स्कूल शिक्षा इंडेक्स में पिछड़ा एमपी: PGI रैंकिंग में खिसका नीचे, देखे रैकिंग
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा में राष्ट्रीय रैंकिंग में और नीचे खिसक गया है। परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 में एमपी स्कूल शिक्षा विभागका स्कोर 574.1 से घटकर 566.8 रह गया है। एमपी अब 36 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 27वें स्थान पर है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्य भी इस बार एमपी से आगे निकल गए हैं। राज्य ने आकांक्षी-1 ग्रेड बरकरार रखा है, जो निचले-मध्यम स्तर को दर्शाता है।
भोपाल में एक बार फिर स्कूली शिक्षा को लेकर निराश करने वाली खबर आई है। मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा रैंकिंग में और नीचे खिसक गया है। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने हाल ही में परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI – Performance Grading Index) 2.0 का 2025-26 संस्करण जारी किया है।
एमपी का स्कोर कितना घटा
इस रिपोर्ट में मध्य प्रदेश का स्कोर पिछले साल के मुकाबले घट गया है। राज्य का कुल स्कोर 2024-25 में 574.1 था, जो अब घटकर 566.8 रह गया है। यानी एक साल में 7.3 अंकों की गिरावट आई है। हालांकि इस गिरावट के बावजूद मध्य प्रदेश ने आकांक्षी-1 (AKANSHI-1) ग्रेड बरकरार रखा है। यह ग्रेड राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निचले-मध्यम स्तर को दर्शाता है।
पीजीआई रिपोर्ट स्कूल शिक्षा को छह प्रमुख डोमेन के आधार पर परखती है। इनमें लर्निंग आउटकम, एक्सेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, इक्विटी, गवर्नेंस और टीचर से जुड़े संकेतक शामिल हैं। इस बार मध्य प्रदेश 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 27वें स्थान पर है। यह रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर निचले क्वार्टाइल में आती है।
टॉप और बॉटम राज्यों की तस्वीर
सिर्फ बिहार, त्रिपुरा, झारखंड, मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय ही मध्य प्रदेश से नीचे रहे। यानी कुल 9 राज्य ही एमपी से पीछे हैं, बाकी सभी राज्य आगे निकल चुके हैं।
टॉप परफॉर्मर राज्यों और मध्य प्रदेश के बीच फासला काफी बड़ा है। इस बार चंडीगढ़ ने 766.0 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद पंजाब (723.6), केरल (716.8), दिल्ली (712.2) और महाराष्ट्र (654.6) का नंबर आता है। मध्य प्रदेश पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से करीब 88 अंक पीछे है।
पड़ोसी राज्यों से तुलना
पड़ोसी राज्यों की बात करें तो गुजरात का स्कोर 604.2 रहा। राजस्थान का स्कोर 589.5, उत्तर प्रदेश का 579.9 और छत्तीसगढ़ का 578.9 रहा। खास बात यह है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे सीमावर्ती राज्य भी इस बार मध्य प्रदेश से आगे निकल गए हैं।
डोमेन के हिसाब से हाल
डोमेन के हिसाब से देखें तो मध्य प्रदेश का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। डोमेन-1 में 84.9, डोमेन-2 में 54.7 और डोमेन-3 में 70.74 अंक मिले। डोमेन-4 में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा, यहां राज्य को 223.6 अंक मिले। डोमेन-5 में 66.6 और डोमेन-6 में 66.3 अंक हासिल हुए।
राज्य की सबसे मजबूत परफॉर्मेंस डोमेन-4 में रही, जहां उसे उत्तम-1 (UTTAM-1) ग्रेड मिला। डोमेन-5 में भी प्रचेष्टा-1 (PRACHESTA-1) ग्रेड हासिल हुआ। लेकिन डोमेन-2 और डोमेन-3 के कमजोर नतीजों ने राज्य के कुल स्कोर को नीचे खींच दिया।
