एमपी में AC बस में आग, जिस बस में पिता बचा रहे थे दूसरों की जान, उसमें जिंदा जला 4 साल का मासूम
क्या है पूरा मामला
इंदौर से ग्वालियर जा रही AC बस में शॉर्ट सर्किट से आग लगी।
4 साल के मासूम अनय जैन की बस में जलकर मौत हो गई।
बस में न इमरजेंसी गेट था, न आग बुझाने का यंत्र मौजूद था।
पहली फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) खाली टैंक लेकर पहुंची।
पिता अभिषेक ने खुद जान जोखिम में डालकर यात्रियों को बचाया।
वो रात जो एक बाप कभी नहीं भूल पाएगा
दिन था शुक्रवार (15 मई)। रात के 10 बज रहे थे। शिवपुरी के अभिषेक जैन अपनी पत्नी और दोनों बेटों के साथ इंदौर से घर लौट रहे थे। इंटरसिटी एक्सप्रेस एयरकंडीशन बस में सीट मिली थी। सफर आरामदेह लग रहा था। किसी को नहीं पता था कि यह रात उनकी जिंदगी की सबसे काली रात बन जाएगी।
रात करीब 12 बजे बस शाजापुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे पर होटल जैन पथ के सामने रुकी। कुछ यात्री नाश्ते के लिए नीचे उतर गए। कुछ बस में ही बैठे रहे। उनमें से एक था 4 साल का अनय।
जलने की बदबू आई, पर ड्राइवर ने नहीं सुना
बस में आग लगने से पहले ही खतरे की आहट आ रही थी। यात्रियों को काफी देर से वायरिंग जलने की बदबू आ रही थी। महिला यात्री मालती शर्मा सहित कई लोगों ने बस चालक को इसकी शिकायत की।
चालक ने किसी की नहीं सुनी। उसने चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। बस रुकने के महज 5 मिनट बाद आग भड़क उठी। पलभर में बस के अंदर चीख-पुकार मच गई।
बाहर नहीं निकल सका मासूम
बस में 50 से अधिक यात्री सवार थे। आग लगते ही भगदड़ मच गई। इसी भगदड़ में चार साल का अनय फंस गया। वह इतना छोटा था कि भीड़ में रास्ता नहीं बना पाया। परिजन उस तक पहुंचने की कोशिश करते रहे, पर तब तक आग विकराल हो चुकी थी।
बस में न कोई इमरजेंसी खिड़की थी, न फायर एक्सटिंगुइशर। मेन दरवाजा भी नहीं खुल रहा था। स्थानीय लोगों ने कांच और खिड़कियां तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला। इसी अफरातफरी में बस का ड्राइवर और क्लीनर मौके से फरार हो गए।
दो घंटे चला सर्च, सीट के नीचे मिला कंकाल
आग पर काबू पाने के बाद भी अनय का कोई पता नहीं था। प्रशासन ने जेसीबी (JCB) मशीन बुलाई। बस के गेट और खिड़कियां काटी गईं। वेल्डिंग मिस्त्री ने पीछे का रास्ता बनाया। सीटें हटाई गईं। करीब दो घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद एक सीट के नीचे से मासूम अनय का कंकाल मिला। उसे पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल शाजापुर भेजा गया।
टूटे हुए बाप ने बचाई दूसरों की जान
अभिषेक जैन उस वक्त बस के मलबे में रोते-बिलखते अपने बेटे को ढूंढ रहे थे। तभी उन्हें किसी यात्री के गिरे हुए लाखों रुपए के सोने के गहने मिले। खुद का सब कुछ उजड़ जाने के बाद भी उन्होंने वे गहने तुरंत तराना थाना प्रभारी (TI) रामचरण भदौरिया को सौंप दिए।
एक टूटे हुए इंसान से ऐसी ईमानदारी की उम्मीद कम ही लोग रखते हैं। इतना ही नहीं, आग लगने के तुरंत बाद अभिषेक ने खुद अपनी जान खतरे में डालकर कई यात्रियों को बस से बाहर निकाला। जिस बस में उनका बेटा जल रहा था, उसी बस में वे दूसरों की जान बचा रहे थे।
पहली फायर ब्रिगेड में पानी ही नहीं था
अस्पताल में अभिषेक ने जो कहा वह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद उन्होंने खुद फायर ब्रिगेड को फोन किया। आधे घंटे बाद जो गाड़ी आई, उसमें पानी ही नहीं था। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन लोगों की जान ले रहा है।
मीडिया से उनकी गुजारिश थी कि इस मामले को आगे उठाएं ताकि किसी और का बच्चा ऐसे न जले। बाद में मक्सी, तराना और शाजापुर से 5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आईं और काफी देर बाद आग पर काबू पाया जा सका।
तराना थाना प्रभारी रामचरण भदौरिया ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
इस हादसे (AC बस में भीषण आग) ने कई जरूरी सवाल खड़े किए हैं। बस में इमरजेंसी गेट क्यों नहीं था? अग्निशमन यंत्र क्यों नहीं था? ड्राइवर ने यात्रियों की चेतावनी क्यों नजरअंदाज की? और सबसे बड़ा सवाल, फायर ब्रिगेड की गाड़ी खाली टैंक लेकर क्यों आई? एक मासूम की जान गई, क्योंकि सिस्टम के हर स्तर पर लापरवाही हुई।
खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की कहानी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (Article 21) हर नागरिक को जीवन का अधिकार देता है।
जब एक बस में न इमरजेंसी गेट हो, न अग्निशमन यंत्र और फायर ब्रिगेड खाली टैंक लेकर पहुंचे, तो यह उस अधिकार का सीधा हनन है। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत सभी यात्री वाहनों में आपातकालीन सुविधाएं अनिवार्य हैं।
इस खबर से आम नागरिक को यह जानने का हक मिलता है कि जिस बस में वे सफर करते हैं, वह कितनी असुरक्षित हो सकती है। यह खबर प्रशासनिक जवाबदेही, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल उठाती है।
FAQ
- बस में आग लगने पर यात्रियों को क्या करना चाहिए?
बस में आग लगते ही सबसे पहले शांत रहें और घबराएं नहीं। इमरजेंसी खिड़की या गेट का इस्तेमाल करें। अगर दरवाजा न खुले तो सीट के हेडरेस्ट की मेटल रॉड से कांच तोड़ें। बस के अग्निशमन यंत्र को ढूंढें और इस्तेमाल करें। जमीन पर झुककर धुएं से बचें। बस से बाहर निकलते ही दूर हटें और फायर ब्रिगेड को तुरंत फोन करें। - यात्री बस में कौन-कौन सी सुरक्षा सुविधाएं होनी जरूरी हैं?
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत हर यात्री बस में इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) यानी आपातकालीन खिड़की या दरवाजा अनिवार्य है। साथ ही कम से कम एक अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) होना जरूरी है। फर्स्ट एड (First Aid) किट भी होनी चाहिए। शाजापुर हादसे में इनमें से कोई भी सुविधा बस में नहीं थी, जो साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
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