एक्शन मोड में GAD: संविदा कर्मचारियों को लाभ मिले या नहीं? विभागों से मांगी संविदा नीति 2023 की स्टेटस रिपोर्ट

Amresh Kushwaha | Mar 26, 2026, 13:15 IST
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मध्य प्रदेश सरकार ने 2023 की संविदा नीति को सही तरीके से लागू न करने को लेकर सभी विभागों को अल्टीमेटम दिया है। सरकार ने अब इन विभागों से 7 अहम बिंदुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

मध्यप्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर राज्य सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। 22 जुलाई 2023 को घोषित की गई संविदा नीति को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।



सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने प्रदेश के सभी विभागों, निगम-मंडलों और सरकारी संस्थाओं को अल्टीमेटम देते हुए पूछा है कि क्या कर्मचारियों को उनके हक मिल रहे हैं या सुधार के दावे सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं?



हर कदम पर सरकार की पैनी नजर

सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि उनके अधीन आने वाली संस्थाओं और परियोजनाओं में संविदा नीति 2023 के प्रावधानों को जमीन पर उतारा गया है या नहीं।



इसके लिए एक विशेष प्रपत्र (Format) जारी किया गया है। इसमें विभागों को बिंदुवार जानकारी देनी होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी घोषणाओं का लाभ अंतिम कर्मचारी तक पहुंच रहा है।



कर्मचारियों का भविष्य और 2023 का वह वादा

प्रदेश में वर्तमान में लगभग 1.5 से दो लाख संविदा कर्मचारी अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं। गौरतलब है कि 22 जुलाई 2023 को सरकार ने एक ऐतिहासिक नीति लागू की थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य संविदा कर्मियों को नियमित कर्मचारियों के समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था।



पहले निगमों और मंडलों को इसे अपने स्तर पर लागू करने की छूट दी गई थी, लेकिन अब सरकार खुद इसकी समीक्षा कर रही है। यदि किसी विभाग ने इसे लागू नहीं किया है, तो उन्हें इसका ठोस कारण भी बताना होगा।



कागजों में वेतन, पर सुविधाओं का क्या?

मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर के मुताबिक, भले ही संविदा नीति बन गई है, लेकिन उसका पूरा फायदा अभी भी कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाया है।





कई विभागों ने सिर्फ न्यूनतम वेतन तय करके अपना काम खत्म समझ लिया है। जबकि नीति में वेतन समकक्षता, ग्रेच्युटी (Gratuity) और अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) जैसे बड़े प्रावधान थे। अब सरकार की नई सख्ती से उम्मीद जगी है कि कर्मचारियों को उनका असली हक मिल पाएगा।



इन 7 बिंदुओं पर अटकी है विभागों की गर्दन

सरकार ने स्पष्ट तौर पर 7 प्रमुख सवालों के जवाब मांगे हैं, जो कर्मचारियों के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं:



  1. सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के पदों में संविदा कर्मियों को आरक्षण मिल रहा है या नहीं?
  2. सेवा के दौरान दुखद मृत्यु होने पर क्या अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान लागू हुआ?
  3. क्या रिटायरमेंट या सेवा समाप्ति पर ग्रेच्युटी (उपादान) भुगतान की व्यवस्था की गई है?
  4. अर्जित अवकाश (EL) और आकस्मिक अवकाश (CL) की पात्रता दी जा रही है?
  5. क्या नए अनुबंधों (Contracts) का निष्पादन सही प्रक्रिया से हो रहा है?
  6. संविदा पदों की नियमित पदों से समकक्षता (Equivalence) तय की गई?
  7. सेवा शर्तों में सुधार के अन्य प्रावधानों का क्या स्टेटस है?

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