MP में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 66% पद खाली, हर महीने होगी सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के हजारों पद खाली हैं।
- कुल 5443 स्वीकृत पदों में से 3571 पद खाली हैं।
- यह कुल पदों का करीब 66% हिस्सा है।
- सरकार ने अब भर्ती का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
- अब हर महीने एमपी ऑनलाइन से आवेदन लेकर सीधी भर्ती होगी।
क्यों बदली भर्ती व्यवस्था
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। कुल 5443 स्वीकृत पदों में से 3571 पद खाली पड़े हैं। यह आंकड़ा करीब 66% है। इतनी बड़ी कमी से मरीजों को इलाज में परेशानी होती है। खासकर बड़े ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों के इलाज में दिक्कत आती है।
इसी वजह से सरकार ने भर्ती का तरीका बदलने का फैसला किया। पहले हर भर्ती के लिए मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC (Madhya Pradesh Public Service Commission) का इंतजार करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। कई बार पूरी भर्ती में महीनों निकल जाते थे। अब यह लंबा इंतजार खत्म हो गया है।
हर महीने होगी सीधी भर्ती
अब हर महीने एमपी ऑनलाइन के जरिए आवेदन लिए जाएंगे। यह व्यवस्था फिलहाल एक साल के लिए लागू की गई है। हर महीने की पहली तारीख को खाली पदों की जानकारी वेबसाइट पर जारी होगी।
इसके बाद 15 तारीख तक डॉक्टर आवेदन कर सकेंगे। इससे भर्ती की प्रक्रिया काफी तेज होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस तरीके से खाली पद जल्दी भरेंगे। मरीजों को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
कैसे होगा चयन
आवेदनों की जांच और चयन के लिए एक विभागीय समिति बनाई गई है। इस समिति के अध्यक्ष आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग होंगे। संचालक राजपत्रित इस समिति के सदस्य सचिव रहेंगे। समिति में संबंधित विषय के एक विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा SC/ST (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) वर्ग से नामांकित सदस्य भी रहेंगे। यह समिति सभी आवेदनों की बारीकी से जांच करेगी। इसके बाद साक्षात्कार लिया जाएगा और मेरिट सूची बनाई जाएगी। साथ ही उम्मीदवारों के मूल दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा।
तीन साल तक तबादला नहीं
चयनित डॉक्टर की पोस्टिंग उसी अस्पताल या संस्थान में होगी, जहां पद खाली था। नियम के मुताबिक तीन साल तक उनका तबादला नहीं किया जाएगा। इससे मरीजों को लंबे समय तक एक ही डॉक्टर की सेवा मिल सकेगी।
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के अस्पतालों को भी इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अक्सर देखा गया है कि दूर के अस्पतालों में डॉक्टर टिकते नहीं थे। इस नए नियम से यह समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।
पहले की भर्ती में क्या हुआ
इससे पहले MPPSC के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती हुई थी। उस भर्ती में कुल 988 पद निकाले गए थे। लेकिन इनमें से आधे पद भी नहीं भर पाए थे। यानी करीब 50% पद खाली ही रह गए थे। यही सबसे बड़ी वजह है कि सरकार को नई व्यवस्था लानी पड़ी। पुराने तरीके से भर्ती में लगातार देरी हो रही थी।
आंकड़ों में गड़बड़ी क्यों
सरकार के आदेश में कुछ आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते। जैसे दंत चिकित्सा में 103 पद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ 3 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इस हिसाब से 100 पद खाली होने चाहिए। लेकिन आदेश में सिर्फ 52 रिक्तियां दर्ज हैं।
मानसिक रोग विभाग में भी यही अंतर दिखता है। यहां 39 पद स्वीकृत हैं और कोई भी डॉक्टर कार्यरत नहीं है। फिर भी आदेश में 50 पद खाली बताए गए हैं। चर्म रोग विभाग में भी समस्या नजर आती है। यहां 54 पद स्वीकृत हैं और 23 डॉक्टर पहले से काम कर रहे हैं। इस हिसाब से 31 पद खाली होने चाहिए। लेकिन आदेश में 68 रिक्तियां दिखाई गई हैं।
आदेश में यह भी साफ नहीं है कि डॉक्टरों का प्रोरेटा किस आधार पर तय होगा। इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि सभी विशेषज्ञताओं को जोड़ने पर कुल आंकड़ा सही निकलता है। कुल 3571 पद खाली होने की बात पूरी तरह सही पाई गई है। इससे साफ है कि विभाग स्तर के आंकड़ों में ही गड़बड़ी है।
ये खबरें भी पढ़िए...
MP News: बस एक इंजेक्शन और हमेशा के लिए कंट्रोल हो जाएगा कोलेस्ट्रॉल
MP हाईकोर्ट में 1174 पदों पर बंपर भर्ती: सहायक ग्रेड-III के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू
97 हजार आंगनवाड़ियां राशन को तरसीं, मध्य प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद
खेत से सीधा आपकी थाली तक पहुंच रहा जहर: विदेश भी नहीं खरीद रहा भारतीय कृषि उत्पाद