नीलामी फेल: अब एमपी में निगम-मंडल चलाएंगे शराब की दुकानें
News In Short
- मध्यप्रदेश में 489 शराब दुकानें 12 चरणों की नीलामी के बाद भी नहीं बिक सकीं।
- अब इन्हें चलाने के लिए सरकार निगम-मंडल बनाएगी।
- उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्री मंडलीय समिति ने शुक्रवार को यह फैसला लिया है।
- नया निगम-मंडल आबकारी विभाग (Excise Department) के अधीन काम करेगा।
News In Detail
नीलामी फेल, अब सरकार की बारी
मध्यप्रदेश में शराब की दुकानों की नीलामी प्रक्रिया कई बार आजमाई गई। पूरे 12 चरणों में नीलामी हुई, फिर भी 489 दुकानें नहीं बिक पाईं। आने वाले वर्षों में इन दुकानों की संख्या घट या बढ़ भी सकती है।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में शुक्रवार, 03 अप्रैल को मंत्री मंडलीय समिति (Cabinet Sub-Committee) की बैठक हुई।
इस बैठक में तय हुआ कि इन दुकानों को एमपी निगम-मंडल के जरिए चलाया जाएगा। इस बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर तथा आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना भी मौजूद थे।
नया निगम-मंडल कैसे होगा?
सरकार इसके लिए नया निगम-मंडल गठित करेगी। यह निगम-मंडल आबकारी विभाग के अधीन रहेगा। संचालन और क्रियान्वयन को लेकर अलग से गाइडलाइन भी तैयार होगी। विभागीय मंत्रियों के पास ही इसका प्रभार रहेगा।
प्रदेश में पहले से 40 से अधिक निगम-मंडल हैं। इनमें से कई के अध्यक्ष नहीं हैं। कई की हालत ठीक नहीं है। ऐसे में एक और नए निगम-मंडल का गठन सरकार के सामने एक अहम प्रशासनिक चुनौती होगी।
21 साल पहले बंद हुआ सड़क विकास निगम
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सड़क विकास निगम (Road Development Corporation) की चर्चा भी जरूरी है। यह निगम परिवहन सुविधाओं के लिए काम करता था। इसके तहत सरकारी बसों का संचालन होता था।
वहीं, उस दौर में कुछ अफसरों के कारण यह निगम घाटे में चला गया। तत्कालीन सरकार ने 2005 में इस पर ताला लगा दिया था। अब मोहन सरकार इसे दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
यह उदाहरण बताता है कि निगम-मंडलों का संचालन आसान नहीं होता। बिना मजबूत प्रशासनिक ढांचे के ये संस्थाएं घाटे में चली जाती हैं।
प्रदेश में निगम-मंडलों की हालत
प्रदेश में 40 से ज्यादा निगम-मंडल चल रहे हैं। इनमें से कई के अध्यक्ष पद खाली पड़े हैं। विभागीय मंत्रियों के पास ही इनका जिम्मा है। कई निगम-मंडलों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। इसी पृष्ठभूमि में नया निगम-मंडल बनाने का फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरियों से अहम है।
आगे क्या होगा?
नया निगम-मंडल बनने के बाद शराब दुकानों की नीति अलग से तय की जाएगी। संचालन के लिए पूरा ढांचा खड़ा किया जाएगा। गाइडलाइन भी जारी होगी। सरकार का मकसद है कि ये दुकानें बंद न रहें और राजस्व का नुकसान न हो।
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