SPS से IPS बनेंगे 9 अफसर, आज DPC बैठक में अफसरों की पदोन्नति पर होगा फैसला
समझें क्या है पूरा मामला...
मध्यप्रदेश के नौ SPS अफसरों को IPS देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
आज गुरुवार को DPC (Departmental Promotion Committee) की बैठक होगी।
UPSC ने गृह विभाग के प्रस्ताव पर इस तारीख को मंजूरी दी थी।
1997 और 1998 बैच के कुल 27 अफसरों के नामों पर विचार किया जाएगा।
दो अफसरों की पदोन्नति अटकने के कयास लग रहे हैं।
27 नामों में से 9 बनेंगे IPS
मध्यप्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अफसरों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। गुरुवार, 25 जून को एक बड़ी बैठक होने वाली है। इसमें नौ अफसरों को आईपीएस बनाने पर फैसला होगा। यह बैठक गृह विभाग के प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग की मंजूरी के बाद होने वाली है।
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाना और यूपीएससी के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इस बार डीपीसी में 1997 और 1998 बैच के अफसरों के नामों पर विचार होगा। दोनों बैच मिलाकर कुल 27 नाम सामने हैं।
किन अफसरों के नाम हैं सूची में?
1997 बैच से सीताराम ससत्या और अमृत मीणा के नाम डीपीसी में शामिल हैं। बैच 1998 से निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा और सत्येन्द्र सिंह तोमर के नाम हैं। इन सभी समेत कुल 27 अफसर इस बार की डीपीसी के दायरे में आते हैं।
इन नामों में से नौ अफसरों को आईपीएस अवार्ड की सिफारिश की जाएगी। बाकी नामों पर अलग-अलग कारणों से विचार नहीं हो सकता या उनका मामला लंबित रह सकता है।
इन दो अफसरों की राह में अड़चन
अमृत मीणा के मामले में जाति प्रमाण पत्र का विवाद है। इस कारण उनकी डीपीसी अटक सकती है। राजेश मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। इसके चलते उनका भी मामला लटक सकता है।
इन दोनों का लिफाफा बंद रखा जा सकता है यानी डीपीसी में इनके नाम पर फैसला नहीं होगा। लिफाफा बंद होने का मतलब होता है कि संबंधित अफसर की पदोन्नति फिलहाल के लिए रोक दी जाती है।
ससत्या के नाम पर भी शिकायत
1997 बैच के सीताराम ससत्या को लेकर भी अंतिम वक्त पर एक शिकायत सामने आई है। इस शिकायत के चलते यह अटकलें लग रही हैं कि डीपीसी में उनका नाम कट सकता है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला बैठक में ही होगा।
SPS से IPS: प्रक्रिया कैसे काम करती है?
राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ अफसरों को एक तय प्रक्रिया के बाद भारतीय पुलिस सेवा में शामिल किया जाता है। इसके लिए राज्य सरकार का गृह विभाग यूपीएससी को प्रस्ताव भेजता है। यूपीएससी की मंजूरी के बाद डीपीसी की तारीख तय होती है।
डीपीसी में मुख्य सचिव, डीजीपी और यूपीएससी के प्रतिनिधि मिलकर नामों पर विचार करते हैं। इस बैठक में सेवा रिकॉर्ड, एसीआर (Annual Confidential Report) और किसी भी लंबित जांच का आकलन होता है। इसके बाद सिफारिशी सूची तैयार होती है।
गृह विभाग आगे, GAD अभी पीछे
दिलचस्प बात यह है कि जहां गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की डीपीसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD (General Administration Department) अभी तक राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए प्रस्ताव तक नहीं भेज पाया है। इससे IAS (Indian Administrative Service) पदोन्नति की प्रक्रिया पीछे चल रही है।
FAQ
- राज्य सेवा के अधिकारी IPS कैसे बनते हैं?
राज्य पुलिस सेवा में काम कर रहे अधिकारियों को उनकी वरिष्ठता, गोपनीय रिपोर्ट और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर आईपीएस में पदोन्नत किया जाता है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार की संयुक्त समिति मिलकर डीपीसी की बैठक करती है। इस प्रक्रिया में हर बैच के एक निश्चित अनुपात में ही अधिकारियों को चुना जाता है। - DPC क्या होती है?
डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति एक आधिकारिक कमेटी होती है जो सरकारी अधिकारियों की पदोन्नति तय करती है। इसमें यूपीएससी के प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव और संबंधित विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। समिति उम्मीदवारों की सीआर, विभागीय जांच, कोर्ट केस और अन्य रिकॉर्ड की समीक्षा करके अंतिम चयन करती है।
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