अधिकारियों के मुताबिक ये दोनों डोमेन गवर्नेंस प्रोसेस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्रों को कवर करते हैं। इन क्षेत्रों में सुधार की रफ्तार काफी धीमी रही है। इस साल स्कोर में गिरावट दर्ज करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश भी शामिल है, जबकि यह गिरावट सिर्फ कुछ ही राज्यों में देखी गई।
इसके उलट आंध्र प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और केरल ने इस बार अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। शिक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रेंड बताता है कि मध्य प्रदेश की प्रगति आउटकम, इक्विटी और क्वालिटी के मामले में राष्ट्रीय रफ्तार के साथ कदम नहीं मिला पा रही।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन नतीजों के बाद कमजोर डोमेन का विस्तृत ऑडिट होना चाहिए। साथ ही सुधारों को तेजी से लागू करने की जरूरत है। सरकारी अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
पीजीआई का ग्रेडिंग सिस्टम
पीजीआई 2.0 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 1000 अंकों में से मिले स्कोर के आधार पर दस ग्रेड में बांटता है। सबसे ऊंचा ग्रेड उत्कर्ष (Utkarsh) है, जो 941 से 1000 अंकों के बीच आता है। इसके बाद उत्तम-1 (881-940), उत्तम-2 (821-880) और उत्तम-3 (761-820) ग्रेड आते हैं।
इसके नीचे प्रचेष्टा-1 (701-760), प्रचेष्टा-2 (641-700) और प्रचेष्टा-3 (581-640) ग्रेड हैं। सबसे निचले स्तर पर आकांक्षी-1 (521-580), आकांक्षी-2 (461-520) और आकांक्षी-3 (401-460) ग्रेड आते हैं। मध्य प्रदेश फिलहाल आकांक्षी-1 ग्रेड में है, जो निचले-मध्यम स्तर को दर्शाता है।
ये ग्रेड लर्निंग आउटकम, एक्सेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, गवर्नेंस, इक्विटी और टीचर एजुकेशन जैसे अहम क्षेत्रों में स्कूल शिक्षा की समग्र गुणवत्ता को दर्शाते हैं। ऊंचा ग्रेड बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और राष्ट्रीय मानकों की बेहतर उपलब्धि का संकेत देता है।
आगे क्या करना होगा
मध्य प्रदेश के लिए यह रिपोर्ट कई मायनों में चिंता की बात है। राज्य न सिर्फ पिछले साल से पीछे गया है, बल्कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों से भी पिछड़ गया है। दोनों राज्य कभी शिक्षा रैंकिंग में मध्य प्रदेश के करीब माने जाते थे। अब यह फासला साफ नजर आ रहा है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि सिर्फ आंकड़ों पर चर्चा से बात नहीं बनेगी। गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कमजोर डोमेन में ठोस कदम उठाने होंगे। तभी मध्य प्रदेश आने वाले सालों में इस सूची में ऊपर चढ़ सकेगा।
FAQ
- स्कूल शिक्षा इंडेक्स में मध्य प्रदेश की रैंक क्या है?
मध्य प्रदेश परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 में 36 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 27वें स्थान पर है। राज्य का स्कोर घटकर 566.8 रह गया है। यह रैंकिंग निचले क्वार्टाइल में आती है। - क्या राजस्थान और छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से आगे हैं?
हां, इस बार राजस्थान का स्कोर 589.5 और छत्तीसगढ़ का स्कोर 578.9 रहा। दोनों राज्य मध्य प्रदेश (566.8) से आगे हैं। - पीजीआई इंडेक्स में सबसे ऊपर कौन सा राज्य है?
चंडीगढ़ 766.0 अंकों के साथ 2025-26 की पीजीआई रैंकिंग में सबसे ऊपर है। इसके बाद पंजाब, केरल, दिल्ली और महाराष्ट्र का नंबर आता है।
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