अब स्कूलों में घटिया सामान नहीं दे सकेगा वेंडर: एमपी शिक्षा विभाग वेंडरों से लेगा शपथ-पत्र
BHOPAL. मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा विभाग ने स्कूलों में भेजे जाने वाले सामान की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। अब कोई भी वेंडर या सप्लायर केवल सामान पहुंचाकर भुगतान लेकर बच नहीं पाएगा। विभाग जल्द ही ऐसा आदेश जारी करने जा रहा है, जिसके तहत हर वेंडर को सप्लाई से पहले और हर बिल के साथ शपथ-पत्र (एफिडेविट) देना होगा।
इस शपथ-पत्र में वेंडर को लिखकर देना होगा कि उसने खुद सभी सामान की गुणवत्ता, मात्रा और सैंपल से मिलान की जांच कर ली है। अगर बाद में स्कूलों में सामान कम, खराब या सैंपल से अलग पाया गया, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित वेंडर की होगी और विभाग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकेगा।
स्कूलों में सप्लाई पर अब सख्त निगरानी
स्कूल शिक्षा विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि कई बार स्कूलों तक पहुंचने वाला सामान तय मानकों के अनुरूप नहीं होता। कई मामलों में सामान कम या खराब निकलता है। इसी स्थिति को देखते हुए विभाग अब सप्लाई प्रक्रिया में वेंडरों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने जा रहा है। नया सिस्टम लागू होने के बाद सप्लायर को लिखित रूप से यह प्रमाणित करना होगा कि जो सामान भेजा गया है वह पूरी तरह सही और मानक के अनुसार है।
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हर बिल के साथ देना होगा शपथ-पत्र
नई व्यवस्था के तहत वेंडरों को केवल सप्लाई ऑर्डर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें विभाग को हर भुगतान बिल के साथ शपथ-पत्र जमा करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि सामान की जांच और सत्यापन उनके द्वारा किया गया है। इससे विभाग के पास दस्तावेजी आधार रहेगा और भविष्य में शिकायत आने पर सीधे जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
वेंडरों को शपथ-पत्र में क्या-क्या लिखकर देना होगा
विभाग द्वारा तैयार प्रारूप के अनुसार सप्लायर को निम्न प्रमुख बातें लिखकर देनी होंगी- कंपनी का अधिकृत अधिकारी शपथ लेकर यह घोषित करेगा कि वह कंपनी की ओर से यह प्रमाणपत्र देने के लिए अधिकृत है। सप्लाई किया गया पूरा सामान विभाग द्वारा तय तकनीकी मापदंड और स्वीकृत सैंपल के अनुसार है। सभी किट और सामग्री नई, अप्रयुक्त और बिना किसी निर्माण दोष के हैं। अनुबंध में तय मात्रा और स्पेसिफिकेशन के अनुसार ही सामान भेजा गया है।
विभाग द्वारा दी गई सूची के अनुसार हर स्कूल तक सामान पहुंचाया गया है। प्रत्येक स्कूल से प्रधानाध्यापक या अधिकृत अधिकारी की रसीद/स्वीकृति ली गई है। सप्लाई में कहीं भी डुप्लीकेट, घटिया या खराब सामग्री नहीं दी गई है।
कमी मिली तो तुरंत बदलना होगा सामान
एफिडेविट में यह भी स्पष्ट रहेगा कि अगर किसी स्कूल से शिकायत आती है तो जिम्मेदारी सीधे वेंडर की मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में वेंडर को अपने खर्च पर तुरंत सामान बदलना या कमी पूरी करनी होगी।
शिकायत के प्रमुख आधार
- किसी स्कूल में सामान न पहुंचना
- कम मात्रा में सप्लाई
- घटिया या खराब सामग्री
- गलत या फर्जी डिलीवरी रिपोर्ट
- इनमें से किसी भी मामले में विभाग कार्रवाई कर सकेगा।
सरकार को नुकसान हुआ तो वसूली भी
शपथ पत्र में यह भी शामिल होगा कि यदि सप्लाई में गड़बड़ी के कारण सरकार को आर्थिक नुकसान होता है तो उसकी भरपाई वेंडर से की जाएगी। विभाग को यह अधिकार रहेगा कि वह राशि को बिल भुगतान, बैंक गारंटी या अन्य कानूनी माध्यम से वसूल कर सके।
गलत घोषणा पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
एफिडेविट में गलत जानकारी देना गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में वेंडर के खिलाफ कई तरह की कार्रवाई संभव होगी।
संभावित कार्रवाई
- अनुबंध समाप्त किया जा सकता है
- सुरक्षा जमा और बैंक गारंटी जब्त हो सकती है
- कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है
- आर्थिक नुकसान की भरपाई कराई जाएगी
- जरूरत पड़ने पर सिविल और आपराधिक केस भी दर्ज हो सकता है
प्रमुख सचिव का बयान
स्कूली शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस संजय गोयल का कहना है कि विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों तक पहुंचने वाला सामान पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण हो।
उनके अनुसार, “कोई भी ठेकेदार सिर्फ सामान सप्लाई करके अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। अब वेंडरों की जवाबदेही तय की जा रही है, ताकि बच्चों को सही और मानक के अनुरूप सामग्री मिल सके।”
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क्यों अहम है यह व्यवस्था
विशेषज्ञों के मुताबिक यह व्यवस्था लागू होने के बाद सप्लाई सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी। अब वेंडर के लिए केवल सामान भेज देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसे कागजी तौर पर भी गुणवत्ता और डिलीवरी की जिम्मेदारी लेनी होगी। इससे स्कूलों में घटिया या अधूरा सामान पहुंचने की संभावना काफी कम हो सकती है।