MP में भर्ती निकली, मेरिट बनी, चॉइस फिलिंग भी हुई, लेकिन जॉइनिंग का इंतजार खत्म नहीं! 770 अभ्यर्थियों की नियुक्ति कब?
मध्यप्रदेश में मार्च 2026 में निकाली गई भर्ती
ऐसे में परेशान अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्हें नियुक्ति कब मिलेगी? और मिलेगी भी या नहीं? ये पूरा मामला मध्यप्रदेश में मार्च 2026 में निकाली गई संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती से जुड़ा है। भर्ती के लिए आवेदन हुए, मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी, उम्मीदवारों से जिलों की चॉइस फिलिंग भी करवा ली गई, लेकिन अब तक फाइनल अलॉटमेंट लेटर जारी नहीं हुए हैं।
पहले पूरा मामला समझिए
दरअसल, भू-अभिलेख प्रबंधन समिति यानी MPLRS की तरफ से 770 पदों पर संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) की भर्ती शुरू की गई थी। इसके लिए 5 मार्च 2026 से आवेदन शुरू करने का आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जारी किया था। इस भर्ती की सबसे खास बात ये थी कि इसमें कोई लिखित परीक्षा नहीं होनी थी। उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर किया जाना था। CPCT स्कोरकार्ड में मिले अंकों और हिंदी टाइपिंग क्वालिफिकेशन की मेरिट के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को चुना जाना था। पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए एमपी ऑनलाइन के चयन पोर्टल की मदद ली गई। आवेदन से लेकर चयन तक की प्रक्रिया इसी पोर्टल के माध्यम से पूरी होनी थी। मेरिट के आधार पर चयनित उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए भी बुलाया गया था।
चॉइस फिलिंग कब हुई?
उम्मीदवारों का दावा है कि एमपी ऑनलाइन के चयन पोर्टल पर 25 मई 2026 से 10 जून 2026 तक सभी सफल उम्मीदवारों से जिलों की चॉइस फिलिंग करवाई गई थी। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि चॉइस फिलिंग के 15 दिनों के अंदर फाइनल अलॉटमेंट लेटर जारी कर दिए जाएंगे। यानी उम्मीदवारों को उम्मीद थी कि जल्द ही उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन हैरानी की बात ये है कि चॉइस फिलिंग के चार महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। इसके बावजूद न तो फाइनल अलॉटमेंट लेटर जारी किए गए हैं और न ही विभाग की तरफ से देरी की कोई स्पष्ट वजह बताई जा रही है।
चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया के बाद नियुक्ति में देरी क्यों?
अब सवाल ये उठता है कि जब मेरिट के आधार पर चयन होना था और चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तो आखिर नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हो रही है? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले युवाओं का कहना है कि उन्हें इस नौकरी से काफी उम्मीदें थीं। कई उम्मीदवारों ने इस नौकरी के भरोसे दूसरी नौकरी तलाशना भी बंद कर दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि जल्द नियुक्ति मिलेगी और उनकी आर्थिक परेशानियां दूर होंगी। लेकिन महीनों बीतने के बाद भी भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों के पास आय का कोई निश्चित साधन नहीं है, उनकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
द सूत्र ने की अभ्यर्थी पुष्पेंद्र द्विवेदी से बात
इस मामले में द सूत्र ने अभ्यर्थी पुष्पेंद्र द्विवेदी से बात की। उनका कहना है कि विभाग को कम से कम ये तो स्पष्ट करना चाहिए कि नियुक्ति में देरी आखिर किस वजह से हो रही है। पुष्पेंद्र के मुताबिक, अभ्यर्थी तीन से चार बार ज्ञापन भी दे चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में इतना समय क्यों लग रहा है। उम्मीदवारों का सवाल है कि जब चयन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और जिलों की चॉइस फिलिंग भी करवा ली गई है, तो फिर अलॉटमेंट लेटर जारी करने में क्या परेशानी है?
विभाग ने क्या कहा?
इस पूरे मामले में द सूत्र ने विभाग की जॉइंट डायरेक्टर नमिता खरे से बात की। उन्होंने बताया कि 20 नवंबर तक भर्ती की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। हालांकि, जब उनसे ये जानने की कोशिश की गई कि पूरी प्रक्रिया में इतना लंबा वक्त आखिर क्यों लगा, तो उन्होंने इसकी कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई।
दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग की तरफ से हर बार इसी तरह के आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन नियुक्ति का इंतजार खत्म नहीं होता। अब उम्मीदवारों की नजर 20 नवंबर की तारीख पर टिकी है। उनका कहना है कि अगर इस बार भी नियुक्ति नहीं दी गई, तो वे भोपाल आकर अपनी बात रखेंगे।