स्कूल मेंटेनेंस में 149 करोड़ का घोटाला: विधानसभा से छिपाई गई जांच रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 149 करोड़ रुपए का मेंटेनेंस घोटाला सामने आया है।
- यह घोटाला सबसे पहले मैहर जिले के रामनगर ब्लॉक में पकड़ा गया था।
- जांच रिपोर्ट विधानसभा और मंत्री तक भेजी ही नहीं गई थी।
- अब लोक शिक्षण संचालनालय ने 40 अफसरों को नोटिस जारी किए हैं।
- 20 ब्लॉक के अफसर अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मेंटेनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला करीब 149 करोड़ रुपए का है। लोक शिक्षण संचालनालय ने अब इसमें बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में तीन अफसरों को मुख्य दोषी माना गया है।
मैहर से शुरू हुआ मामला
पूरा मामला सबसे पहले मैहर जिले में सामने आया। यहां रामनगर विकासखंड में 4.37 करोड़ रुपए का घोटाला पकड़ा गया। स्कूलों की मरम्मत के नाम पर यह रकम खर्च दिखाई गई। हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों के भवन मरम्मत के लिए पैसा दिया गया।
पार्किंग रोड और साइकिल स्टैंड जैसे छोटे काम भी दिखाए गए। कलेक्टर रानी बाटड के आदेश पर जांच समिति बनाई गई थी। समिति ने पाया कि 18 से ज्यादा स्कूलों में कोई असली काम नहीं हुआ। फिर भी करोड़ों रुपए अलग अलग फर्मों को दे दिए गए।
तीन दिन में सप्लाई पूरी
जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। पैसा आने से पहले ही फर्मों ने सामान की सप्लाई दिखा दी थी। 17 दिसंबर 2025 को इस काम को मंजूरी मिली थी। अगले ही दिन 18 दिसंबर को जिलों में सप्लाई शुरू हो गई। 30 दिसंबर से पहले पूरा काम दिखा दिया गया।
भोपाल की फर्म इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मटेरियल सप्लायर को भी भुगतान हुआ। सतना की महाकाल ट्रेडर्स और मैहर की रुद्र एंटरप्राइजेज के खाते में भी पैसा पहुंचा। जांच में सामने आया कि यह घोटाला सिर्फ मैहर तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के 60 से ज्यादा ब्लॉक में यही खेल हुआ है।
जांच रिपोर्ट पर लीपापोती
यह मामला बजट सत्र के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा में उठा था। इसके बाद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जांच के आदेश दिए। राज्य शैक्षिक शिक्षा अभियान की अपर परियोजना संचालक नंदना भल्लोसे को जांच सौंपी गई। उनके साथ संयुक्त संचालक मनीष वर्मा और आलोक खरे भी कमेटी में शामिल थे।
इस तीन सदस्यीय कमेटी ने जून के आखिरी हफ्ते में रिपोर्ट सौंप दी थी। लेकिन यह रिपोर्ट न तो विधानसभा में रखी गई और न ही मंत्री तक पहुंची। वित्त विभाग ने इस रिपोर्ट को दबाए रखा। बाद में स्कूल शिक्षा विभाग ने यह रिपोर्ट लोक शिक्षण संचालनालय को भेजी। तभी से संचालनालय ने कार्रवाई शुरू की है।
40 अफसरों को नोटिस जारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने अब तक 40 अफसरों को नोटिस भेजा है। इनमें वित्त अधिकारी राजेश मौर्य का नाम सबसे ऊपर है। रिटायर्ड उप संचालक पीके सिंह बघेल को भी नोटिस मिला है। तृतीय श्रेणी कर्मचारी योगेश रावत को भी मुख्य दोषी माना गया है। इनके अलावा 40 डीडीओ (Drawing and Disbursing Officer) यानी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है।
इन सभी से पूछा गया है कि जांच रिपोर्ट मंत्री तक क्यों नहीं भेजी गई। हालांकि मध्य प्रदेश के 60 से ज्यादा ब्लॉक में यह घोटाला हुआ है। इनमें से सिर्फ 40 ब्लॉक के अफसरों को ही नोटिस मिला है। बाकी 20 ब्लॉक के अफसर अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं।
निर्देशों के मुताबिक हो रही कार्रवाई
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि शासन से मिले निर्देशों के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि सभी संबंधित अफसरों और कर्मचारियों को नोटिस दिए जा चुके हैं। आगे जो निर्देश मिलेंगे, उसी हिसाब से अगली कार्रवाई की जाएगी।
जिलों में जांच अभी बाकी
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक अहम सुझाव भी दिया है। कमेटी ने लिखा कि इस मामले में कई लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही जिला स्तर पर भी अलग जांच की जरूरत बताई गई।
जिला स्तरीय जांच के जिम्मेदार अधिकारी ने भी माना कि घोटाला जिला स्तर पर हुआ है। उनका कहना है कि इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए। लेकिन अब तक न तो जिला स्तर पर जांच शुरू हुई है। न ही उच्च स्तरीय जांच को अमल में लाया गया है। इससे साफ है कि जिलों में जांच अभी सिर्फ कागजों पर है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम जनता के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह सरकारी पैसे की पारदर्शिता से जुड़ा मामला है। सरकारी स्कूल के मेंटेनेंस के लिए दिया गया पैसा जनता के टैक्स से आता है। यदि यह पैसा बिना काम किए ही फर्मों को दे दिया जाए, तो यह जवाबदेही के सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है।
जांच रिपोर्ट को विधानसभा और मंत्री से छिपाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके बच्चों की शिक्षा के लिए बना पैसा कहां खर्च हो रहा है। यह खबर जनता को जागरूक करती है और जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय करने में मदद करती है।
FAQ
- मध्य प्रदेश का स्कूल मेंटेनेंस घोटाला कितने करोड़ का है?
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मेंटेनेंस के नाम पर करीब 149 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। यह घोटाला सबसे पहले मैहर जिले के रामनगर ब्लॉक में पकड़ा गया था, जहां 4.37 करोड़ रुपए की गड़बड़ी मिली। बाद की जांच में पता चला कि यह घोटाला मध्य प्रदेश के 60 से ज्यादा ब्लॉक में फैला हुआ है।
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