64 स्तंभों पर टिका है एमपी का विरुपाक्ष महादेव मंदिर, खीर से भरती है सूनी गोद

Kaushiki | Aug 25, 2026, 15:20 IST
Ratlam Virupaksha Temple
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के बिलपांक गांव में 64 खंभों पर टिका विरुपाक्ष महादेव मंदिर स्थित है। इस प्राचीन मंदिर में खंभों की गिनती सही न होना और महारुद्र यज्ञ के बाद बटने वाले प्रसादी खीर से संतान प्राप्ति की मान्यता इसे बेहद खास बनाती है।

Ratlam Virupaksha Temple: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक ऐसा स्थान है जहां इतिहास, आस्था और रहस्य का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। यहां बिलपांक गांव में स्थित प्राचीन विरुपाक्ष महादेव मंदिर दशकों से श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।



यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि अपनी अनोखी वास्तुकला और पौरािणक कथाओं के लिए भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसके 64 स्तंभ हैं, जिन्हें गिनना आज भी एक पहेली बना हुआ है।



जब भी कोई श्रद्धालु इन खंभों को गिनने का प्रयास करता है, तो हर बार गिनती बदल जाती है। इसी कारण इसे लोग प्यार से भूलभुलैया वाला मंदिर भी कहते हैं। सावन के पावन महीने और महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां लाखों की संख्या में भक्त बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।



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कब हुआ था इस मंदिर का निर्माण

इतिहासकारों के मुताबिक, इस मूल मंदिर का निर्माण 11वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान परमार काल में हुआ था। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि साल 1964 में यहां भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई की गई थी। इस खुदाई के दौरान एक प्राचीन शिलालेख प्राप्त हुआ था।



शिलालेख के मुताबिक, गुजरात के चालुक्य राजा सिद्धराज जयसिंह ने मालवा विजय हासिल की थी। उन्होंने संवत् 1198 में इस भव्य मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।



यह मंदिर परमार, गुर्जर और चालुक्य शैली का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। पंचायतन शैली में बने इस मंदिर में गर्भगृह, अर्द्ध मंडप और विशाल सभा मंडप मौजूद हैं। सभा मंडप में बने स्तंभ इसके मौर्यकालीन ऐतिहासिक जुड़ाव को भी दर्शाते हैं।



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64 स्तंभों का अनसुलझा रहस्य

मंदिर का पूरा विशाल ढांचा कुल 64 नक्काशीदार स्तंभों पर टिका हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, इन खंभों की सटीक गिनती करना बेहद मुश्किल काम है। कई बार लोग गिनती शुरू करते हैं, लेकिन 64 के आंकड़े तक पहुंचते-पहुंचते भ्रमित हो जाते हैं।



ऐतिहासिक ग्रंथों और पुरातत्व अभिलेखों के जरिए ही 64 खंभों की जानकारी सामने आई है। पूरे भारत में विरुपाक्ष महादेव के केवल दो ही अति प्राचीन मंदिर स्थित हैं।



पहला मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु (चेन्नई) में है। दूसरा मध्य प्रदेश के रतलाम में स्थित है। इसी दुर्लभता के कारण रतलाम के इस गांव में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।



धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सौ किलोमीटर दूर होने के बावजूद इस मंदिर का सीधा कनेक्शन उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से है। मंदिर प्रांगण में एक गुप्त गुफा मौजूद है, जो सीधे महाकाल मंदिर के प्रांगण में खुलती है। सुरक्षा कारणों से अब इसे बंद कर दिया गया है। मंदिर में स्थापित एक खास खंभा इसके मौर्यकालीन इतिहास को दर्शाता है।



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महारुद्र यज्ञ और खीर के प्रसाद की मान्यता

विरुपाक्ष महादेव मंदिर अपनी धार्मिक परंपराओं और चमत्कारों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां हर साल महारुद्र यज्ञ का बहुत धूमधाम से आयोजित किया जाता है।



यज्ञ के पूर्ण होने पर विशेष रूप से तैयार की गई महाप्रसादी खीर बांटी जाती है। स्थानीय लोक मान्यता है कि जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिल पा रहा है, उन्हें यह प्रसादी खीर ग्रहण करने से संतान की प्राप्ति होती है।



इस प्रसाद को लेने के लिए न केवल रतलाम, बल्कि आसपास के कई राज्यों से निसंतान दंपत्ति यहां पहुंचते हैं। बाबा भोलेनाथ का ये आशीर्वाद वर्षों से लोगों की आस्था को और गहरा बनाता चला आ रहा है।



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शिवभक्तों का मुख्य केंद्र बना बिलपांक

महाशिवरात्रि और सावन मास के प्रत्येक सोमवार को यहां अलौकिक माहौल रहता है। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। हर कोई बाबा विरुपाक्ष के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहता है।



पुराना इतिहास और स्थापत्य कला इस मंदिर को एक अलग पहचान दिलाती है। मध्यकाल की यह महान विरासत आज भी अपने पूरे गौरव के साथ खड़ी है। अगर आप भी इतिहास और अध्यात्म में रुचि रखते हैं, तो रतलाम का यह चमत्कारी विरुपाक्ष मंदिर एक बार अवश्य देखने लायक है।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



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