भोपाल की चक्की में पिस रहे जहर वाले मसाले? हल्दी में लेड क्रोमेट, तो मिर्च पाउडर में धड़ल्ले से मिल रहा ईंट का चूरा

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 11, 2026, 13:20 IST
भोपाल में जांच से बाहर मिलावटी मसाले का असली सच
एमपी में मसालों में मिलावटकी रिपोर्ट सामने आई है। हल्दी में लेड क्रोमेट और मिर्च में ईंट का चूरा मिल रहा है। इलायची और सौंफ मैलाकाइट ग्रीन रंग के कारण जहरीली बताई गई हैं। 25 मसाला प्रोसेसिंग यूनिट और 1700 चक्कियां हैं। इनमें से एक फीसदी पर भी कार्रवाई नहीं हुई। सालाना 500 करोड़ रुपए का कारोबार है। मिलावटी मसाले जांच से बाहर हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भोपाल में मसालों में मिलावट की रिपोर्ट सामने आई है।
  • हल्दी में लेड क्रोमेट, मिर्च में ईंट का चूरा मिलाने की बात है।
  • इलायची और सौंफ को चमकाने में मैलाकाइट ग्रीन इस्तेमाल हो रहा है।
  • 25 प्रमुख यूनिट और 1700 चक्कियों में एक फीसदी पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
  • जिला खाद्य एवं औषधि नियंत्रक के मुताबिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

हल्दी में लेड, मिर्च में ईंट

हल्दी में मिलावट यानी turmeric adulteration में लेड क्रोमेट (शीशा) का नाम आया है। पाउडर में मेटानिल येलो (सिंथेटिक पीला रंग) भी बताया गया है। पीली मिट्टी, चॉक पाउडर और मक्के का आटा भी इसी सूची में हैं।



लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा मिलाने का जिक्र है। लकड़ी का बुरादा और स्टार्च भी सूची में हैं। रोडामाइन और सूडान रेड रंग कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले) बताए गए हैं।



काली मिर्च और धनिया में क्या मिला?

काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज मिलाने की बात है। जंगली बेर की गुठलियां भी इसमें शामिल हैं। चमक बढ़ाने के लिए मिनरल ऑयल लगाया जाता है।



धनिया पाउडर में धान की भूसी और लकड़ी का बुरादा बताया गया है। सूखे पत्ते और कृत्रिम रंग का भी जिक्र है।



जीरे में झाड़ू के तिनके का दावा

जीरे में झाड़ू के तिनके मिलाने का दावा है। इन तिनकों को चारकोल या कोलतार के घोल से रंगा जाता है। घास के बीज और स्टार्च से बने नकली दाने भी मिलाए जाते हैं।



रिपोर्ट में जहरीली इलायची सौंफ का भी जिक्र है। पुरानी या बेरंग इलायची और सौंफ को चमकाया जा रहा है। इसके लिए मैलाकाइट ग्रीन (हरा केमिकल रंग) इस्तेमाल हो रहा है।



भोपाल के पारंपरिक व्यंजन कोरमा, बिरयानी और मुगलाई डिशेज हैं। इनके कारण लौंग, दालचीनी, जावित्री और जायफल की मांग ज्यादा रहती है। शाहजीरा, तेजपत्ता और हरी या बड़ी इलायची की भी मांग रहती है।



मसाला प्रोसेसिंग यूनिट पर सवाल

मसाला प्रोसेसिंग यूनिट (मसाला तैयार करने की इकाई) की संख्या 25 बताई गई है। इसके अलावा 1700 मसाला चक्कियां हैं। इनमें से एक फीसदी पर भी अब तक कार्रवाई नहीं हुई।



1700 चक्कियों का एक फीसदी सिर्फ 17 चक्कियां होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इतनी चक्कियों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।



किस उत्पाद को पीसकर मसाला बन रहा है? पैकिंग से पहले उसमें क्या मिलाया जा रहा है? रिपोर्ट के मुताबिक यह किसी को पता नहीं है।



मसालों का सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपए का है। यानी रोज करीब 1.4 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। इसमें 200 करोड़ रुपए स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट में पिसे मसालों का हिस्सा है।



भोपाल मसाला चक्की का दायरा

भोपाल मसाला चक्की से जुड़ा बाजार घर की रसोई तक फैला है। जिले की 40 फीसदी आबादी साबुत मसाले स्थानीय चक्कियों से पिसवाती है। कुछ लोग मसाले सीधे इन्हीं से खरीदते हैं। यानी हर 100 में से 40 लोग चक्की के मसाले पर निर्भर हैं।



पुराने भोपाल का स्ट्रीट फूड सेक्टर इन मसालों की सबसे ज्यादा खपत करता है। मैरिज गार्डन, रेस्टोरेंट और कैटरिंग में बल्क पैक (थोक पैकिंग) मसाले चलते हैं। गोविंदपुरा, मंडीदीप और करोंद की यूनिट में बल्क में पिसाई होती है।



रोज की रसोई में धनिया पाउडर, हल्दी और तीखी लाल मिर्च चलती है। कश्मीरी मिर्च, जीरा, राई और सौंफ भी रोज के मसाले हैं।



मध्य प्रदेश खाद्य सुरक्षा का सवाल

असली सवाल यहीं से शुरू होता है। मसाला बनाने वाली 25 प्रमुख यूनिट और 1700 चक्कियों में जांच कब तक पहुंचेगी?



नियंत्रक के मुताबिक कार्रवाई हुई है और जारी रहेगी। रिपोर्ट के आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। अब देखना होगा कि जांच का दायरा चक्कियों और यूनिट तक कब पहुंचता है।



यह खबर क्यों जरूरी है

मसाले रोज हर रसोई में इस्तेमाल होते हैं। इसलिए इनकी शुद्धता सीधे परिवार की सेहत से जुड़ी है। संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है। सुप्रीम कोर्ट इसमें स्वास्थ्य को भी शामिल मानता रहा है। भोपाल में 1700 चक्कियों और 25 प्रमुख यूनिट का नेटवर्क है। जांच न हो तो खरीदार के पास सच जानने का कोई साधन नहीं बचता। थाली का भरोसा टूटे तो सबसे ज्यादा नुकसान आम उपभोक्ता का होता है।



FAQ

  1. भोपाल में मसालों में मिलावट की रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?
    भोपाल में मसालों में हो रही मिलावट में हल्दी में लेड क्रोमेट, मिर्च में ईंट का चूरा, इलायची और सौंफ में मैलाकाइट ग्रीन आदि का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है।
  2. भोपाल में मसाला प्रोसेसिंग यूनिट और चक्कियों में कार्रवाई का क्या हाल है?
    भोपाल में 25 प्रमुख मसाला प्रोसेसिंग यूनिट और 1700 चक्कियां हैं, जिनमें से एक फीसदी पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। जिला खाद्य एवं औषधि नियंत्रक ने बताया कि कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
  3. मसालों की मिलावट का लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
    मसालों की मिलावट से प्रभावित होने वाले लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा है क्योंकि मिलावटी सामग्री जैसे लेड और कैंसर पैदा करने वाले रंग पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
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