मंत्रालय की फाइलों में उलझा भर्ती सुधार, पुरानी व्यवस्था के भरोसे निकली नई वैकेंसी
ऐसे समझें पूरे मामले को
- 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
- भर्ती फिर कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से होगी।
- नई भर्ती व्यवस्था का प्रस्ताव अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
- 95 नए पदों को वित्त विभाग की स्वीकृति मिल चुकी है।
- प्रस्तावित व्यवस्था से पुलिस के साथ अन्य यूनिफॉर्म सेवाओं की भर्ती भी होनी थी।
- ईएसबी पहले भी भर्ती विवादों को लेकर चर्चा में रह चुका है।
मध्यप्रदेश में भर्ती व्यवस्था को बदलने का बड़ा खाका तैयार किया गया, नए पद स्वीकृत हुए, कार्यालय की तैयारी भी शुरू हुई और अलग व्यवस्था बनाने की कवायद भी आगे बढ़ी। लेकिन जब भर्ती का वक्त आया तो सरकार को फिर पुरानी व्यवस्था का ही सहारा लेना पड़ा। 9,662 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, लेकिन जिस सुधार मॉडल को भविष्य की जरूरत बताया गया था, वह अब भी मंत्रालय की फाइलों में रास्ता तलाश रहा है।
नई व्यवस्था का ब्लूप्रिंट तैयार, लेकिन लागू नहीं
भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और विशेषज्ञ बनाने के लिए अलग व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
इसके लिए विस्तृत ड्राफ्ट बनाया गया और संबंधित विभागों के बीच प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। इसके बावजूद अंतिम प्रशासनिक निर्णय अब तक सामने नहीं आ सका।
जब भर्ती निकली तो फिर पुराना सिस्टम ही बना विकल्प
सरकार ने हाल ही में 9,662 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इनमें आरक्षक, आरक्षक चालक, एएसआई (क्लेरिकल), सूबेदार (क्लेरिकल) और सब इंस्पेक्टर के पद शामिल हैं। उम्मीद थी कि भर्ती नई व्यवस्था के तहत होगी, लेकिन प्रक्रिया फिर कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से ही कराई जाएगी।
फाइल आगे बढ़ी, मंजूरी अंतिम पड़ाव पर अटक गई
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव वित्त, विधि-विधायी और सामान्य प्रशासन विभाग से होकर आगे बढ़ा। 95 नए पदों को स्वीकृति भी मिल चुकी है और विभागीय आपत्तियों का जवाब भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद अंतिम कैबिनेट मंजूरी नहीं मिलने से पूरी योजना अमल में नहीं आ सकी।
अधिकारियों से जवाब मांगा, लेकिन तस्वीर साफ नहीं हुई
जानकारी के अनुसार एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से देरी की वजह पूछी हालांकि स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका। इसके बाद रिक्त पदों पर भर्ती में देरी न हो, इसलिए मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया गया।
पुरानी व्यवस्था पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
कर्मचारी चयन मंडल पहले भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों में रहा है। आरक्षक भर्ती परीक्षा-2023 में कथित फर्जी अभ्यर्थियों और आधार ऑथेंटिकेशन से जुड़े मामलों में कई एफआईआर दर्ज हुई थीं। ऐसे में अलग विशेषज्ञ व्यवस्था बनने से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी।
सिर्फ पुलिस नहीं, कई विभागों को मिलना था फायदा
प्रस्तावित व्यवस्था केवल पुलिस भर्ती तक सीमित नहीं थी। योजना थी कि जेल, वन, परिवहन, आबकारी, होमगार्ड और अन्य यूनिफॉर्म सेवाओं की भर्ती भी एक ही व्यवस्था से कराई जाए, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो सके।
दूसरे राज्यों का मॉडल तैयार, एमपी में इंतजार जारी
तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है। मध्यप्रदेश ने भी इसी मॉडल पर तैयारी की, लेकिन अंतिम मंजूरी के अभाव में पूरी कवायद अभी तक लागू नहीं हो सकी।
सबसे बड़ा सवाल
जब पूरी तैयारी हो चुकी थी, तो नई भर्ती व्यवस्था आखिर लागू क्यों नहीं हो सकी? क्या निर्णय प्रक्रिया की धीमी रफ्तार भर्ती सुधारों पर भारी पड़ रही है, या फिर विभागीय समन्वय अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है?
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