर है। खबरों के मुताबिक, भाजपा क्रॉस वोटिंग और विपक्ष के असंतोष पर नजर रख रही है। वहीं कांग्रेस भी अपनी एक सीट को पक्की मानकर चल रही है और हाईकमान लगातार विधायकों से संपर्क बनाए हुए है।



दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म, कांग्रेस में नई चर्चा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी उन्हें फिर मौका देगी या नया चेहरा सामने आएगा। इधर भाजपा में भी उम्मीदवार चयन को लेकर कई नामों की चर्चा शुरू हो चुकी है। संगठन और केंद्रीय नेतृत्व दोनों स्तर पर मंथन जारी बताया जा रहा है।



दतिया उपचुनाव ने क्यों बढ़ाई सियासी गर्मी?

राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ दतिया विधानसभा उपचुनाव ने भी प्रदेश की राजनीति को हाई प्रोफाइल बना दिया है। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई। दिल्ली की अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के 28 साल पुराने मामले में सजा सुनाई थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी। अब भाजपा और कांग्रेस दोनों इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर चल रही हैं।



नरोत्तम मिश्रा की वापसी का मौका?

पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में सक्रियता बढ़ा दी है। 2023 विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से करीबी मुकाबले में हार मिली थी। अब भाजपा इस उपचुनाव को नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक वापसी के बड़े मौके के रूप में देख रही है। दतिया में भाजपा संगठन लगातार बूथ स्तर की बैठकों और समीकरणों पर काम कर रहा है।



कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी हलचल

कांग्रेस की तरफ से भी दतिया सीट को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने हाल ही में अपने बेटे अंकित भारती के साथ राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद यह संकेत मिलने लगे कि परिवार राजनीतिक पकड़ बनाए रखना चाहता है। वहीं प्रदेश कांग्रेस संगठन में अवधेश नायक का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है। यानी कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार चयन और स्थानीय संतुलन बनाए रखने की है।



चुनाव आयोग और प्रशासन की तैयारी तेज

दतिया उपचुनाव को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कलेक्टर कार्यालय ने राजनीतिक दलों को EVM जांच प्रक्रिया में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। 25 मई से ईवीएम जांच शुरू होने जा रही है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय भी लगातार तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहा है।



किन मुद्दों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

राज्यसभा चुनाव

  • क्रॉस वोटिंग की संभावना
  • कांग्रेस की एकजुटता
  • भाजपा की तीसरी सीट रणनीति
  • केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका

दतिया उपचुनाव

  • नरोत्तम मिश्रा की वापसी
  • कांग्रेस का उम्मीदवार चयन
  • सहानुभूति बनाम संगठन
  • जातीय और स्थानीय समीकरण

2028 का ट्रेलर बन सकता है दतिया?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रहेगा। इसे 2028 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत के टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ भाजपा नरोत्तम मिश्रा की वापसी का संदेश देना चाहती है।



दूसरी तरफ कांग्रेस यह साबित करना चाहेगी कि वह अपनी सीट बचाने और संगठन संभालने की स्थिति में है। उधर राज्यसभा चुनाव में यदि कोई अप्रत्याशित राजनीतिक समीकरण बनता है, तो उसका असर आने वाले समय में मध्य प्रदेश की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।



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