एमपी के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत: रिटायरमेंट के बाद मिलेगा प्रमोशन
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया में बड़ी चूक सामने आई है।
- 30 जून 2026 को रिटायर हुए कर्मचारियों के नाम प्रमोशन आदेश में छूट गए।
- अब सरकार प्रोफार्मा प्रमोशन देकर इनकी पेंशन बढ़ाने की तैयारी में है।
- इस फैसले से 20 हजार से ज्यादा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
- सरकार आगामी डीपीसी के लिए एपीआर के नियम भी साफ कर रही है।
पदोन्नति में हुई बड़ी चूक
मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया की एक बड़ी प्रशासनिक चूक अब सामने आई है। यहां 30 जून 2026 को रिटायर हुए कई कर्मचारियों के नाम डीपीसी (Departmental Promotion Committee) में शामिल थे। उनके मामलों पर विचार भी हुआ था। वहीं, जब अंतिम प्रमोशन आदेश जारी हुआ तो इन कर्मचारियों के नाम गायब मिले। इस वजह से ये कर्मचारी पदोन्नति के लाभ से वंचित रह गए। अब सरकार इस गलती को सुधारने की तैयारी में जुट गई है।
मंत्रालय में भी फंसे नाम
3 जुलाई को विभागीय पदोन्नति समिति की एक अहम बैठक हुई थी। इसमें 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले पात्र कर्मचारियों के नामों पर विचार किया गया। इसके बावजूद अंतिम आदेश में इनके नाम शामिल नहीं हो पाए। मंत्रालय में भी ऐसे 14 अधिकारी और कर्मचारी हैं। ये सभी 30 जून को रिटायर हुए थे। इनका जिक्र प्रमोशन आदेश में कहीं नहीं मिला। इससे सवाल उठ रहा है कि डीपीसी में नाम पर विचार होने के बाद भी आदेश में जगह क्यों नहीं मिली।
प्रोफार्मा प्रमोशन क्या है
अब सरकार इन कर्मचारियों को प्रोफार्मा पदोन्नति देने जा रही है। इसमें कर्मचारी को पदोन्नत पद का असली प्रभार नहीं मिलता। ना ही उसे नया पदनाम दिया जाता है। वहीं, पेंशन तय करने के लिए उस पद के वेतनमान का फायदा जरूर मिलता है। यानी पद नहीं मिलेगा, मगर पेंशन का लाभ जरूर मिलेगा। इस व्यवस्था से हजारों रिटायर कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
पेंशन कैसे बढ़ेगी
सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग मिलकर इस पूरी चूक को सुधारेंगे। पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पदोन्नत पद के आधार पर काल्पनिक वेतन तय किया जाएगा। इसी आधार पर उनका पेंशन भुगतान आदेश यानी पीपीओ (Pension Payment Order) संशोधित होगा। इससे पेंशन राशि में सीधी बढ़ोतरी होगी। साथ ही पदोन्नति से जुड़े दूसरे वित्तीय लाभ भी मिलेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह गणना पर आधारित होगी।
फिर होगी डीपीसी
सरकार ने आगामी डीपीसी की पात्रता तय करने के लिए एपीआर (Annual Performance Report) के साल भी स्पष्ट कर दिए हैं। साल 2026 में 2024-25 के लिए होने वाली डीपीसी में 2020-21 के रिक्त पद और उसी साल के एपीआर आधार बनेंगे। सितंबर से नवंबर के बीच होने वाली डीपीसी में दिसंबर 2026 तक के पदों के लिए 2019-20 से 2023-24 तक के पांच साल के एपीआर देखे जाएंगे। यदि किसी साल डीपीसी नहीं हुई हो तो अगली बैठक में पहले बकाया वर्षों की सूची बनेगी। सितंबर अक्टूबर में प्रस्तावित डीपीसी इसी नई व्यवस्था के तहत होगी।
35-36 साल सेवा वाले कर्मचारी
1990 के दशक में सरकारी सेवा में आए बड़ी संख्या में कर्मचारी अब रिटायर हो रहे हैं। इनमें से कई ने 35 से 36 साल की सेवा पूरी की है। ये सभी जून 2026 में सेवानिवृत्त हुए हैं। इनमें कई कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिनके नाम पदोन्नति प्रक्रिया में विचाराधीन थे। लेकिन आदेश में नाम न आने से स्थिति साफ नहीं थी। सरकार के इस नए कदम से इनकी उलझन अब दूर होगी।
आगे क्या होगा
सरकार का यह कदम प्रदेश के 20 हजार से ज्यादा रिटायर कर्मचारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। प्रोफार्मा प्रमोशन से इन कर्मचारियों की पेंशन में सुधार होगा। साथ ही डीपीसी की नई व्यवस्था आगे की प्रक्रिया को भी आसान बनाएगी। कर्मचारी संगठन इस फैसले पर विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। जल्द ही इस पर औपचारिक आदेश जारी होने की उम्मीद है।
FAQ
- प्रोफार्मा प्रमोशन क्या होता है?
प्रोफार्मा प्रमोशन में कर्मचारी को पदोन्नत पद का वास्तविक प्रभार या पदनाम नहीं मिलता, लेकिन पेंशन निर्धारण के लिए उस पद के वेतनमान का लाभ जरूर दिया जाता है, जिससे पेंशन राशि बढ़ जाती है।
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