21 जुलाई को पेश होगा MP का पहला अनुपूरक बजट, 7000 करोड़ में विकास का दावा

Ramanand Tiwari | Jul 19, 2026, 21:42 IST
mp-supplementary-budget-2026
मध्यप्रदेश सरकार का पहला अनुपूरक बजट 21 जुलाई को विधानसभा में पेश होगा, जिसमें पूंजीगत निवेश और अधोसंरचना विकास पर जोर दिया जाएगा, कम राशि के बावजूद विकास को रफ्तार मिलने का दावा किया जा रहा है।

ऐसे समझें पूरे मामले को

  • 21 जुलाई को विधानसभा में पहला अनुपूरक बजट पेश होगा।
  • कुल आकार करीब 7 हजार करोड़ रुपए।
  • फोकस पूंजीगत निवेश और अधोसंरचना विकास पर।
  • पीएम आवास, पंचायतों और नगरीय निकायों को अतिरिक्त सहायता।
  • जीरो बेस्ड बजटिंग का असर बजट के आकार में दिखाई दिया।
  • लक्ष्य-कम अतिरिक्त खर्च में ज्यादा विकास कार्य पूरे करना।

अनुपूरक बजट के बहाने सरकार का फोकस अब 'ज्यादा खर्च' नहीं, बल्कि 'स्मार्ट निवेश' पर है। 21 जुलाई को पेश होने वाला पहला अनुपूरक बजट बताएगा कि सीमित संसाधनों से विकास परियोजनाओं को कैसे गति देने की तैयारी है।



मध्यप्रदेश सरकार 21 जुलाई को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। करीब 7 हजार करोड़ रुपए के इस बजट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सरकार अतिरिक्त खर्च बढ़ाने के बजाय जरूरी विकास कार्यों में पूंजीगत निवेश पर जोर दे रही है। यानी कम राशि के जरिए अधिक विकास हासिल करने की रणनीति अपनाई जा रही है।



क्या है इस अनुपूरक बजट की सबसे बड़ी खासियत?

इस बार अनुपूरक बजट पिछले कुछ वर्षों का दूसरा सबसे छोटा माना जा रहा है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि अधोसंरचना, आवास और स्थानीय निकायों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की गति प्रभावित नहीं होगी।



सरकार का फोकस राजस्व खर्च बढ़ाने के बजाय ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनसे भविष्य में स्थायी विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।



किन योजनाओं को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

अनुपूरक बजट में कई प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है।



मुख्य बिंदु-

  • प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए राज्यांश।
  • 16वें वित्त आयोग के अनुरूप पंचायतों और नगरीय निकायों को अतिरिक्त सहायता।
  • अधोसंरचना और निर्माण परियोजनाओं के लिए पूंजीगत निवेश।
  • केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यांश की व्यवस्था।
  • पहले से स्वीकृत विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त फंड।

जीरो बेस्ड बजटिंग का असर अब साफ दिखने लगा

वित्त विभाग का मानना है कि इस बार अनुपूरक बजट का छोटा आकार जीरो बेस्ड बजटिंग नीति का परिणाम है। इस व्यवस्था में विभागों को मुख्य बजट के समय ही उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार राशि देने का प्रयास किया जाता है, ताकि साल के बीच बार-बार अतिरिक्त बजट की जरूरत कम पड़े।



पिछले साल क्या रहा था रिकॉर्ड?

वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट केवल 2,356.30 करोड़ रुपए का था, जो कई वर्षों में सबसे छोटा रहा।


हालांकि बाद में विभागों की अतिरिक्त मांग बढ़ने पर दूसरा अनुपूरक बजट 13,476.94 करोड़ रुपए और तीसरा 19,287.32 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।



अनुपूरक बजट की जरूरत क्यों पड़ती है?-

सरकार फरवरी 2026 में ही 4.38 लाख करोड़ रुपए से अधिक का मुख्य बजट पेश कर चुकी थी। लेकिन वर्ष के दौरान नई योजनाएं शुरू होने, केंद्र की योजनाओं में राज्यांश देने और पहले से चल रही परियोजनाओं में धन की कमी होने पर अनुपूरक बजट के जरिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।



क्या अनुपूरक बजट की कोई तय सीमा होती है?

नहीं। अनुपूरक बजट का आकार पूरी तरह सरकार की प्राथमिकताओं, विभागों की अतिरिक्त मांग और उस समय की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है।



यदि किसी विभाग को स्वीकृत बजट से अधिक राशि चाहिए या अचानक प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा या राहत कार्यों जैसी परिस्थितियां बनती हैं, तो सरकार अनुपूरक बजट के माध्यम से अतिरिक्त धन उपलब्ध कराती है।



यह खबरें भी पढ़ें...



MP यूसीसी की फाइनल रिपोर्ट तैयार, समिति ने सीएम को सौंपी, मानसून सत्र में होगा पेश



संसद में उठेगा बड़ा सवाल: जस्टिस यशवंत वर्मा रिपोर्ट मानसून सत्र में होगी पेश



5 अगस्त से एमपी को नई ट्रेन की सौगात, आसान होगा प्रयागराज-बेंगलुरु तक का सफर



परिवहन विभाग की प्राथमिकता पर सवाल! वसूली में रफ्तार, जनता के कार्ड पर दो साल की चुप्पी







Tags:
  • मध्यप्रदेश सरकार
  • अनुपूरक बजट
  • प्रधानमंत्री आवास योजना
  • वित्त विभाग
  • विधानसभा