बिना बैंक गारंटी करोड़ों के काम, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?

Ramanand Tiwari | Jun 11, 2026, 08:15 IST
Share
बिना बैंक गारंटी करोड़ों के काम
बिना बैंक गारंटी करोड़ों के काम

एमपी के उद्यमिता विकास केन्द्र (सैडमेप) ने कई एजेंसियों को करोड़ों रुपए का काम बिना बैंक गारंटी दिए। नियमों के स्पष्ट प्रावधान के बावजूद कार्य जारी रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वित्तीय सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

मध्यप्रदेश में आउटसोर्सिंग सेवाओं के नाम पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शासन के स्पष्ट नियम होने के बावजूद उद्यमिता विकास केन्द्र (सैडमेप) द्वारा कई एजेंसियों को बिना अनिवार्य बैंक गारंटी के काम दिए जाने और लंबे समय तक उनसे सेवाएं लेने का मामला सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वित्तीय सुरक्षा के नियम साफ थे, तब आखिर उन्हें नजरअंदाज क्यों किया गया और किसके इशारे पर यह व्यवस्था वर्षों तक चलती रही?

नियम कुछ और, जमीनी हकीकत कुछ और

एमपी भंडार क्रय नियम तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 (संशोधित 2022) के तहत सैडमेप को विभिन्न विभागों के लिए आउटसोर्सिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए एजेंसियों को इम्पैनल कर कार्य आवंटित किए जाते हैं। नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि सेवा प्रदाता से संविदा मूल्य का सामान्यतः 3 प्रतिशत परफॉर्मेंस गारंटी। (Performance Guarantee) प्राप्त की जाएगी। यह बैंक गारंटी, डिमांड ड्राफ्ट या अन्य स्वीकृत माध्यम से जमा कराई जानी चाहिए।

करोड़ों के काम, लेकिन सुरक्षा गारंटी गायब!

दस्तावेज बताते हैं कि कई इम्पैनल्ड एजेंसियों से लंबे समय तक बिना बैंक गारंटी प्राप्त किए ही काम कराया जाता रहा। यानी जिन एजेंसियों को शासन के महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए, उनसे वित्तीय सुरक्षा की मूल शर्त तक पूरी नहीं कराई गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कोई एजेंसी कार्य अधूरा छोड़ देती या संविदा का उल्लंघन करती, तो शासन के हितों की रक्षा किस आधार पर की जाती?

जब नियम याद आए तो जारी हुआ नोटिस

मामला तब और दिलचस्प हो जाता है जब सैडमेप ने 13 मई 2026 को सभी इम्पैनल्ड एजेंसियों को सात दिन के भीतर बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश जारी किया। इस आदेश ने खुद यह संकेत दे दिया कि कहीं न कहीं लंबे समय से नियमों का पालन नहीं हो रहा था। यदि सब कुछ नियमानुसार था तो अचानक बैंक गारंटी जमा कराने की जरूरत क्यों पड़ी?

समय सीमा खत्म, फिर भी जारी कामकाज

सूत्रों के अनुसार सात दिन की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कई एजेंसियों ने बैंक गारंटी जमा नहीं कराई। इसके बावजूद इन एजेंसियों से कार्य लिया जाना जारी है। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब अनिवार्य शर्त पूरी नहीं हुई, तो एजेंसियों को काम जारी रखने की अनुमति किस आधार पर दी गई?

वित्तीय क्षमता पर भी सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक गारंटी केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एजेंसी की वित्तीय विश्वसनीयता का पैमाना होती है। यदि कोई एजेंसी निर्धारित बैंक गारंटी जमा नहीं करा पा रही है तो उसकी वित्तीय क्षमता और संसाधनों पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं। ऐसे में उन्हें सरकारी कार्य सौंपना जोखिमपूर्ण माना जाता है।

क्या बिना जांच के हुआ इम्पैनलमेंट?

मामले ने इम्पैनलमेंट प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एजेंसियों की वित्तीय क्षमता का उचित परीक्षण किया गया होता तो बैंक गारंटी जमा कराने में इतनी बड़ी संख्या में एजेंसियों को परेशानी क्यों आती? यह स्थिति संकेत देती है कि चयन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था दोनों की गंभीर समीक्षा की जरूरत है।

बड़े सवाल जिनका जवाब जरूरी

● बिना बैंक गारंटी एजेंसियों को काम देने की अनुमति किसने दी?
● नियमों के उल्लंघन की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
● क्या वित्तीय सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
● समय सीमा खत्म होने के बाद भी एजेंसियों से काम क्यों लिया जा रहा है?

क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होगी?

सैडमेप से जुड़ा यह मामला केवल प्रशासनिक चूक भर नहीं माना जा सकता। यह सरकारी खरीद और आउटसोर्सिंग ( outsourcing )व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इस मामले में जांच कर जवाबदेही तय करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

ये भी पढ़ें...

MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें, कांग्रेस विधायक राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार

मध्‍य प्रदेश : मनमर्जी की सीईओ-आरोप,आंदोलन, नाराजगी हर जगह, फिर भी कुर्सी सलामत

डेली कॉलेज बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर HC की रोक जारी, जांच आदेश में राहत

शंकराचार्य केस में आशुतोष ब्रह्मचारी पलटे, रामचंद्र दास के कहने पर की फर्जी FIR





Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • एमपी
  • मध्य प्रदेश
  • सैडमेप
  • outsourcing
  • बैंक गारंटी
  • उद्यमिता विकास केन्द्र
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती