MP SEIAA में बड़ा खुलासा: बैठकों पर ब्रेक, फाइलों पर सन्नाटा और पर्यावरण मंजूरियों पर सवाल
मध्यप्रदेश में पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SEIAA) के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि न केवल प्राधिकरण की नियमित बैठकों में बाधा डाली जा रही है, बल्कि कई मामलों में कानूनी प्रावधानों की अनदेखी भी हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन प्रक्रियाओं का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, यदि उन्हीं का पालन नहीं हो रहा, तो प्रदेश में जारी पर्यावरणीय मंजूरियों की वैधता और विश्वसनीयता पर क्या असर पड़ेगा?
क्या है पूरा मामला?
SEIAA अध्यक्ष के अनुसार, 4 मई 2026 को हुई 948वीं बैठक का कार्यवाही विवरण (MOM) निर्धारित समय सीमा के भीतर परिवेश पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। जबकि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना 2006 के अनुसार बैठक के पांच कार्य दिवस के भीतर कार्यवाही सार्वजनिक करना अनिवार्य है। अध्यक्ष ने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का मामला बताया है।
नियमित बैठकें क्यों नहीं हो रहीं?
पत्र में दावा किया गया है कि जून 2026 में SEIAA की बैठकें 9 और 10 जून को प्रस्तावित थीं, लेकिन संबंधित स्तर से सूचना जारी नहीं की गई। अध्यक्ष का कहना है कि पर्यावरण मंजूरियों से जुड़े मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए नियमित बैठकें आवश्यक हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से हस्तक्षेप कर बैठकों को नियमित कराने की मांग की है।
237 पर्यावरण मंजूरियों पर उठे सवाल
पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पूर्व में कुछ मामलों में SEIAA की औपचारिक समीक्षा (Appraisal) के बिना ही 237 पर्यावरण अनुमतियां और टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए गए।
अध्यक्ष का कहना है कि इन मामलों को न तो प्राधिकरण की बैठक में रखा गया और न ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पर्यावरणीय मंजूरी प्रणाली के लिए बड़ा सवाल बन सकता है।
NGT के आदेश का भी हवाला
शिवनारायण सिंह चौहान ने अपने पत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 3 फरवरी 2026 के आदेश का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, NGT ने कुछ मामलों में यह माना था कि संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण मंजूरी जारी करने का अधिकार नहीं था।
पत्र में यह भी कहा गया है कि NGT द्वारा निरस्त की गई कुछ मंजूरियों के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पाई है।
17 एकड़ जंगल और सैकड़ों पेड़ों का मुद्दा
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कथित रूप से अवैध पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण 17 एकड़ सरकारी वन क्षेत्र प्रभावित हुआ और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हुई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
निवेश पर भी पड़ रहा असर
अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि कुछ विवादित आदेशों के कारण प्रदेश में लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश प्रभावित हो रहे हैं। उनका तर्क है कि कानूनी अस्पष्टता और प्रक्रियागत विवादों से उद्योगों के साथ-साथ रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है।
मुख्य सचिव से क्या मांगी गई कार्रवाई?
SEIAA अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से कई बिंदुओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इनमें शामिल हैं-
- SEIAA की बैठकों का नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
- सभी बैठकों के कार्यवाही विवरण निर्धारित समय सीमा में पोर्टल पर अपलोड कराए जाएं।
- कथित अवैध पर्यावरण मंजूरियों और ToR की समीक्षा कराई जाए।
- जिन अधिकारियों पर अनियमितताओं के आरोप हैं, उनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए।
- भारत सरकार की अधिसूचना S.O. 134(E) दिनांक 7 जनवरी 2025 का पालन सुनिश्चित किया जाए।
यह पूरा मामला केवल विभागीय विवाद तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या पर्यावरणीय मंजूरियों से जुड़ी संस्थागत व्यवस्था अपनी मूल भावना के अनुरूप काम कर रही है? यदि प्रक्रियाएं बाधित होती हैं, तो इसका असर पर्यावरण संरक्षण, निवेश और शासन की पारदर्शिता-तीनों पर पड़ सकता है।
अब निगाहें मुख्य सचिव और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला मध्यप्रदेश में पर्यावरणीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।
मामले के मुख्य बिंदू...
- 948वीं SEIAA बैठक का MOM तय समय में अपलोड नहीं हुआ।
- जून 2026 की प्रस्तावित बैठकों के आयोजन पर सवाल।
- 237 पर्यावरण मंजूरियों और TOR की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप।
- NGT के आदेशों का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग।
- 17 एकड़ वन क्षेत्र प्रभावित होने का दावा।
- लगभग 300 करोड़ रुपए के निवेश पर असर पड़ने की आशंका।
- मुख्य सचिव से जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग।
यह खबरें भी पढ़ें...
पर्यावरण मंजूरी पर नया विवाद : केंद्र बना रहा SAEIA, MP की SEIAA ने उठाए बड़े सवाल
मध्य प्रदेश SEIAA विवाद की जांच के लिए केंद्र ने बनाई कमेटी, ये IAS अफसर दिल्ली तलब
SEIAA विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, दो IAS अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल, कहा- स्वतंत्र निकाय के हक हड़पे
Bhopal Air Pollution पर NGT की सख्ती : करोड़ों खर्च फिर भी राजधानी की हवा जहरीली क्यों?