मध्य प्रदेश में सुस्त रेरा का एक्शन, केस की सुनवाई की रफ्तार देश में सबसे धीमी
News in Short
एमपी रेरा में 10,421 शिकायतों में 4,586 अब भी लंबित।
44% शिकायतें लंबित, एमपी में समाधान दर सिर्फ 56%।
रेरा के पास पजेशन में देरी की शिकायतें सबसे ज्यादा।
सुनवाई में महीनों की देरी, शिकायतकर्ता परेशान।
रेरा की कार्रवाई में देश के 10 राज्यों से पीछे है एमपी।
News in Detail
मध्य प्रदेश में आवासीय कॉलोनियों और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग का तेजी से विस्तार हुआ है। आवासीय प्रोजेक्ट्स के साथ ही होम बायर्स की शिकायतें भी बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी सुनवाई की गति बेहद धीमी है।
देश के 21 बड़े राज्यों के मुकाबले होम बायर्स की शिकायतों के समाधान में मध्य प्रदेश काफी पिछड़ गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के आंकड़े भी मध्य प्रदेश में रेरा की सुनवाई की सुस्ती उजागर कर रहे हैं। रेरा तक पहुंच रही शिकायतों के निपटारे में लग रहे लंबे वक्त से होम बायर्स परेशान हैं वहीं कॉलोनाइजर और बिल्डर्स में भी असंतोष है।
मध्य प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण में फिलहाल 5904 हाउसिंग प्रोजेक्ट रजिस्टर हैं। इन प्रोजेक्ट्स में हाउसिंग यूनिट्स की संख्या 9,42,681 है। इन प्रोजेक्ट्स में आवास बुक कराने वालों ने विभिन्न वजहों के चलते रेरा की शरण ली है।
रेरा में की गई ऐसी शिकायतों की संख्या 10,421 है। ये शिकायतें निर्धारित अवधि में आवास का पजेशन न देना, अनुबंध से ज्यादा कीमत की वसूली के अलावा दूसरी शर्तों के उल्लंघन से संबंधित हैं।
पजेशन की शिकायत सबसे ज्यादा
आवासीय प्रोजेक्ट में बुकिंग कराने वालों की सबसे ज्यादा शिकायतें निर्धारित अवधि में पजेशन न देने की हैं। ज्यादातर बिल्डर बुकिंग के दौरान लुभावने वायदे कर होम बायर्स से अनुबंध कराते हैं। इसके लिए लोगों से तगड़ा अमाउंट भी जमा करा लिया जाता है, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी पजेशन नहीं देते।
इस स्थिति में बैंक लोन के सहारे मकान खरीदने वाले होम बायर्स को ईएमआई का दोहरा भार उठाना पड़ता है। बीते सालों में भोपाल में एजी-8 समूह के आवासीय प्रोजेक्ट के अनगिनत मामले रेरा पहुंचे हैं। इनमें भी बिल्डर द्वारा निर्माण पूरा न करने और पजेशन में देरी की शिकायतों की भरमार है।
रेरा की सुनवाई में देरी से परेशानी
मध्य प्रदेश रेरा में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से संबंधित 10421 शिकायत दर्ज की गई हैं। शिकायतों का ये डेटा 27 अप्रैल 2026 तक का है। सुनवाई के बाद रेरा ने इनमें से 5835 शिकायतों का निराकरण किया है। वहीं 4586 शिकायत अब भी विचाराधीन हैं।
यानी रेरा के पास अब भी 44 फीसदी शिकायतें लंबित हैं और शिकायतकर्ता निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। इनमें कई शिकायतें एक से तीन साल पुरानी भी हैं। जबकि देश के अन्य बड़े राज्यों में रेरा के पास आने वाली शिकायतों के समाधान की रफ्तार मध्य प्रदेश से कहीं बेहतर है।
अन्य राज्यों में समाधान का प्रतिशत
मध्य प्रदेश में रेरा की सुनवाई की स्थिति अन्य राज्यों के मुकाबले में कैसी है इसे केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के आंकड़ों से समझ सकते हैं। उत्तर प्रदेश रेरा में 60021 शिकायतों में से 52047 का समाधान किया गया है। यानी 87 फीसदी शिकायतों का निराकरण किया गया है।
वहीं महाराष्ट्र रेरा ने 34931 शिकायतों में से 28700 यानी 82 प्रतिशत का समाधान हुआ है। वहीं हरियाणा- गुरुग्राम में 12997 शिकायतों में से सबसे ज्यादा 93 फीसदी से अधिक यानी 16821 शिकायत सुलझाई गई हैं। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश रेरा दर्ज हुई 10421 शिकायतों में से केवल 5835 का ही समाधान कर सका है। जो कि केवल 44 फीसदी ही हैं।
हाउसिंग शिकायतों के निराकरण के आंकड़े...
| राज्य | हाउसिंग प्रोजेक्ट | दर्ज शिकायतें | निराकरण की स्थिति | निराकरण दर (%) |
| उत्तर प्रदेश | 3,464 | 60,021 | 52,047 | 86.71% |
| महाराष्ट्र | 51,513 | 34,931 | 28,700 | 82.16% |
| हरियाणा-गुरुग्राम | 825 | 17,976 | 16,821 | 93.57% |
| कर्नाटक | 4,518 | 12,997 | 10,768 | 82.85% |
| मध्य प्रदेश | 5,904 | 10,421 | 5,835 | 55.99% |
| हरियाणा | 841 | 7,860 | 7,032 | 89.47% |
| राजस्थान | 3,827 | 7,011 | 5,155 | 73.53% |
| पंजाब | 1,365 | 6,019 | 4,099 | 68.10% |
| ओडिशा | 1,259 | 5,644 | 4,643 | 82.26% |
| गुजरात | 7,568 | 5,530 | 3,860 |
देश के 21 राज्यों में हाउसिंग प्रोजेक्ट और रेरा में दर्ज शिकायतों की स्थिति-
- प्रोजेक्ट्स की संख्या: 1,01,009
- शिकायतों की संख्या: 1,88,342
- निराकृत केसों की स्थिति: 1,55,633
शिकायतकर्ता चक्कर लगाने मजबूर
मध्य प्रदेश रेरा में शिकायतों के निपटारे में सबसे ज्यादा समय लग रहा है। शिकायत दर्ज कराने के बाद सुनवाई में महीनों बीत रहे हैं। इस वजह से शिकायतकर्ता को सुनवाई के लिए ही दर्जनों चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ऐसे चक्कर लगाने और परेशान होने की वजह से रेरा में शिकायत करने वालों का मोहभंग होने लगा है। वहीं बिल्डर को अपना पक्ष रखने के लिए बार- बार मौके दिए जा रहे हैं। यह भी सुनवाई को लंबा खींच रहा है।
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